रेलवे में बेटों के उपचार में उम्र का बंधन हटा

| March 22, 2018

जबलपुर. रेलवे ने अब अपने कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा देते हुए उनके आश्रित बच्चों (बेटों) को तब तक रेलवे अस्पतालों में उपचार की सुविधा देता रहेगा, जब तक कि वे अपने पैरों पर न खड़े हो जाएं. इस निर्णय का पालन जबलपुर में शुरू हो गया, इस निर्णय से हजारों रेल कर्मचारियों के आश्रित बच्चों को लाभ मिलेगा.








उल्लेखनीय है कि अभी तक रेलवे अपने कर्मचारियों के बच्चों, खासकर लड़कों का 21 वर्ष तक ही रेलवे अस्पताल में इलाज की सुविधा मुहैया कराया जाता था, विशेष परिस्थितियों में यदि बच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है, तब ही उपचार की सुविधा मिलती थी, लेकिन इसके लिए रेल कर्मी को अपने बच्चे के शिक्षण संस्थान में अध्ययन करने का प्रमाण पत्र जमा करना होता था, लेकिन रेलकर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इस बेरोजगारी के समय में उसका बच्चा पढऩे-लिखने के बाद भी यदि नौकरी नहीं करता है तो उसका उपचार का खर्चा कैसे वहन किया जाए. इस मामले को रेलवे बोर्ड के समक्ष आल इंडिया रेलवे मैंस फेडरेशन के माध्यम से पश्चिम मध्य रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने उठाया, जिसके बाद पिछले दिनों रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में नया आदेश जारी कर दिया है.




यह है रेलवे बोर्ड का आदेश

इस संबंध में एम्पलाइज यूनियन के मंडल सचिव नवीन लिटोरिया व मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला कहते हैं कि एआईआरएफ के प्रयासों से रेलकर्मचारियों के हित में यह काफी महत्वपूर्ण निर्णय है, इसमें अब रेल कर्मचारी के हर आश्रित बच्चों को रेलवे अस्पताल में इलाज की सुविधा उपलब्ध होती रहेगी, चाहे उसकी उम्र कितनी भी हो, बशर्ते वह पूर्णत: अपने रेलकर्मी माता-पिता पर आश्रित हो. इस निर्णय के बाद रेलवे अस्पतालों में ऐसे कर्मचारियों के आश्रित बच्चों को उपचार की सुविधा मिलने लगी है.




आश्रित पुत्रियों को पहले से ही थी सुविधा

खास बात यह है कि रेलवे अपने कर्मचारियों की पुत्रियों को इलाज की सुविधा पहले से ही देता रहा है, बेटियों के मामले में उम्र की कोई सीमा नहीं थी, यहां पर भी यही नियम लागू था कि बेटी अविवाहित, विधवा व तलाकशुदा होना चाहिए.

Category: News, Seventh Pay Commission

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