Political Support to Scrap New Pension Scheme grows

| January 11, 2018

2004से हो रही नई भर्तियों में नवीन पेंशन योजना (एनपीएस) के स्थान पर पुरानी पेंशन नीति को ही लागू करने को लेकर जैसे विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। चार दर्जन से ज्यादा विधायकों ने सरकार को अपने लेटरहैड से पत्र लिखकर पुरानी पेंशन नीति को लागू करने की मांग रख दी है। इधर एक के बाद एक विधायकों की ओर से जारी किए जा रहे पत्रों को लेकर भास्कर ने जब सीधे विधायकों से नीति के संबंध में सवाल किया तो ज्यादातर बोले-उन्हें इस बारे में पता ही नहीं। कुछ ने यहां तक कहा-कर्मचारियों ने ज्ञापन दिया तो उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर संगठनों को थमा दिए।








राज्य में होने जा रहे उपचुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री के नाम ये पत्र ज्यादातर विधायकों की ओर से एक सप्ताह के भीतर ही लिखे गए हैं। भास्कर के पास ऐसे करीब 25 विधायकों के पत्र हैं जिसमें पुरानी पेंशन नीति को लागू करने की मांग रखी गई है। मजेदार यह है कि सभी पत्रों की भाषा भी मिलती-जुलती ही है।
पत्र लिखने वालों में सत्तारूढ़ भाजपा विधायक ज्यादा हैं। एक ही इश्यू पर एक साथ विधायकों के पत्र सामने आने के बाद भास्कर ने विधायकों से ही पूछा कि पेंशन स्कीम को लेकर उनका क्या नजरिया है तो बड़े चौकाने वाले जवाब सामने आने लगे। कई विधायकों ने ऑन रिकॉर्ड यह कहा कि बड़ी संख्या में आए दिन कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर उनके पास आते ही रहते हैं। एेसे में वे उनकी मंशा के मुताबिक पत्र लिखकर उन्हें थमा देते हैं। कुछ का मानना था कि उन्होंने किस तरह के पत्र लिखे हैं ये तो चैक करने के बाद ही पता चल सकेगा।
पुरानी पेंशन नीति लागू करने के लिए विधायकों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम लिखे गए पत्र।





बड़े अंतर : पुरानी पेंशन योजना- नई योजना में
{ यह सुविधा नहीं है
{ वेतन से प्रतिमाह दस फीसदी कटौती
{ पेंशन कितनी मिलेगी यह तय नहीं, यह पूरी तरह शेयर मार्केट बीमा कंपनी पर निर्भर
{ पेंशन बीमा कंपनी देगी।
{ ग्रेच्युटी का प्रावधान नहीं

{ नई योजना में डेथ ग्रेच्युटी नहीं
{ नई में यह व्यवस्था नहीं
{ फिक्स पेंशन, महंगाई या वेतन आयोग का लाभ नहीं
{ विशेष परिस्थिति में कठिन प्रक्रिया है
{ रिटायरमेंट पर जो अंशदान 60 प्रतिशत वापस मिलेगा उस पर आयकर
{ एनपीएस पूरी तरह शेयर पर आधारित
{ जीपीएफ सुविधा है
{ पेंशन के लिए वेतन से कोई कटौती नहीं होती है
{ रिटायरमेंट के समय एक निश्चित पेंशन (अंतिम वेतन का 50 फीसदी) की गारंटी
{ पेंशन सरकार देगी
{ रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी (अंतिम वेतन के अनुसार 16.5माह का वेतन) मिलता है
{ सेवाकाल में मृत्यु पर डेथ ग्रेच्युटी मिलती है जो सातवें पे कमीशन ने 10 से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया है
{ सेवाकाल में मृत्यु पर परिवार को पारिवारिक पेंशन
{ हर छह माह बाद महंगाई और वेतन आयोगों का लाभ
{ जीपीएफ से आसानी से लोन सुविधा है
{ जीपीएफ निकासी (रिटायरमेंट के समय) पर कोई आयकर नहीं
{ जीपीएफ पर ब्याज दर निश्चित है




नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी भी कर्मचारियों के साथ
नेताप्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। डूडी ने लिखा है कि नवीन पेंशन नीति शेयर मार्केट पर आधारित होने के कारण कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना है। पत्र में उन्होंने कहा है कि शिक्षक संघ की ओर से ज्ञापन पेश किया गया था। जनहित में पुानी पेंशन नीति का लाभ दिया जाए। जब डूडी से स्कीम पर पूछा तो बोले-कर्मचारियों को पुरानी स्कीम का लाभ मिलना चाहिए जिससे रिटायरमेंट के बाद उनके लिए जीवन यापन आसान हो सके।
नए भर्ती ढाई लाख कर्मचारी हो रहे हैं पुरानी स्कीम से बाहर
राज्यके करीब ढाई लाख कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति एक जनवरी 2004 के बाद हुई है। पुरानी पेंशन नीति के स्थान पर इन पर नवीन अंशदायी पेंशन योजना लागू हैं। राजस्थान पंचायतीराज कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता नारायण सिंह का कहना है कि प्रदेश में नई हो रही भर्तियों के कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन स्कीम का ही लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि बड़ा अचरज इस बात को लेकर भी है एक सप्ताह के भीतर ही एक साथ विधायकों ने इस मामले पर सरकार को पत्र लिखना शुरु कैसे कर दिया। इस बात की भी आशंका है कि यह सातवें वेतनमान की विसंगतियों से प्रदेश के कर्मचारियों का ध्यान हटाने की कोशिश मात्र है। राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के प्रदेशाध्यक्ष गिरीश कुमार शर्मा का कहना है कि चुनावी समर को देखते हुए विधायकों को पत्र लिखकर भूल ही नहीं जाना चाहिए इसके लिए संघर्ष को जारी रखना चाहिए।
^क्या सीएम को पत्र मैंने लिखा है? ध्यान नहीं रहा है। वैसे मेरे पास रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर आते रहते हैं। जो मांगते हैं लिखकर दे देते हैं। जो भी भलाई का काम होता है अपनी ओर से कर देते हैं। -श्रीरामभींचर, विधायक मकराना (भाजपा)
^कर्मचारियोंके बहुत सारे इश्यू आते रहते हैं। मैंने सीएम को कोई पत्र लिखा है यह तो ऑफिस में देखने के बाद ही पता चल सकेगा। वैसे कर्मचारियों के ज्ञापन पर हमसे जो मदद होती है हम कर देते हैं। क्या कोई बात हो गई? -चंद्रकांतामेघवाल, विधायक रामगंजमंडी (भाजपा)
^ध्याननहीं रहा पेंशन को लेकर कैसा पत्र लिखा है। सीएम रही हैं, कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त हूं। दिखवाऊंगा क्या मामला है। -अमृतलालमीणा, विधायक, सलूंबर (भाजपा)
^पेंशनस्कीम को लेकर कर्मचारियों से पूरी बात नहीं हुई है। पत्र तो लिखा है। अब नए सिरे से सीएम को सिफारिश की जाएगी। वैसे मैं पेंशन के इश्यू को फिलहाल पूरी तरह से समझ नहीं पाया हूं। -संदीपशर्मा, विधायक कोटा दक्षिण (भाजपा)
^कुछएलडीसी कर्मचारी ज्ञापन लेकर आए थे, उसी की बात कर रहे हो ना आप। पुरानी पेंशन नीति लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर उन कर्मचारियों को ही थमा दिया है। वैसे हमारे पत्र से किसी का भला होता है तो कोई बुरी बात तो नहीं। -जयरामजाटव, विधायक अलवर-ग्रामीण (भाजपा)
^पुरानीपेंशन पॉलिसी लागू करवाने की सिफारिश के लिए कुछ कर्मचारी आए थे। सरकार करे या नहीं यह तो उसकी मर्जी। मैंने तो लिखकर दे दिया है। रिटायरमेंट के बाद लाभ मिल जाए तो ठीक ही है। -लक्ष्मीनारायणबैरवा, विधायक चाकसू (भाजपा)

Category: News, NPS

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