अगस्त से 90 फीसदी ट्रेन तय समय पर : पीयूष गोयल

| June 17, 2018

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि अगस्त से 90% ट्रेनें समय पर पहुंचेंगी। रेलमंत्री ने दो माह के भीतर देशभर में ट्रेनों के समयपालन में सुधार लाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में ट्रेनों का समयपालन 65% पहुंच गया है। कई जोन में यह 45 फीसदी तक है।.

गोयल ने ट्रेनों के समयपालन में सुधार के लिए कई नियमों में बदलाव किए हैं। वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को घर जाने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक,समीक्षा बैठक में रेलमंत्री के तेवर काफी सख्त थे। उन्होंने बैठक में शामिल जोनल महाप्रबंधकों व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सभी डीआरएम को ट्रेन समयपालन सही करने को कहा। गोयल ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जिन जोनल रेलवे से चलने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलेंगी उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।








इलाहाबाद-मुगलसराय के बीच तीसरी लाइन : रेल मंत्री ने इलाहाबाद से मुगलसराय के बीच तीसरी लाइन बिछाने के कार्य को मंजूरी दी है। मालूम हो कि उक्त सेक्शन पर अत्यधिक ट्रेनों के दबाव के कारण यात्री ट्रेनें लेट हो जाती हैं।

पीयूष गोयल ने रेलवे ट्रैक से जुड़े कार्यों के लिए रविवार अथवा सोमवार को प्लान ट्रैफिक ब्लॉक यानी पांच घंटे का मेगा ब्लॉक देने का फैसला किया है। मेगा ब्लॉक की जानकारी यात्रियों को विज्ञापन के जरिये पहले दे दी जाएगी।.




यात्री के सामान की सुरक्षा करना रेलवे की जिम्मेदारी
यह ट्रेन के अंदर यात्री का सामान चोरी होने का मामला है, जिसमें उपभोक्ता को मुआवजा देने का मामला राष्ट्रीय आयोग तक पहुंचा। आयोग ने पाया कि यात्री के सामान की सुरक्षा रेलवे की जिम्मेदारी है। .

इस मामले में चलती ट्रेन के अंदर यात्री का सामान चोरी हो गया था। इसके खिलाफ रेलवे की लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। उपभोक्ता ने लापरवाही को लेकर मुआवजे की मांग की थी। फोरम ने शिकायत को मंजूर कर लिया था और रेलवे को 30 हजार रुपये ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।




इसके खिलाफ रेलवे ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दर्ज कराई। पहले राज्य आयोग ने अपील मंजूर कर ली थी और उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ उपभोक्ता ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में रिवीजन पिटीशन दाखिल की। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने शिकायत मंजूर कर ली थी और मेरिट के आधार पर सुनवाई का निर्देश देते हुए केस को दोबारा राज्य उपभोक्ता आयोग के पास भेज दिया गया। राज्य उपभोक्ता आयोग ने तब मामले की सुनवाई की और उसने 30 हजार के मुआवजे को घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ रेलवे विभाग राष्ट्रीय आयोग के समक्ष रिवीजन पिटीशन दाखिल की।

रेलवे की दलील थी कि रेलवे एक्ट के तहत को संज्ञान में नहीं लिया है । आयोग ने यह याचिका खारिज कर दी और सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। आयोग ने कहा कि अगर जनहित का कोई बड़ा मामला नहीं हो तो छोटे मामलों के लिए विभागों को नहीं दौड़ना चाहिए। आयोग ने राज्य आयोग के फैसले को ही बरकरार रखा। हालांकि आयोग ने कानून से जुड़े सवाल को विचारार्थ स्वीकार किया।

Category: Indian Railways, News

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