Government may relax conditions of contributions in Pension Fund

| January 21, 2018

पेंशन फंड में ज्यादा योगदान के मामले में सरकार नरम रुख अपना सकती है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सरकार ने इस पर विचार करने के लिए कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का प्रमुख श्रम आैर रोजगार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हीरा लाल सामारिया को बनाया गया है। कमेटी में इंडस्ट्री चैंबर पीएचडीसीसीआई के रवि विंग को एंप्लॉयर्स के प्रतिनिधि के रूप में आैर भारतीय मजदूर संघ के महासचिव विरजेश उपाध्याय को कमेटी में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है। सेंट्रल पीएफ कमिश्नर डॉ वी पी जॉय आैर श्रम आैर रोजगार मंत्रालय में ज्वॉइंट सेक्रेटरी आर के गुप्ता इस समिति के सदस्य होंगे। कमेटी को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी सेक्टर के एक्सपर्ट को कमेटी में सदस्य बना सकती है। यह कमेटी पेंशन फंड में ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन को लेकर मीटिंग करेगी आैर पेंशनरों से बात करेगी। इसके बाद यह अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी। कमेटी की बैठक आम बजट के बाद हो सकती है। फिलहाल इसकी तारीख तय नहीं है।







विरजेश उपाध्याय ने एनबीटी से बातचीत में कहा कि निश्चित तौर इस मामले में सभी पहलुआें पर विचार करके कोई फैसला किया जाएगा। हम चाहते हैं कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले ताकि सभी किसी एक बात पर सहमत हों। इधर, श्रम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार लोकसभा से पहले इस मामले को सहमति के साथ सुलझाना चाहती है, यही कारण है कि कमेटी का गठन किया गया है। सरकार को आशंका है कि कहीं यह मुद्दा बड़ा न बन जाए आैर कर्मचारी विरोध में न उतर जाएं।




क्या है तकरार

कर्मचारियों की मांग है कि जिन लोगों ने 2014 से पहले नौकरी ज्वॉइन की है, उन सबको पेंशन फंड में ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन की इजाजत दी जाए, जबकि ईपीएफआे का कहना है कि छूट वाली कंपनियों के कर्मचारियों को पूरे वेतन पर पेंशन नहीं दिया जा सकता। जिन कंपनियों के कर्मचारियों का फंड, प्राइवेट ट्रस्ट द्वारा मैनेज किया जाता है उन्हें छूट वाली कंपनियां कहा जाता है और जिन कंपनियों का फंड ईपीएफओ मैनेज करता है, उन्हें बगैर छूट वाली कंपनी कहा जाता है। यानी ईपीएफआे बगैर छूट वाली कंपनियों को यह सुविधा देने की बात कर रही है।




क्या है ताजा मामला

मार्च 1996 में पेंशन फंड एक्ट में एक बदलाव किया गया था। इसमें कर्मचारियों को यह विकल्प दिया गया था वे पूरी सैलरी (बेसिक+डीए) के 8.33 फीसदी हिस्से को पेंशन में योगदान दे सकते हैं। इससे उनकी पेंशन बढ़ सकती है। साल 2005 कई निजी ईपीएफ फंड ट्रस्टी और कर्मचारियों ने ईपीएफआे से संपर्क किया और पेंशन फंड में हिस्सेदारी की तय सीमा को हटाने की मांग की। इसके बाद कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद प्रवीण कोहली सहित करीब 5 लोगों की पेंशन राशि 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। इधर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अपने एक आदेश में कहा कि जिन लोगों ने 1 सितंबर, 2014 से पहले नौकरी ज्वॉइन की है वे अपनी पूरी सैलरी पर पेंशन फंड में कॉन्ट्रीब्यूट कर सकते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सितंबर 2014 में वेज लिमिट 15,000 रुपये तय की थी। अब कंपनी 15,000 रुपये का 12 फीसदी ही पीएफ में कॉन्ट्रीब्यूट कर सकती है। इसका 8.33 फीसदी यानी 1,250 रुपये ही कर्मचारियों के पेंशन फंड में जाता है। कंपनी के कॉन्ट्रीब्यूशन का बाकी पैसा एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड में जाता है।
PF में ज्यादा योगदान के लिए समिति का गठन
लेबर मिनिस्ट्री के अतिरिक्त सचिव हीरालाल समारिया की अगुवाई में बनी कमेटी, बजट के बाद हो सकती है पहली बैठक

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.