Negligence of Railway took 22 innocent lives in train accident – Report

| April 30, 2018

ब्लाक देते तो बच जाती 22 की जान, रेलवे बोर्ड मेंबर से लेकर गैंगमैनों तक पर गिरी थी गाज, अहम सुराग जुटाने में लापरवाह रहा रेलवे का संरक्षा विभाग

 रेलवे संरक्षा आयोग ने पिछले साल मुजफ्फरनगर के खतौली स्टेशन के नजदीक हुई उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना के लिए सेक्शन नियंत्रक के अलावा सहायक स्टेशन मास्टर तथा परमानेंट वे इंस्पेक्टर को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि दिल्ली डिवीजन के मुख्य नियंत्रक, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी तथा मुजफ्फरनगर के पीडब्ल्यूआइ इंचार्ज समेत इंजीनियरिंग, आपरेशंस और रेलवे प्रशासन की भूमिका की निंदा की है। उत्कल एक्सप्रेस (ट्रेन 18477) दुर्घटना 19 अगस्त, 2017 को हुई थी। इसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 40 लोग गंभीर रूप से और 66 लोग सामान्य रूप से घायल हुए थे।1संरक्षा आयुक्त ने ट्रैक पर ग्लू ज्वाइंट के टूटने और उसे दुरुस्त करने में नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों, खासकर सेक्शन नियंत्रक, सहायक स्टेशन मास्टर और पीडब्ल्यूआइ (परमानेंट वे इंस्पेक्टर) द्वारा बरती गई लापरवाही को दुर्घटना का कारण बताया है।








सेक्शन नियंत्रक की लापरवाही और अड़ियल व्यवहार की ओर इशारा करते हुए संरक्षा आयुक्त ने जांच रिपोर्ट में लिखा, ‘स्टेशन मास्टर के बार-बार कहने के बावजूद सेक्शन नियंत्रक ने टूटे हुए ग्लू ज्वाइंट को जोड़ने के लिए ब्लाक देने से इन्कार कर दिया।’ स्टेशन मास्टर ने सेक्शन नियंत्रक से पहले शाम 17:04 बजे और फिर 17:07 बजे ब्लाक देने का अनुरोध किया था, परंतु नियंत्रक ने हर बार यातायात जाम होने का हवाला देते हुए ब्लाक देने से मना कर दिया। हर बार उसने कहा, ‘नहीं-नहीं, ब्लाक नहीं मिलेगा।’ नियंत्रक ने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर बार-बार ब्लाक देने का अनुरोध क्यों किया जा रहा है।




यदि वो इस ओर जरा भी ध्यान देता और दुर्घटना स्थल से ट्रेन पास होने का सही अंदाजा लगाता तो आसानी से ब्लाक दे सकता था क्योंकि ब्लाक देने का पहला अनुरोध 17:04 बजे किया गया था, जबकि खतौली से ट्रेन 17:46 बजे पास हुई थी। इस तरह पूरे 40 मिनट का समय उपलब्ध था। आमतौर पर ग्लू ज्वाइंट ठीक करने के लिए 70-90 मिनट का समय मांगा जाता है। परंतु इस मामले में केवल 20 मिनट का ब्लाक मांगा गया था, जो कि असामान्य बात है। इसके बावजूद सेक्शन नियंत्रक की आंखें नहीं खुलीं। रिपोर्ट के मुताबिक यह स्पष्ट रूप से उसके अड़ियल व्यवहार को दर्शाता है।




