Indian Railways finding it difficult to maintain the punctuality of trains

| May 2, 2018

लोगो::::::: ऐसे कैसे बनेगा वर्ल्ड क्लास रेलवे

बुलेट ट्रेन का सपना, साधारण के संचालन में छूट रहा पसीना

ठंड में कोहरे का था बहाना, गर्मी में भी नहीं सुधरे हालात

रेलवे की नाकामी से रोज परेशान हो रहे हजारों यात्री

सीन 1 हरिद्वार जंक्शन:
राजधानी के सुभाष मार्ग निवासी देवी प्रसाद परिवार के साथ हरिद्वार स्टेशन पर इंतजार करते रहे, लेकिन जिस दून एक्सप्रेस में परिवार के 12 लोगों का रिजर्वेशन था, वह आई ही नहीं। पता किया तो बताया गया गाड़ी कैंसल कर दी गई है। आनन फानन में जनता एक्सप्रेस से पूरे परिवार को जनरल क्लास में आना पड़ा।








सीन 2

चारबाग स्टेशन

चिनहट निवासी अनिल कुमार चारबाग स्टेशन पर बैठे इंतजार कर रहे थे। जानकारी मिली कि मुजफ्फरपुर-देहरादून एक्सप्रेस 6 घंटे लेट है। बाद में इंतजार बढ़ता गया। उन्हें बुधवार देहरादून में एक प्राइवेट कम्पनी में इंटरव्यू देना था। पता चला कि उनकी ट्रेन 25 घंटे लेट है। ट्रेन तड़के तीन बजे की जगह दो मई को सुबह चार बजे तक आने की उम्मीद है। रेलवे की इस लापरवाही से उनका इंटरव्यू छूट गया।

टीएन मिश्र, लखनऊ :- ये दोनों मामले रेलवे की स्थिति बखूबी बयां कर रहे हैं। आलम यह है कि सोर्स स्टेशन से ही ट्रेनें लेट चल रही हैं। लेटलतीफ ट्रेनें बिना बताए कैंसल की जा रही हैं। …और यात्री कन्फर्म टिकट के लिए सुविधाओं की वेटिंग क्लीयर होने का इंतजार कर रहे हैं। रेलवे के अच्छे दिनों का इंतजार पूरा होता नहीं दिख रहा। पहले अफसर कहते रहे सर्दियों में कोहरे की वजह से ट्रेनें लेट हैं, लेकिन अब गर्मी में भी हालात जस के तस हैं। लंबी दूरी की 75 फीसदी ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं। पैसेंजर ट्रेनों की हालत तो और भी खराब है।




56 ट्रेनें 3 से 20 घंटे तक लेट

पैसेंजर की बात तो दूर रेलवे मेल व एक्सप्रेस भी सही से नहीं चलवा पा रहा। लखनऊ में ही रोज आउटर पर दर्जनों ट्रेनें रोक दी जाती हैं। ऐसे में सफर करने वालों के साथ ही प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों को भी दिक्क्त का सामना करना पड़ता है। आगे के स्टेशनों तक ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ती जाती है और यात्रियों की परेशानी थी।

एनटीईएस भी फेल

ट्रेनों के आने-जाने की सही जानकारी नैशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) से भी नहीं मिल पा रही है। एनटीईएस पर ट्रेनों के लेट चलने की जानकारी अपडेट न होने से यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। कई बार सूचना अपडेट न होने से यात्रियों की ट्रेनें छूट तक जाती हैं। हाल ही में पुणे-गोरखपुर जनसाधारण स्पेशल ट्रेन-01453 एनटीईएस पर दौड़ती रही, जबकि वह ट्रेन लखनऊ पहुंची ही नहीं।

ट्रैक मेंटिनेंस तो बहाना है




रेलवे बोर्ड से लेकर डीआरएम कार्यालय तक के अफसर लेट चलने वाली ट्रेनों के पीछे ट्रैक मेंटिनेंस का कारण बताते हैं। हालांकि रात में ट्रैक पर कोई काम नहीं होता। ऐसे में रात के समय ट्रेनें समय से चलनी चाहिए। बावजूद इसके बरेली-वाराणसी एक्सप्रेस रविवार रात चारबाग स्टेशन पर 55 मिनट देरी से पहुंची। लखनऊ से वाराणसी पहुंचते-पहुंचते ट्रेन चार घंटे लेट हो चुकी थी। इसी तरह गंगा गोमती एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, मेमू भी अक्सर आउटरों व आसपास के स्टेशनों पर रोकी जा रही हैं।

