वेतन घोटाले से हड़कंप, रेल कर्मचारियों का होगा सत्यापन

| May 15, 2018

दिल्ली रेल मंडल और उसके बाद उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल में हुए वेतन घोटाले से रेल प्रशासन की नींद उड़ गई है। इस तरह के और मामले हो सकते हैं। इसलिए अब प्रत्येक कर्मचारी की शारीरिक सत्यापन (फिजिकल वेरीफिकेशन) करने का फैसला किया गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करके इसी माह उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी जिससे कि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। 1पिछले पांच माह में दिल्ली में वेतन घोटाले के दो मामले सामने आ गए हैं।








जनवरी माह में दिल्ली मंडल में फर्जी कर्मचारियों के नाम से वेतन, भत्ते व ओवर टाइम के भुगतान का मामला सामने आया था। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया गया था। इस मामले में एक महिला कर्मचारी को निलंबित किया गया था। सतर्कता विभाग मामले की जांच कर रहा है। इस घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे को कर्मचारियों और उनके दस्तावेज की जांच करने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों का वेतन जिस अधिकारी के हस्ताक्षर से बनता है उसकी जिम्मेदारी भी तय की गई थी। इससे लगा था कि अब इस तरह की अनियमितता नहीं होगी, लेकिन पिछले सप्ताह केंद्रीय अस्पताल में एक और मामला सामने आ गया।1इस मामले में भी नौ फर्जी डॉक्टरों के नाम पर पिछले दो वर्षो से वेतन, भत्ते व एरियर के भुगतान की बात सामने आई है।




उत्तर रेलवे के लेखा विभाग को शक होने पर मामले की जांच की गई जिससे यह घोटाला पकड़ा जा सका। इस मामले में सीनियर क्लर्क को निलंबित कर दिया गया है। सतर्कता विभाग मामले की जांच कर रहा है। इन दोनों मामलों में और लोगों के संलिप्त होने की भी आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही दूसरे विभागों में भी इस तरह की गड़बड़ी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।1इस स्थिति को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों के फिजिकल वेरिफिकेशन का अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। सभी सीनियर सबऑर्डिनेट व सबऑर्डिनेट तथा सेक्शन इंचार्ज को उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों और उनके दस्तावेज की जांच कर उसे सत्यापित करने के लिए कहा गया है। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत इसकी जानकारी उच्च अधिकारी को देनी होगी। कनिष्ठ अधिकारियों को भी फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों व उनके दस्तावेज की जांच कर इसकी रिपोर्ट शाखा अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। संबंधित अधिकारी को कर्मचारियों के दस्तावेज के प्रत्येक पृष्ठ को सत्यापित करना होगा।




उत्तर रेलवे के केंद्रीय अस्पताल में फर्जी डॉक्टरों के नाम पर हुए वेतन घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग की गई है। उत्तर रेलवे कर्मचारी यूनियन ने इसे लेकर प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को पत्र लिखा है। यूनियन का कहना है कि इस घोटाले में कई और लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। 1वेतन घोटाले के आरोपित सीनियर क्लर्क भरत धूपड़ को रेल प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। 11 मई को इसकी शिकायत पहाड़गंज थाने में भी की गई है, लेकिन चार दिन बाद भी अब तक एफआइआर दर्ज नहीं हुई है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सुनील कुमार, पूनम, शीतल, गोपाल, रोहित कुमार, विजेता, तरसेम जया और सोनिया डिसूजा के नाम से फर्जी वेतन, भत्ते व एरियर का भुगतान किया गया था। जांच के बाद ही पता चलेगा कि इनका सिर्फ नाम का प्रयोग किया गया है या फिर इनका कोई अस्तित्व भी है।

फिलहाल उत्तर रेलवे का सतर्कता विभाग इस मामले की जांच कर रहा है। 1उत्तर रेलवे कर्मचारी यूनियन के दिल्ली मंडल के मंत्री इंद्रजीत सिंह का कहना है कि जनवरी महीने में भी फर्जी वेतन घोटाला सामने आया था। इस मामले में अब तक पूरी जांच नहीं हुई है। इस तरह के घोटाले में अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं जिन्हें बचाने की कोशिश हो रही है। केंद्रीय अस्पताल में हुए घोटाले में भी सिर्फ एक आरोपित को निलंबित करना मामले की लीपापोती है। आरोपित नॉर्दन रेलवे मेंस यूनियन (एनआरएमयू) का पदाधिकारी था। उसे यूनियन ने बाहर कर दिया है। ऐसा मामले पर पर्दा डालने के लिए किया गया है। 1उन्होंने कहा कि दिल्ली मंडल में पहले हुए वेतन घोटाले के साथ ही इस घोटाले की भी सीबीआइ जांच होनी चाहिए जिससे कि सच्चाई सामने आ सके। यूनियनों और अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए।’>>रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने जारी किया निर्देश1’>>इसी माह सौंपी जानी है सत्यापन की जांच रिपोर्ट 1

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.