Budget 2018: नौकरी पेशा लोगों की क्या हैं TOP 5 उम्मीदें

| January 26, 2018

डेलायट पर्सनल टैक्स सर्वेक्षण के मुताबिक 71 फीसदी लोग धारा 80 सी के तहत 1,50,00 लाख के सीमा को 2,50,000 लाख रुपये करने के पक्ष में हैं.








 आम बजट बहुत ही नजदीक है. 1 फ़रवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री आम बजट 2018 पेश करने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया बयान में कहा था कि आम बजट लोकलुभावन होने को उम्मीद नहीं है. बजट को नौकरी पेशा लोग बहुत उम्मीद से देख रहे हैं. डेलायट पर्सनल टैक्स सर्वे 2018 के मुताबिक जानते हैं लोगों को आम बजट 2018 से क्या उम्मीदें हैं.

पर्सनल टैक्स और कैलेंडर साल

पर्सनल टैक्स सर्वे के मुताबिक 697 लोगों से बात करके सर्वे टीम ने टैक्स देने वाले लोगों के मन की बात जानने की कोशिश की गई. करीब 55 फीसदी लोगों का मानना है कि बजट 2018 में टैक्स की शुरूआती सीमा को 2,50,000 से 5,00,000 रुपये कर दिया जाए. मजेदार बात यह है कि 84 फीसदी लोग चाहते हैं कि वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) को कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर) कर दिया जाए. सर्वेक्षण के मुताबिक 71 फीसदी लोग धारा 80 सी के तहत 1,50,00 रुपये के सीमा को 2,50,000 रुपये करने के पक्ष में हैं.




शिक्षा पर टैक्स की कटौती

शिक्षा पर लगातार बढ़ रहे खर्चे को लेकर अधिकतर (करीब 94 फीसदी) लोगों का मानना है कि दो बच्चों के शिक्षा के लिए कम से कम 5,000 रुपये मासिक कटौती की जानी चाहिए. सर्वे के मुताबिक इस कदम से शिक्षा पर बढ़ रहे खर्चे से मध्यम वर्गीय लोगों को राहत मिल सकेगा.

घर लेने पर टैक्स लोन में छूट

केंद्र सरकार 2022 तक ‘सभी के लिए घर’ योजना पर काम कर रही है. आम बजट 2018 से पहले डेलायट पर्सनल टैक्स सर्वे के मुताबिक लोगों को उम्मीद है कि होम लोन के ब्याज पर छूट बढ़नी चाहिए. सर्वे में 51 फीसदी लोगों ने कहा कि खुद के घर लेने के लिए लोगों को 2,00,000 से बढ़ाकर कम से कम 3,50,000 रुपये तक होम लोन में ब्याज पर छूट मिलनी चाहिए. अगर कोई एक से अधिक घर लेता है तो सिर्फ एक घर के लिए होम लोन के ब्याज में रियायत दी जाए.




चिकित्सा को टैक्स फ्री किया जाए

अभी इसके तहत 1.50 लाख तक के निवेश पर कर में छूट मिलती है. मेडिकल खर्च अभी सालाना 15,000 रुपये है जो टैक्स फ्री है. 58 फीसदी लोग चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया जाए और बांकी के 42 फीसदी लोग चाहते हैं कि टैक्स फ्री मेडिकल खर्चे को बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया जाए.

Jurisdiction-free e-assessment

सर्वे में करीब दो तिहाई लोगों (64 फीसदी) ने jurisdiction-free e-assessment (न्याय-मुक्त ई-मूल्यांकन) धारणा को लेकर सहमति दी. 20 फीसदी लोगों का मानना रहा कि इससे कोई फायदा नहीं होगा और 16 फीसदी लोग उलझन में रहे कि यह कदम सही होगा या गलत.

Category: Finance Ministry, News

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