Secretary to GM and Railway Board submitted false affidavit in court

| June 16, 2018

यह साबित करने के लिए कि स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट (एसआरएम) को टिकट चेकिंग का अधिकार नहीं है, अंबाला से दिल्ली तक रेलवे अफसरशाही एक हो गई। सीनियर डीसीएम (वरिष्ठ मंडल कार्मशियल प्रबंधक, रेलवे) प्रवीण गौड़ द्विवेदी को बचाने के लिए उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक और रेलवे बोर्ड के सचिव ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में झूठा बोला। हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए सीनियर डीसीएम के खिलाफ कार्रवाई कर छह माह में सूचित करने और एसआरएम स्क्वायड के दस टीटीई एक माह में देने के आदेश दिए हैं।








मालूम हो कि स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट हरियाणा (एसआरएम) नितिन राज ने कैंप कोर्ट लगाने के लिए 29 व 30 सितंबर 2016 को टीटीई (टिकट निरीक्षक) मांगे थे। स्टेशन पर टिकट चेकिंग अभियान और रेलवे एक्ट के तहत गैर कानूनी कार्यों पर रोक लगाने के उद्देश्य से चेकिंग कराई जानी थी। मजिस्ट्रेट स्टेशन पहुंचे, लेकिन चेकिंग स्टॉफ नहीं भेजा गया। मजिस्ट्रेट ने सीनियर डीसीएम प्रवीण गौड़ द्विवेदी को अपना पक्ष रखने के लिए पहले 15 अक्टूबर को और फिर 18 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा।




बावजूद इसके द्विवेदी पेश नहीं हुईं। बाद में पेश हुईं तो उनका कहना था कि तीन अक्टूबर को निरीक्षण था और टीटीई की विभाग में कमी है। एसआरएम ने द्विवेदी की दलीलों को खारिज करते हुए उनके खिलाफ केस चलाने के लिए सीजेएम कोर्ट में फाइल भेज दी। महिला अधिकारी इसके खिलाफ एडिशनल सेशन कोर्ट और फिर हाई कोर्ट गईं, लेकिन दोनों जगह से अपील खारिज हो गई। 1सूत्रों के अनुसार, यह साबित करने के लिए कि एसआरएम को टिकट चेकिंग का अधिकार नहीं है, अंबाला से दिल्ली तक रेलवे अफसरशाही एक हो गई।

इसी कारण सीनियर डीसीएम ने सोच-समझकर याचिका में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक और रेलवे बोर्ड के सचिव को भी पार्टी बनाया था। मकसद यह था कि दोनों आला अफसर भी उनके पक्ष में अपनी बात रखें। ऐसा ही हुआ। जीएम और सचिव ने भी हाई कोर्ट में यही तर्क दिया कि एसआरएम को टिकट चेकिंग का अधिकार नहीं है। 1रेलवे एक्ट यह कहता है: इससे इतर, रेलवे एक्ट और रूल के मुताबिक एसआरएम को चेकिंग का अधिकार है।




रेलवे एक्ट 181 और रेलवे रूल 1209, 1404, 1402, 1403, 1405, 1406, 1407 का भी हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जिक्रकिया, जिससे रेलवे के उच्च अधिकारियों का झूठ पकड़ में आ गया। हाई कोर्ट के जज राजशेखर अत्री ने गत एक जून को दिए अपने आदेश में कहा कि एसआरएम को टिकट चेकिंग और जीआरपी या आरपीएफ उपलब्ध करवाना रेलवे की ड्यूटी है। कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के सचिव को आदेश दिए कि वे सीनियर डीसीएम के खिलाफ कार्रवाई कर छह माह में सूचित करें। हाई कोर्ट से राहत न मिलने के कारण सीजेएम (अंबाला) कोर्ट में गौड़ पर आपराधिक केस भी चलेगा। 14>>हाई कोर्ट में दिया था झूठा हलफनामा, लगी फटकार4>>स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट को टिकट चेकिंग से रोका था, कहा था कि नहीं है अधिकार

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