7th Pay Commission – Government may review the salary restructuring system of central Gov Employees

| April 11, 2018

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के सातवें वेतन आयोग से जुड़ा ताजा अपडेट हम आपके लिए लेकर आए हैं। सरकार बेसिक न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर का फिर से रिव्यू कर सकती है। हालांकि इस पर विचार विमर्श चल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई फैसला अभी तक नहीं लिया गया है। वहीं पिछले महीने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों से न्यूनतम वेतन में वृद्धि पर विचार नहीं कर रही है। यह सवाल समाजवादी पार्टी के सासंद नीरज शेखर ने पूछा था।








यह अंतिम 7 वां वेतन आयोग होगा केंद्र सरकार वेतन की वार्षिक समीक्षा पर विचार करेगा। इसका मतलब यह है कि 7 वां वेतन आयोग अंतिम होगा। वार्षिक समीक्षा नवीनतम मूल्य सूचकांक के आधार पर होगी। यह मामला फिलहाल चर्चा के स्तर पर है। हालांकि मोदी सरकार ने इसे अपने एजेंडे में शामिल नहीं किया है।




वेतन में कोई बदलाव नहीं होगा मंत्री ने कहा था कि, 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतन और 2.57 फिटमेंट फैक्टर 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की विशिष्ट सिफारिशों पर आधारित है। इसके अनुसार संबंधित कारकों को ध्यान में रखते हुए, इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। वहीं 7वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर अब रेलवे कर्मचारियों को नया फायदा मिलने जा रहा है। केद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों को ट्रवेल लीव कन्सेशसन(TLC) का लाभ देने का ऐलान किया है।

बता दें कि सातवें वेतन आयोग से पहले 7000 रुपये न्यूनतम वेतनमान हुआ करता था. जबकि लागू होने के बाद इसे 18000 रुपये कर दिया गया. सरकारी कर्मचारियों की यूनियन इसे 26000 करने की मांग कर रही थी. जबकि एक समय आया था कि सरकार इसे 21000 करने पर तैयार हो गई थी. यह बात केवल चर्चाओं में रही. कर्मचारी इसके लिए तैयार नहीं थे. इसके साथ ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया और अब एक बार फिर कहा जा रहा है कि सरकार की बात को कर्मचारी तैयार हैं.



कर्मचारी नेताओं कहना है कि विवाद अब भी बरकरार है. लेकिन पहले जिन कर्मचारियों का भला हो सकता है हो जाए. हम तैयार नहीं हुए हैं, लेकिन कम से कम सरकार पहले कुछ लागू करे तो कहीं उम्मीद जगेगी, कुछ परिवारों को फायदा होगा.

यह उल्लेखनीय है कि मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि यह एक अप्रैल से लागू हो रहा है. लेकिन कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि इस बारे में अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

सरकार के साथ मध्यस्थता कर रहे एनसीजेसीएम के पदाधिकारी का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है. पहले कहा गया था कि दिया जाएगा. लेकिन अब सरकार की ओर से इशारा साफ है कि नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं यह भी इशारा किया गया है कि अब यह विचार के लिए भी नहीं है.

क्या हुआ था –
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने न्यूनतम वेतनमान और फिटमेंट फॉर्मूला पर आपत्ति जताई थी और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी. बाद में सरकार ने कर्मचारी नेताओं से बातचीत कर चार महीने का समय मांगा था और फिर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ. तब वित्तमंत्री जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रेल मंत्री सुरेश प्रभु और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के साथ बैठक में कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा था कि सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतनमान और फिटमेंट फॉर्मूले से कर्मचारी बुरी तरह आहत हैं.

सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू (1 जुलाई 2016) होने के करीब एक साल बाद इस उठे सभी विवादों को खत्म कर दिया और अलाउंसेस समेत कई मुद्दों का समाधान किया. एक मुद्दा न्यूनतम वेतनमान का बना रहा है.

बता दें कि कर्मचारी नेताओं ने सरकार को याद दिलाया कि सरकार के मंत्रियों ने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत में कहा था कि वे कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास करेंगे और तब कर्मचारी संगठनों ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को टाल दिया था.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने भत्तों पर दी गई 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 34 संशोधनों के साथ स्वीकार कर लिया था, इसे लागू करने पर कुल 30,748.23 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. बता दें कि 48 लाख सरकारी कर्मचारियों को इसका फायदा हुआ. यह 1 जुलाई 2016 से लागू हो गया था. सरकार ने विशिष्ट कार्यरत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 12 भत्तों को समाप्त न करने का निर्णय लिया था. कई भत्तों के विशिष्ट स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विलय किये जाने वाले 37 भत्तों में से 3 भत्तों की अलग पहचान अब भी बनी है. आवास किराया भत्ता (एचआरए) का भुगतान क्रमश: एक्स, वाई एवं जेड शहरों के लिए 24, 16 और 8 फीसदी की दर से दिया जा रहा था.

एक्स, वाई एवं जेड शहरों के लिए एचआरए 5400, 3600 एवं 1800 रुपये से कम नहीं है, 18000 रुपये के न्यूनतम वेतन के 30, 20 एवं 10 फीसदी की दर से इसकी गणना की जा रही है. इससे 7.5 लाख से भी ज्यादा कर्मचारी लाभान्वित हो रहे हैं. 7वें वेतन आयोग ने डीए के 50 एवं 100 फीसदी के स्तर पर पहुंचने की स्थिति में एचआरए में संशोधन की सिफारिश की थी, हालांकि सरकार ने डीए के क्रमश: 25 एवं 50 फीसदी से ज्यादा होने की स्थिति में दरों में संशोधन करने का निर्णय लिया.

Category: News, Seventh Pay Commission

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