अदालत नहीं संसद तय करेगी किसे पेंशन देना है: अरुण जेटली

| June 8, 2018

नई दिल्ली। पूर्व सांसदों को पेंशन देने के मामले में सर्वोच्च अदालत की तीखी टिप्पणी पर सरकार ने भी न्यायपालिका को कड़ा जवाबी संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को लेकर बिफरे सांसदों से राज्यसभा में रुबरू होते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सांसदों को कितना पेंशन मिलना चाहिए यह तय करने का अधिकार केवल संसद का है।




जेटली ने साफ कहा कि सरकारी धन को कैसे और कहां खर्च करना है यह तय करना संसद केवल संसद का अधिकार है। वित्तमंत्री ने इस क्रम में साफ संदेश दिया कि न्यायपालिका को अपने अधिकार क्षेत्र की मर्यादा से बाहर जाकर दूसरी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता में दखल देने से बचना चाहिए।राज्यसभा में जेटली ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर एतराज जाहिर कर रहे सांसदों को शांत करने के दौरान यह बात कही। वित्तमंत्री ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान शीशे की तरह साफ है कि सरकारी धन को खर्च करने का अधिकार केवल और केवल संसद को है। किसी दूसरी संस्था के इसमें दखल की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए किसे पेंशन देना है और पेंशन कि राशि कितनी होनी चाहिए यह संसद ही तय करेगी।








जेटली ने कहा कि सरकार भी संसद के अधिकार की इस संवैधानिक व्यवस्था के साथ है। उन्होंने इस मामले में सांसदों की ओर से जाहिर की गई भावनाओं से पूरी सहमति भी जताई।सपा के नरेश अग्रवाल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूर्व सांसदों को पेंशन देने पर सर्वोच्च अदालत का सरकार को नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सभी पूर्व सांसदों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे अपना या परिवार का गुजारा भी कर सकें। ऐसे दर्जनों मामले हैं कि पूर्व सांसद या उनका परिवार मुफलिसी में जिंदगी बसर कर रहे हैं। अग्रवाल ने इस क्रम में उत्तरप्रदेश के एक पूर्व सांसद मणिलाल के बेटे और पोते पेंटिग से लेकर मजदूरी का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे सांसद यहां कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं और पूर्व सांसद होते ही असहाय की स्थिति होती है।




कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर नाराजगी का इजहार करते हुए कहा कि 80 फीसद पूर्व सांसदों के करोड़पति होने की बात कह दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सुप्रीम कोर्ट बिना किसी सर्वे या अध्ययन के इस आंकड़े पर कैसे पहुंच गया? जयराम ने कहा कि सर्वोच्च अदालत को इस तरह की टिप्पणी की गंभीरता को भी देखना चाहिए क्योंकि बिना तार्किक अध्ययन के की गई अदालती टिप्पणियां भी न्यायिक रिकार्ड का हिस्सा बन जाती हैं। उनका कहना था कि सर्वोच्च अदालत की यह टिप्पणी स्तब्ध करने वाली हैं क्योंकि इस सदन के 80 फीसद सदस्य रिटायर होने के बाद भी शायद ही करोड़पति हों। कांग्रेस के आनंद शर्मा समेत विपक्ष के कई और सदस्यों ने जयराम और अग्रवाल की बातों का समर्थन किया।

Source:- Jagran

Category: News, Uncategorized

About the Author ()

Comments are closed.