आठ महीने में मिल जाएगी ट्रेनों की देरी से राहत,

ट्रेनों की लेटलतीफी से आजिज आ चुके रेलयात्रियों को आठ महीने में इससे राहत मिलने वाली है। इसके बाद ट्रेनें समय पर चलने लगेंगी। संरक्षा के लिहाज से रेल लाइनों की मरम्मत, रेलवे क्रांसिंग आदि का काम सात महीने में पूरा हो जाएगा। खासकर ट्रंक रूट गाजियाबाद और मुगलसराय के काम निपट जाएंगे। इसके बाद दिल्ली से हावड़ा, बिहार और उत्तर प्रदेश की ट्रेनों का परिचालन पटरी पर आ जाएगा।








इस ट्रंक रूट पर ट्रेनों का दबाव अधिक है। हांलाकि जहां-जहां काम पूरे हो रहे हैं, वहां-वहां ट्रेनें समय पर चलनी शुरू हो गई हैं। यह जानकारी रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात मोहम्मद जमशेद ने दी। उन्होंने बताया कि तमाम संरक्षा कायरे के अलावा गर्मी के सीजन में विशेष ट्रेनों के नौ हजार फेरे भी चलाये जा रहे हैं।




इससे भी ट्रेनों के समय पर चलने को लेकर कुछ असर पड़ रहा है। लेकिन सभी दिक्कतें आठ महीने की हैं। इसके बाद ट्रेनें नियमित रूप से समय पर चलने लगेंगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011-12 में यात्री संख्या में गिरावट आयी थी। लेकिन उनके बाद से यात्री संख्या बढ़ी है। 2017-18 से 6.5 करोड़ यात्री बढ़े हैं। यात्री मद में रेलवे आय 48 हजार करोड़ रपए हुई है। इसमें 2200 करोड़ रु पए का इजाफा हुआ है। रेलवे में ढुलाई में खासी वृद्धि हुई है और राजस्व भी बढ़ा है।




2018-19 वर्ष 1260 मीट्रिक टन ढुलाई का लक्ष्य रखा गया है। 2023-24 में 2000 मीट्रिक टन माल ढुलाई का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में रेलवे के पास कुल माल ढुलाई का 33 प्रतिशत हिस्सा है। लेकिन बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक ले जाना है। ढुलाई का लक्ष्य हासिल करने के लिए रेलवे ने पहली बार 18000 वैगन खरीदने के आर्डर दिये हैं। पांच साल में रेलवे के बेड़े एक लाख नये वैगन शामिल होंगे। रेलवे संसाधन और रफ्तार बढ़ाकर माल ढुलाई के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।