सरकार एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश नहीं लाएगी

| May 30, 2018

अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) अधिनियम को कथित रूप से हल्का करने के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए सरकार जल्द अध्यादेश नहीं लाएगी, बल्कि पहले कोर्ट के कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी। इस फैसले के खिलाफ सरकार की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर सुनवाई जारी है। इसकी अगली सुनवाई जुलाई में होगी। सरकार के सूत्रों के अनुसार इस मामले में पुनर्विचार याचिका पर फैसला आने के बाद उपचारात्मक याचिका का विकल्प अपनाया जाएगा।








सामान्यतया पुनर्विचार याचिकाएं 99 फीसदी मामलों में विफल हो जाती हैं। क्योंकि इसकी सुनवाई वही बेंच करती है जिसने इस पर फैसला दिया है। इस मामले में कोर्ट का जो रुख है वह बिल्कुल साफ है। कोर्ट ने कहा कि उसका फैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि सिर्फ आरोप भर लगाने पर किसी व्यक्ति को जेल में नहीं डाला *जा सकता और न ही उसे अग्रिम जमानत लेने से वंचित किया जा *सकता है। यह उसे संविधान के अनुच्छेद -21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत आजादी के अधिकार हैं, जिन्हें किसी कानून के जरिये कमतर नहीं किया जा सकता।




उपचारात्मक याचिका दायर की जाएगी : सूत्रों ने कहा कि पुनर्विचार याचिका के विफल होने पर उपचारात्मक याचिका दायर की जाएगी। यह याचिका पांच जज की पीठ सुनेगी जिसमें फैसला देने वाली पीठ के जज भी होंगे। हालांकि फैसला देने वाले एक जज जस्टिस एके गोयल 6 जुलाई को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक अध्यादेश आखिरी विकल्प है जिसका प्रयोग इन उपायों के बाद ही किया जाएगा।




केंद्र ने अजा-जजा (अत्याचार निरोधक) कानून, 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दो अप्रैल को याचिका दायर की थी। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार मानूसन सत्र के दौरान अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन विधेयक भी ला सकती है। संसद में इसका कोई राजनैतिक विरोध होने की उम्मीद भी नहीं है। 

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.