Married Daughter can be given CG appointment

| June 9, 2018

मानवाधिकार आयोग ने विवाहित पुत्री को भी अनुकंपा नौकरी देने की अनुशंसा की है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने अनुकंपात्मक नियुक्ति के लाभ से वंचित करने के नियम में संशोधन कर अविवाहित होने की शर्त हटाने की अनुशंसा की है ताकि, विवाहित पुत्री व विवाहित दत्तक पुत्री को इसका फायदा दिया जा सके। आयोग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि शादी होने मात्र से पिता-पुत्री का रिश्ता बदल नहीं सकता है।








इस मामले में अगली सुनवाई एक अगस्त को होगी।मामला गत 22 मई को आयोग के संज्ञान में लाया गया था और आयोग ने अल्प समय में इसका निर्णय दिया है। प्रकरण के अनुसार अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड भीलवाड़ा के अधीन सहायक अभियंता मांडल में हैल्पर के पद पर कार्यरत हीरालाल गुर्जर का 25 सितंबर, 2016 को निधन हो गया था। हीरालाल की मृत्यु के समय बाली देवी की आयु 63 साल थी। इस वजह से वह अनुकंपात्मक नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थी।




गुर्जर के कोई पुत्र नहीं है। चार पुत्रियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। तीन पुत्रियों एवं हीरालाल की पत्नी ने मेमा उर्फ महिमा गुर्जर को अनुकंपात्मक नियुक्ति देने के लिए दस्तावेज लगा दिए लेकिन नियमों का हवाला देते हुए बिजली कंपनी ने विवाहित पुत्री को अनुकंपात्मक नियुक्ति देने से इनकार कर दिया जिसकी शिकायत उसने मानवाधिकार आयोग में की।

आयोग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के नियमों में अविवाहित शब्द संविधान के विरुद्ध होने से असंवैधानिक एवं गैर कानूनी है। हाईकोर्ट ने अनुकंपात्मक नियुक्ति के मामले में विवाहित व अविवाहित सरकारीकर्मियों की पुत्रियों में भेदभाव को समाप्त किया गया है। हाईकोर्ट ने यहां तक प्रतिपादित किया है कि किसी लड़की की शादी हो जाने मात्र से पिता-पुत्री का रिश्ता समाप्त नहीं हो जाता।




यह विपरीत धारणा भारतीय संविधान का उल्लंघन करती है। साथ ही आयोग ने राज्य सरकार से अनुशंसा की है कि अनुकंपात्मक नियुक्ति नियम 1996 विवाहित पुत्री व विवाहित दत्तक पुत्री को अनुकंपात्मक नियुक्ति के लाभ से वंचित करने के भेदभाव पूर्ण नियम में संशोधन किया जाकर अविवाहित होने की शर्त को हटाया जाए। कार्मिक विभाग को इसकी प्रति भेजी जाए।

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.