पहला वेतन था ढाई सौ रुपये, आज एक लाख है पेंशन

| April 20, 2018

नौकरी की पहली तनखाह महज ढाई सौ रुपये थी, पर आज पेंशन एक लाख रुपये से ज्यादा मिल रही है। उसी पद पर आज काम कर रहे अफसरों को इतना वेतन भी नहीं मिलता। 90 साल की उम्र पार कर चुके तमाम पेंशनरों के साथ ऐसे रोचक आंकड़े जुड़े हैं। कोषागार के दस्तावेजों में ऐसे तमाम अचरज भरे दस्तावेज मौजूद हैं। 1984 में रिटायर हुईं बिजली विभाग की वरिष्ठ अभियंता को इस महीने 1.30 लाख रुपये पेंशन मिली है।








अभी नौकरी कर रहे सहायक अभियंताओं का वेतन 90 हजार से ज्यादा नहीं है। निजी कारणों से पहचान न जाहिर करने वाली यह रिटायर वरिष्ठ अभियंता कहती हैं, ‘मेरी पहली नौकरी जूनियर इंजीनियर की थी। 1948 में मुङो नौकरी मिली थी। उस वक्त मुङो 249.65 रुपये पहली तनखाह मिली थी। मुख्य कोषाधिकारी नंदकिशोरधर द्विवेदी कहते हैं, ‘ऐसे कई पेंशनर हैं, जो अपने पहले वेतन से सौ-दो सौ नहीं चार सौ गुनी तक पेंशन पा रहे हैं।’ गोरखपुर कोषागार से वर्तमान में 33 हजार पेंशनर रहे हैं। इनमें करीब एक हजार पेंशनर ऐसे हैं, जिनकी उम्र 90 के पार है। वहीं 4000 से ज्यादा पेंशनर 70 के पार है।




मुख्य कोषाधिकारी बताते हैं कि पेंशनरों को रिटायरमेंट के बाद एक विकल्प मिलता है। वे चाहें तो रिटायर होते ही वे अपनी एक तिहाई पेंशन सरकार को बेच कर एक मुश्त पैसा ले सकते हैं। 15 साल बाद तक अगर वे जीवित रहे तो यह बेचा गया हिस्सा फिर उनकी पेंशन में जुड़ जाता है। इसीलिए 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके ज्यादातर पेंशनरों की पेंशन सामान्य पेंशनरों की तुलना में अधिक होती है। स्वास्थ्य विभाग से लेखा अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए एक पूर्व लेखाधिकारी की पेंशन 91 हजार रुपये है। विश्वविद्यालय से 1980 में सेवानिवृत्त हुए रामचरण गुप्ता इस समय 92 हजार पेंशन पा रहे हैं। उनका वेतन नौकरी के शुरुआती दिनों में महज 260 रुपये था।’




लाख रुपये तक है। अधिकतम पेंशन निर्धारित कर दी गई है।

वें पे-कमीशन के बाद न्यूनतम पेंशन 9000 हजार निर्धारित कर दी गई है।

’ 90 की उम्र पूरी कर चुके पेंशनर्स को अफसर के वेतन से ज्यादा पेंशन मिल रही ’ गोरखपुर में ऐसे पेंशनर्स की संख्या एक हजार से ज्यादा ’ चार हजार से ज्यादा पेंशनर्स की उम्र 70 के पार

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