Government to incorporate standard deduction again in Income Tax Slabs

| January 10, 2018

इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन फिर से लागू कर सकती है सरकार, टैक्स स्लैब के हिसाब से होंगे रेट

मोदी सरकार लोकसभा चुनावों से पहले 1 फरवरी को पेश होने वाले पूर्ण आम बजट में जहां इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन की व्यवस्था फिर से लागू कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव भी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन फिर लाने का एेलान हो सकता है। टैक्स स्लैब के हिसाब से डिडक्शन की दरें अलग-अलग होंगी। 5 लाख रुपये के स्लैब में सबसे ज्यादा डिडक्शन मुमकिन है, जबकि 10 लाख रुपये तक वाले स्लैब में डिडक्शन कम हो सकता है। वहीं 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले स्लैब के लिए फ्लैट डिडक्शन हो सकता है।







इसका मतलब है कि 5 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी वाले स्लैब में सैलरी का तय फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में टैक्सपेयर्स को मिल सकता है। गौरतलब है कि स्टैडर्ड डिडक्शन की रकम पर इनकम टैक्स नहीं देना होता है और डिडक्शन की रकम पर टैक्स बचाने के लिए कोई सुबूत नहीं देना होता है। 2004-05 तक स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा मौजूद थी। पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन के दो स्लैब थे। 5 लाख रुपये तक की सैलरी वालों के लिए 30,000 रुपये या 40 फीसदी (जो भी कम) तक का डिडक्शन का प्रावधान था। वहीं, 5 लाख रुपये से ज्यादा की सैलरी वालों के लिए 20,000 रुपये तक का डिडक्शन का प्रावधान था।



इसके अलावा इस बार बजट में कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव किया जा सकता है। माना जा रहा है कि बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर टैक्स में बदलाव संभव है। बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की अवधि 1 साल से बढ़ाकर 2 या तीन साल तक की जा सकती है। फिलहाल इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 15 फीसदी की दर से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, 3 साल से कम होल्डिंग पर सोना और रियल एस्टेट पर भी शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। इसके अलावा सोना, रियल एस्टेट और डेट म्यूचुअल फंड पर फिलहाल 20.6 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स लगता है।




वित्त मंत्रालय के उच्चाधिकारियों का कहना है कि इस बारे में प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है। पीएमआे से मंजूरी मिलने के बाद इसको बजट में शामिल करने या न करने पर फैसला किया जाएगा। निश्चित तौर पर इसमें कुछ फेरबदल संभव है। गौरतलब है कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के तहत अगर कोई शेयर खरीदने के बाद एक साल तक अपने पास रखता है आैर उसके बाद उसे बेचता है तो उसे कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना होगा। एक साल से पहले शेयर बेचने पर उसे कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा।

टैक्स स्लैब के हिसाब से डिडक्शन की दरें अलग-अलग होंगी

5 लाख रुपये के स्लैब में सबसे ज्यादा डिडक्शन मुमकिन है, जबकि 10 लाख रुपये तक वाले स्लैब में डिडक्शन कम हो सकता है। वहीं 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले स्लैब के लिए फ्लैट डिडक्शन हो सकता है

Category: Finance Ministry, News

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