प्रमोशन में आरक्षण लागू करने के निर्देश जारी

| June 16, 2018

पदोन्नति में आरक्षण का कार्यालय ज्ञापन जारी, 2016 से रुके प्रमोशन फिर से मिलेंगे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को

सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मिलने के बाद अंतत: कार्मिक मंत्रालय ने प्रमोशन में रिजर्वेशन देने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में लिखा गया है कि मौजूदा वरिष्ठता या चयन सूची के आधार पर प्रमोशन करें। यह आदेश केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित क्षेत्रों के सभी विभागों पर लागू होगा। इस आदेश के बाद 2016 से रुके प्रमोशन शुरू हो जाएंगे तथा आरक्षित वर्ग और सामान्य वर्ग दोनों को राहत मिलेगी। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर पूरे देश में हंगामा बरपा है।







अनेक राज्यों के हाईकोर्टों ने पदोन्नति में आरक्षण को खारिज कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने तो 1997 के बाद हुए आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के प्रमोशन को वापस लेने का आदेश दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश भी इसी तरह का है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के कर्मचारियों के दवाब के बाद केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी। कोर्ट ने 15 मई और पांच जून के आदेश में सरकार को पदोन्नति में आरक्षण देने की अनुमति दे दी लेकिन शर्त लगायी कि प्रमोशन संविधान पीठ के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय को लेकर एक मंत्रिसमूह का गठन किया।




इस समूह की कल ही बैठक हुई और कल ही कार्मिंक मंत्रालय के आदेश के प्रारूप को मंजूरी दे दी। इसी आधार पर आज मंत्रालय ने कार्यालय ज्ञापन जारी कर दिया। इस ज्ञापन के इंतजार में सरकारी कर्मचारी सांसे थाम बैठे थे। सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे सीएसएस एससी/एसटी फोरम के अध्यक्ष रोहताश भनकड़ ने कार्यालय ज्ञापन का स्वागत करते हुए कहा कि इसका लाभ केवल आरक्षित वर्ग को ही नहीं बल्कि बल्कि सामान्यवर्ग को भी मिलेगा। उनका कहना है कि सरकार में बहुत से पद खाली पड़े हैं, इसमें सभी का भला हो जाएगा।




कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि अदालत के फैसलों के अनुरूप प्रोन्नति की अुनमति मंत्रालयों व विभागों को दे दी है। राज्य सरकारों को भी सलाह दी गई है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मद्देनजर विभागों में लंबित प्रमोशन के लिए कदम उठाएं। गौरतलब है कि कोर्ट ने 5 जून को सरकारी विभागों में प्रमोशन के मसले पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि सरकार कानूनी तरीके से प्रमोशन करने के लिए स्वतंत्र है। इस पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि, अदालत ने इसे अपने अगले आदेश पर निर्भर बताया था।

 

Category: Indian Railways, News

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