Modi Government to revise Minimum Pay soon

| May 2, 2018

केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि संसद की स्थायी समिति ने पहली श्रम संहिता पर रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद वेतन संहिता विधेयक 2017 को संसद के मॉनसून सत्र में पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने से केंद्र सरकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में न्यूनतम पारिश्रामिक (वेतन) निर्धारित कर सकेगी । इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें केंद्र द्वारा तय सीमा से नीचे न्यूनतम पारिश्रामिक तय नहीं कर सकती है। गंगवार ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर कहा ,‘ मैंने समिति के चेयरमैन से पारिश्रामिक संहिता विधेयक की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के संबंध में बातें की हैं। उन्होंने मुझे बताया कि सारा काम हो चुका है और इसे जल्दी ही जमा कर दिया जाएगा। हम इसे पारित कराने की कोशिश करेंगे। ’







प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहन 

मंत्री ने कहा कि श्रम मंत्रालय 38 श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समाहित करना चाहता है। इन चार क्षेत्रों को वेतन, औद्योगिक संबंध ,सामाजिक सुरक्षा एवं पेशागत सुरक्षा और स्वास्थ्य एवं कामकाजी माहौल में बांटा गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस मौके पर सलाह दी कि देश में श्रमिकों की स्थिति बेहतर करने के लिए श्रम मंत्रालय को पारंपरिक सोच से बाहर आना होगा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को बेहतर तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए मंत्रालय को प्रौद्योगिकी के अधिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना होगा।




‘रोजगार बढ़ाने के लिए चीन से ऊंची वृद्धि दर जरूरी’

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने आकांक्षी युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने तथा विभिन्न मोर्चों पर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तीव्र वृद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के लिए जब तक अच्छे रोजगार सृजित नहीं होते हैं , जनसांख्यिकीय संबंधी लाभ दुस्वप्न में तब्दील हो जाएंगे। कुमार ने कहा,‘देश की हमारी युवा पीढ़ी खराब गुणवत्ता वाले रोजगार और ऐसी वृद्धि दर को स्वीकार नहीं करेगी जो कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकती। ’उन्होंने कहा , ‘यदि हम नहीं चाहते हैं कि यह व्यापक ऊर्जा, जिसे जनसांख्यिकीय बदलाव के तौर पर कहा जा रहा है, इसे जनसांख्यिकीय दुस्वपन में नहीं बदलने देना चाहते हैं, जो कि मेरे मुताबिक बहुत जल्द हो सकता है।




यदि ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं तो हमें अपनी वृद्धि की रफ्तार को तेज करना होगा और वृद्धि दर को अधिक समावेशी बनाना होगा।’ उन्होंने ने चीन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उत्तरी सीमा से बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि 30 साल पहले चीन विकास के उसी स्तर पर था जहां भारत था। लेकिन अब वह भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार से पांच गुना बड़ा है। उन्होंने कहा,‘ अपने भाग्य को हाथ में लेने तथा स्वयं को मजबूत बनाने का समय आ गया है क्योंकि अंत में यह मजबूती ही हमें आपदा से बचाएगी।

Category: News, Seventh Pay Commission

About the Author ()

Comments are closed.