Railway to take measures to remove delays in train operation

| February 12, 2018

खत्म होगी ट्रेनों की लेटलतीफी, संरक्षा कार्य तेज कर खामियों को दूर करने में जुटा है रेलवे,  इसके लिए धन की कमी नहीं मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी उपायों पर दिया जा रहा जोरए, बी, सी रूट के मानवरहित लेबल क्रासिंग मार्च तक समाप्त होंगे








ट्रेनों के लेट होने और कई ट्रेनों के रद्द होने का सिलसिला जल्द खत्म होगा। दरअसल, रेलवे संरक्षा कार्यो को तेज कर खामियों को दूर करने में लगा है, ताकि ट्रेनों की रफ्तार को अपनी निर्धारित स्थिति में लाया जा सके। इसके लिए रेलवे ने संरक्षा के विभिन्न कार्यो को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त धन का इंतजाम किया है। मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने लिए ज्यादा से ज्यादा तकनीकी उपाय अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। यहां तक कि ए बी और सी श्रेणी के रूट के मानवरहित लेबल क्रासिंग को मार्च तक समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।




गौरतलब है कि खतौली रेल दुर्घटना और फिर कोहरे के मद्देनजर संरक्षा पहलुओं को देखते हुए रेलवे ने यह तय किया था ट्रेनें सुरक्षित चलाई जाएंगी। फिर चाहे ट्रेनें रद्द हों या लेट या फिर रेलवे को आर्थिक नुकसान, सब चलेगा। लेकिन इसी के साथ संरक्षा संबंधी खामियों को भी समानांतर रूप से दूर करने का काम किया जाएगा। ताकि सुधार के बाद ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जा सके। इस नजरिए से सभी जोनल रेलवे को रेललाइन, सिग्नल और अन्य संरक्षा उपकरणों को दुरुस्त करने का लक्ष्य दिया गया है। संरक्षा संबंधी कार्यो को कराने के लिए मंत्रालय की ओर से पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की गई है।




यहां तक कि बजट 2018-19 में 73 हजार करोड़ रपए का प्रावधान किया है, जबकि एक लाख करोड़ रपए का राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष भी है। चालू वित्तीय वर्ष में भी संरक्षा कायरे के लिए 68,725 करोड़ रपए का इंतजाम किया गया है। रेलवे की कोशिश है कि क्षमता विकास के साथ-साथ संरक्षा के लिहाज से कार्य हो जाएं, जिससे दुर्घटना होने की आशंका न रहे। आंकड़ों के हिसाब से ज्यादातर रेल दुर्घटनाएं मानवीय भूल की वजह से होती हैं और इनमें सबसे अधिक मानवीय भूल रेलकर्मियों से होती है। चालू वित्तीय वर्ष में 31 जनवरी 2018 तक मानवीय भूल के चलते छोटी-बड़ी 65 दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 35 मामलों में रेलकर्मियों की और 14 मामलों में गैर रेलकर्मियों की लापरवाही पाई गई है। लिहाजा, रेलवे इन मानवीय भूलों को रोकने के लिए तकनीकी उपायों पर जोर दे रही है, जिसके तहत तकनीकी उपकरणों को लगाया जा रहा है।

इनमें प्रमुख रूप से अल्ट्रासोनिक रेल टेस्टिंग, टीपीडब्ल्यूएस और टीसीएस जैसे उपकरण शामिल हैं। इन उपकरणों से मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। हालांकि मानवरहित रेलवे लेबल क्रासिंग को समाप्त करने के क्रम में ए, बी और सी श्रेणी रूट के मानवरहित लेबल क्रासिंग को 2018 तक समाप्त कर दिया जाएगा। इन सब में अहम काम पुरानी रेल लाइनों को बदलना है।

Category: Indian Railways, News

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