क्या आपने टैक्स सेविंग सही से की है? यह चेक करना न भूलें

| March 26, 2018

नई दिल्ली :- ज्यादातर लोग फाइनैंशल इयर की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान टैक्स-बचत के लिए भागदौड़ शुरू करते हैं। इसी वक्त वे टैक्स सेविंग वाले जरूरी डॉक्युमेंट्स भी कंपनी को जमा करवाते हैं। ज्यादा टैक्स नहीं चुकाना पड़े इसके लिए खूब माथापच्ची की जाती है। इस वित्त वर्ष के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। आपको एक बार चेक कर लेना चाहिए कि आपने टैक्स से जुड़े अपने सभी काम सही तरीके से पूरे किए हैं या नहीं।








यहां पांच ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब ‘हां’ में मिलने पर आपको पता लगेगा कि आपने सही तरह टैक्स सेविंग की है। यदि आपका उत्तर ‘नहीं’ में है, तो गलती सुधारने के लिए अब भी समय बचा है।

1. क्या आपने टैक्स देनदारी की सही गणना की हैॽ
हम सभी ‘अच्छा’ निवेश करके टैक्स बचाना चाहते हैं। हालांकि, निवेश करने का निर्णय लेने से पहले अच्छा होगा कि आप अपनी टैक्सेबल इनकम निकाल लें। इसके बाद आपको पता लगेगा आपको कितना टैक्स चुकाना होगा। आईटी ऐक्ट के अनुसार, आपकी कुल आय इन पांच प्रमुख मदों से बनती है:
1. सैलरी इनकम
2. हाउस प्रॉपर्टी से आय
3. बिजनस से फायदा
4. कैपिटल गेंस
5. अन्य स्रोतों से आमदनी




कर योग्य इनकम यानी टैक्सेबल इनकम निकालने के लिए अपनी कुल आय से विभन्न छूटों को घटा दें। इसके बाद टैक्स की गणना करें।

2. क्या आपने सेक्शन 80सी का पूरा फायदा लियाॽ
आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कुछ विशेष साधनों में डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स से छूट मिलती है। इससे आपकी कर देनदारी घट जाती है। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस), सुकन्या समृद्धि योजना, टैक्स सेविंग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) 80सी के तहत आने वाले लोकप्रिय निवेश साधन हैं।

3. क्या आपने इनमें न्यूनतम राशि का निवेश कर दिया है?
पीपीएफ, नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और सुकन्या समृद्धि योजना में पहले से ही निवेश कर चुके हैं तो 31 मार्च की समयसीमा केवल टैक्स-बचत के बारे में नहीं है। कारण है कि इन खातों को सक्रिय रखने के लिए आपको हर वित्त वर्ष में न्यूनतम राशि का निवेश इनमें करना होता है।




4. क्या आप केवल टैक्स बचत के लिए बीमा योजना खरीद रहे हैं?
बीमा का मूल मकसद निवेश नहीं है। यह किसी अनहोनी की स्थिति में सुरक्षा देता है। यह सही है कि चुकाए गए प्रीमियम पर टैक्स बेनिफिट मिलता है, लेकिन कुछ परंपरागत पॉलिसी केवल 4-5 फीसदी रिटर्न देती हैं। यह पीपीएफ, वीपीएफ और एनएससी जैसी कुछ फिक्स्ड स्कीम्स की तुलना में भी कम है। इन स्कीम्स से 7-8 फीसदी रिटर्न मिलता है।

5. क्या कंपनी को टैक्स-बचत के सबूत दे दिए हैं?
सैलरी से होने वाली आमदनी पर आईटी ऐक्ट के तहत स्रोत पर टैक्स कटौती (टीडीएस) लागू होता है। वित्त वर्ष की शुरुआत से ही कंपनी टैक्सेबल इनकम के आधार पर टैक्स की गणना शुरू कर देती है। इसलिए वित्त वर्ष के दौरान अगर आपने किसी टैक्स सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट में निवेश किया है तो इसका दस्तावेज साक्ष्य कंपनी को देना पड़ता है।

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