20 लाख तक ग्रेच्युटी टैक्स फ्री , लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित

| March 16, 2018

20 लाख तक ग्रेच्युटी टैक्स फ्री , लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित, निजी क्षेत्र भी दायरे में ,  ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रपए से बढ़ाकर 20 लाख रपए करने का प्रावधानविधेयक में मातृत्व अवकाश की अवधि मौजूदा 12 सप्ताह से आगे बढ़ाने का भी प्रावधान बढ़ी हुई सीमा के बारे में सरकार बाद में अधिसूचना जारी करेगीविधेयक भारी हंगामे के बीच बिना र्चचा के हुआ पारित







निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और मातृत्व अवकाश की अवधि मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाने संबंधी ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2017 आज भारी हंगामे के बीच बिना र्चचा के लोकसभा में पारित हो गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सदन में बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गयी है।




विधेयक में निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी ग्रैच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रावधान है।उन्होंने बताया कि महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की सीमा बढ़ाये जाने का भी विधेयक में प्रावधान है। मौजूदा सीमा 12 सप्ताह है और बढ़ी हुई सीमा के बारे में सरकार बाद में अधिसूचना जारी करेगी। रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन ने कानून को 01 मार्च 2016 से प्रभावी करने संबंधी संशोधन भी पेश किया, लेकिन उनका यह संशोधन सदन ने ध्वनि मत से अस्वीकार कर दिया। प्रेमचंद्र के दो अन्य संशोधन भी इसी रतह से अस्वीकार हो गये। सरकार की ओर से गंगवार के दो संशोधन सदन ने स्वीकार कर लिये।




इसके अलावा कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का एक संशोधन भी स्वीकार नहीं किया गया। इससे पहले अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे के बीच सदन के पटल पर जरूरी कागजात रखवाने के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विधेयक पर विचार के प्रस्ताव की अनुमति दी। उन्होंने कहा यह विधेयक कर्मचारियों और महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण विधेयक है और इस पर र्चचा बहुत जरूरी है।

कांग्रेस तथा अन्य दल भी इस पर अपनी राय रखना चाहते हैं। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सदन में व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि विधेयक पर बहस हो सके। महाजन ने कहा कि र्चचा होनी चाहिये, लेकिन विधेयक के जरिये किये जा रहे दोनों बदलाव जरूरी हैं। इसके बाद उन्होंने विधेयक पारित करने की प्रक्रिया शुरू की और शोर-शराबे के बीच ही विधेयक पारित कर दिया गया।

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