वह आपरेटिंग मैन्युअल के अनुसार अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहा। 1इसी प्रकार खतौली के सहायक स्टेशन का दोष सिद्ध करने के लिए भी आयुक्त ने कई तथ्य गिनाए। उदाहरण के लिए उन्होंने लिखा, ‘सहायक स्टेशन मास्टर (एएसएम) के पास जब भी ट्रैक असुरक्षित होने की कोई सूचना आती है तो वो तुरंत ट्रेन संचालन रोक देता है और जब तक संबंधित अधिकारियों से ट्रैक दुरुस्त होने का प्रमाणपत्र नहीं मिलता, तब तक यातायात बहाल नहीं करता। परंतु इस मामले में एएसएम ने पीडब्ल्यूआइ से ग्लू ज्वाइंट टूटे होने का मेमो मिलने के बावजूद ट्रैक को सुरक्षित किए बगैर ट्रेन संचालन की अनुमति दे दी। 1मुजफ्फरनगर के पीडब्ल्यूआइ इंचार्ज तथा खतौली के पीडब्ल्यूआइ का दोष सिद्ध करने के लिए आयुक्त ने कहा-‘मुजफ्फरनगर के पीडब्ल्यूआइ इंचार्ज को खतौली सेक्शन के पीडब्ल्यूआइ ने टेक्स्ट मेसेज के साथ दरके हुए ग्लू ज्वाइंट का फोटो सुबह 09:25 बजे ही वाट्सएप पर भेजा था। इंचार्ज ने 9:30 बजे मेसेज पढ़ा और पीडब्ल्यूआइ से बात भी की।
लेकिन, उसे समुचित निर्देश देने (ग्लू ज्वाइंट जोड़ने का सही तरीका बताने तथा काम शुरू करने से पहले ट्रैक पर लाल झंडिया लगाने) में विफल रहा। दूसरी ओर, सेक्शन पीडब्ल्यूआइ ने आपातकालीन मरम्मत कार्य प्रारंभ करने से पहले गति सीमा लागू करने, उचित दूरी पर झंडियां लगवाने तथा ट्रेन को रुकवाने के लिए आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया।

उत्कल एक्सप्रेस हादसे के बाद बढ़े जन दबाव के कारण रेलवे ने तीन आला अफसरों को छुट्टी पर भेजने के अलावा चार को निलंबित और एक को स्थानांतरित कर दिया था। 11 गैंगमैन, एक लोहार और एक जूनियर इंजीनियर समेत 13 कर्मचारियों की बर्खास्तगी भी हुई थी। यह अलग बात है कि बाद में इन्हें 45 दिनों के भीतर अपील के अधिकार के तहत बहाल करना पड़ा था। इनके खिलाफ अब विभागीय जांच चल रही है। ये सभी वे कर्मचारी थे जो उस दिन दुर्घटना स्थल पर ग्लू ज्वाइंट ठीक करने के काम में लगे थे। इन्हें बर्खास्त करने के लिए रेलवे नियम 1968 की धारा-14 का सहारा लिया गया था। इस धारा में इस बात का प्रावधान है कि यदि किसी रेलवे कर्मचारी को ड्यूटी में घोर लापरवाही का दोषी पाया जाता है तो उसकी सेवाएं जांच के बगैर ही समाप्त की जा सकती हैं। रेलवे यूनियनों ने इन छोटे कर्मचारियों को निदरेष बताते हुए इनकी बर्खास्तगी का विरोध किया था। 1इससे पहले रेल मंत्रलय ने रेलवे बोर्ड के मेंबर, इंजीनियरिंग, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक तथा दिल्ली के डीआरएम समेत तीन उच्चाधिकारियों को छुट्टी पर भेजा था। दुर्घटना के कारण दिल्ली के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर समेत चार अफसरों को निलंबन और चीफ ट्रैक इंजीनियर को स्थानांतरण का शिकार होना पड़ा था।

खतौली ट्रेन दुर्घटना की जांच करने वाले संरक्षा आयुक्त शैलेश पाठक ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में दुर्घटना के साक्ष्यों के संरक्षण में विफल रहने तथा दुर्घटना स्थल की वीडियोग्राफी न करने के लिए संरक्षा विभाग की आलोचना की है। रिपोर्ट में उन्होंने लिखा, ‘आयोग की सलाह के बावजूद अधिकारियों ने न तो ड्रोन से दुर्घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई, न वाइड फोटोग्राफ लिए और न ही पटरी से उतरी 12 बोगियों की नापजोख की। रेलवे का संरक्षा विभाग ड्यूटी पर मौजूद सहायक स्टेशन मास्टर से मेमो जब्त करने में विफल रहा। यह बहुत महत्वपूर्ण सुराग था और हादसे से इसका सीधा संबंध था। मेमो की मूल तथा कार्बन प्रति दोनों एएसएम के पास थीं। जब 21 अगस्त, 2017 को जब मैंने दुर्घटना की जांच शुरू की तब तक ये दोनो स्टेशन मास्टर के पास ही थे। इसी अहम सुराग के जरिए दुर्घटना जांच को निर्णायक परिणति तक पहुंचाने में मदद मिली। संरक्षा विभाग की यह चूक अस्वीकार्य है। इसके लिए दिल्ली डिवीजन के सीनियर डीएसओ को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।’

Category: Indian Railways, News

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