एससी-एसटी आरक्षण पर नहीं लागू होती क्रीमी लेयर

| March 31, 2018

नई दिल्ली : एससी- एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गर्म राजनीतिक माहौल में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इसे दुरुस्त करने और श्रेय लेने की होड़ छिड़ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटा कर हस्तक्षेप की मांग की तो सत्ता पक्ष के दलित सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर फैसले में सुधार की मांग की। पता चला है कि विधि मंत्रलय भी मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार कर रहा है।








गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया था कि एससी -एसटी एक्ट में भी तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। यह आदेश उन आंकड़ों के आधार पर दिया गया था जिसमें पाया गया था कि बड़ी संख्या में इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। विपक्ष ने तत्काल इसे राजनीतिक रंग देते हुए जिम्मा सरकार पर फोड़ा था। वहीं सतर्क भाजपा व सत्तापक्ष में भी कवायद शुरू हो गई थी। बुधवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में कई दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की।




उन्हें बताया कि पिछले दस वर्षो में दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अत्याचार बढ़ा है। ऐसे में अगर कानूनी प्रक्रिया ढ़ीली हुई तो अत्याचार और बढ़ेगा। दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, केंद्रीय सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, भाजपा सांसद व एससी मोर्चा के अध्यक्ष विनोद सोनकर समेत राजग के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और इसके समाधान के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने की अपील की। न्यायपालिका में भी आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग की। बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना। प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया कि एससी-एसटी समुदाय की भलाई और विकास में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

बताते हैं कि विधि मंत्रलय के स्तर पर पुनर्विचार याचिका के लिए विचार चल रहा है। सामाजिक अधिकारिता मंत्री गहलोत ने पहले ही घोषणा कर दी है कि सरकार पुनर्विचार याचिका लाएगी। लेकिन आगे बढ़ने से पहले सरकार हर पहलू पर विचार कर लेना चाहती है। दो दिन पहले सरकार में मंत्री व रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था।केंद्र सरकार ने एससी-एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर बाहर करने की मांग का विरोध करते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता।

कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में फिर होगी। 1सुप्रीम कोर्ट में समता आंदोलन समिति की याचिका लंबित है, जिसमें अनसूचित जाति-जनजाति (एससी -एसटी) आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर किए जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एससी -एसटी को मिलने वाले आरक्षण का ज्यादातर लाभ इस वर्ग के ऊपर उठ चुके लोग ही ले लेते हैं और वास्तविक जरूरतमंद लाभ से वंचित रह जाते हैं। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी पीएस नरसिम्हा ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का फॉमरूला लागू नहीं होता।




उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत पिछड़े वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण में लागू होता है। इसलिए सरकार एससी- एसटी को मिलने वाले लाभ में कोई कटौती नहीं करने जा रही है। इन दलीलों पर कोर्ट ने सरकार को इस बारे में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने के लिए सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चार सप्ताह में याचिकाकर्ता सरकार के जवाबी हलफनामे का उत्तर दाखिल करेंगे। मामले पर जुलाई के दूसरे सप्ताह में फिर सुनवाई होगी।

याचिका में एससी-एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर करने की मांग करते हुए कहा गया है कि पूरे एससी- एसटी वर्ग को पिछड़ा मानना ठीक नहीं है वो भी लगातार 70 सालों से। इस वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का लाभ कुछ लोग ही ले लेते हैं और बाकी के 95 फीसद लोग वैसे ही पिछड़े और वंचित रह जाते हैं। कहा कि जैसे सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी मामले में दिए फैसले में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर करने की बात कही है ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंच सके, वैसा ही एससी- एसटी आरक्षण मामले में भी होना चाहिए।

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