मालगाड़ियों से कमा रहे माल

रेलवे इन दिनों मालगाड़ियों के संचालन पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। आलम यह है कि एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों को बीच रास्ते में रोककर मालगाड़ियों को पास दिया जा रहा है। लॉग हाल वाली मालगाड़ियां निकालने के दौरान एक ट्रेन डेढ़ से लेकर घंटे तक रोकी जाती है। इसे लेकर कई बार यात्रियों की स्टेशन मास्टरों से कहासुनी तक हो जाती है।

दो दिन का यह है हाल

ये ट्रेनें सोमवार को आईं लेट

कोटा पटना एक्सप्रेस 25 घंटे

न्यू जलपाईगुड़ी एक्स 17 घंटे

सद्भावना एक्सप्रेस 15 घंटे

पुरबिया एक्सप्रेस 15 घंटे

त्रिवेणी एक्सप्रेस 11 घंटे

मुजफ्फरपुर-सूरत एक्सप्रेस 6 घंटे

फैजाबाद इंटरसिटी 6 घंटे

डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस 6 घंटे

हिमगिरि एक्सप्रेस 14.5 घंटे

बरौनी मेल 8.5 घंटे

सियालदह एक्सप्रेस 6 घंटे

नीलांचल एक्सपेस 5.5 घंटे

एलटीटी-प्रतापगढ़ एक्स 5 घंटे

अप दून एक्सप्रेस 3घंटे

मंगलवार को ये लेट आईं

मुजफ्फरपुर-देहरादून एक्सप्रेस 25 घंटे

हिमगिरि एक्सप्रेस 23 घंटे

छपरा जनसाधारण 16 घंटे

आनंदविहार-मऊ एक्सप्रेस 14 घंटे

पुरबिया एक्सप्रेस 15 घंटे

अमरनाथ एक्सप्रेस 14 घंटे

गरीबरथ एक्सप्रेस 11 घंटे

सद्भावना एक्सप्रेस 12 घंटे

आनंदविहार हमसफर 12 घंटे

न्यूजलपाईगुड़ी-उदयपुर 11 घंटे

पटना-कोटा एक्सप्रेस 10 घंटे

आगरा-एलजेएन इंटरसिटी 10 घंटे

शहीद एक्सप्रेस 9 घंटे

साबरमती एक्सप्रेस 8 घंटे

कुशीनगर एक्सप्रेस 6 घंटे

सरयू यमुना एक्सप्रेस 7.15 घंटे

आम्रपाली एक्सप्रेस 5 घंटे

मालदाटाउन एक्सप्रेस 8 घंटे

इंदौर-पटना स्पेशल 7.15

जिम्मेदार बोले…

इन दिनों बड़े स्तर पर ट्रैक मेंटिनेंस और नॉन इंटरलॉकिंग का काम चल रहा है। मालगाड़ियां भी इन्हीं लाइनों पर चलानी है। ऐसे में ट्रेनें कुछ लेट हो रही हैं। स्थिति में सुधार लाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।

-अमित श्रीवास्तव, एडीआरएम (प्रशासन), नॉर्दर्न रेलवे

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यात्रियों का दर्द

रेलमंत्री पीयूष गोयल के कार्यकाल में ट्रेनों की स्थिति बेहद खराब है। इस गर्मी में भी कौन सी ट्रेन कितनी लेट होगी पता नहीं चल पता। आगरा से लखनऊ आ रहा हूं। इंटरसिटी 10 घंटे लेट हो चुकी है। सफर में बुरा हाल है।

योगेश गुप्ता

मेल व एक्सप्रेस की बात तो दूर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन भी पटरी से उतर चुका है। ख्वाब बुलेट ट्रेन और वर्ल्ड क्लास स्टेशन का दिखा रहे हैं और ट्रेनें वक्त पर नहीं चलवा पा रहे हैं।

राजीव सिन्हा

उत्तर रेलवे अपने डिवीजन की गाड़ियां भी रोजाना घंटों लेट चलाता है। गंगा-गोमती को समय से चलाने के लिए ट्विटर पर की गई शिकायतों का भी किसी पर कोई असर नहीं पड़ा।

अरुण शुक्ल

कई साल बाद ट्रेनें इतनी लेट चल रही हैं। रेलवे अपनी ट्रेनों की सही सूचना उपलब्ध करवाने तक में नाकाम है। इसके चलते लोगों को स्टेशनों पर परेशान होना पड़ता है।

श्याम मूर्ति गुप्ता
Source:- NBT

Category: Indian Railways, News

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