Railway officers to be trained in Journalism

| January 6, 2018

रेलवे अधिकारियों को पढ़ाया जाएगा पत्रकारिता का पाठ

रेलवे की छवि सुधारने और ट्रेनों से संबंधित सही व समय से सूचना यात्रियों तक पहुंचाने के लिए रेल अधिकारियों को पत्रकारिता का पाठ बढ़ाया जाएगा। 1पिछले साल लगातार कई ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने, ट्रेनों के देरी से चलने, यात्रियों को पूरी सुविधा नहीं मिलने जैसे मामले को लेकर रेलवे की छवि काफी खराब हुई। रेलवे ने यात्रियों के सुविधाओं के लिए क्या किया है या क्या करने जा रहे है, दुर्घटना रोकने को क्या प्रयास किया जा रहा। इसकी जानकारी यात्री व जनता तक नहीं पहुंच रही है।







रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी कुमार लोहानी ने रेलवे की छवि सुधारने व जनता तक समय से सूचना पहुंचाने के लिए विशेष नियम बनाया है। रेलवे बोर्ड के अधिशासी निदेशक एके चंद्रा ने पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि रेलवे बोर्ड स्तर पर जनसंपर्क अधिकारी और जोन मुख्यालय पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी की टीम विभिन्न माध्यम से जनता तक सही सूचना पहुंचाने का काम करेगी। मंडल मुख्यालय पर डीआरएम व एडीआरएम सीनियर डीसीएम सलाह पर मीडिया कर्मियों को जानकारी देंगे, जिस मंडल में दो एडीआरएम तैनात होंगे।



वहां जनसंपर्क अधिकारी तैनात किया जाएगा। जहां एक एडीआरएम तैनात होंगे, वहां महाप्रबंधक अपने स्तर से पीआरओ तैनात कर सकते हैं। पीआरओ नहीं होने पर सीनियर डीसीएम मीडिया तक जानकारी पहुंचाने का काम करेगा। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मीडिया तक सूचना पहुंचाने का काम करने वाले सभी अधिकारियों को पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया जाएगा, जिससे अधिकारी खबर लिखकर मीडिया तक पहुंचा सकें। छुट्टी वाले दिन भी संबंधित अधिकारी मीडिया कर्मियों से बात करेंगे और देर रात में होने वाली घटनाओं की सूचना भी पहुंचाएंगे। जिसमें रेलवे का पक्ष मजबूती से रखा जाना चाहिए। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि इस बारे में रेलवे बोर्ड का पत्र मिल गया है।



लग्जरी ट्रेनों में 30% सीटें ही क्यों भर पा रहीं: पार्लियामेंट्री पैनल का रेलवे मिनिस्ट्री से सवाल

लग्जरी ट्रेनों में सिर्फ 30% सीटें ही क्यों भर पा रही हैं। रेलवे से संबंधित पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने रेलवे से इस पर जवाब मांगा है। कमेटी ने ‘पर्यटन एवं तीर्थयात्रा सर्किट’ को लेकर संसद में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया है कि यह ट्रेंड रोकने के लिए रेलवे को कदम उठाने की जरूरत है।

गुरुवार को ही रेलवे ने सलून कोच के लिए की थी मीटिंग

– कमेटी ने यह बात ऐसे वक्त में रखी है, जब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने रेलवे के जरिए टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए संबंधित पक्षों के साथ पहली बार मीटिंग की है।

कमेटी को उम्मीद, रेलवे जांच कराएगा

– रिपोर्ट में कहा गया है, “लग्जरी ट्रेनों में सीटों के खाली रह जाने को मंत्रालय की ओर से गंभीरता से न लिए जाने पर कमेटी ने चिंता जाहिर की है। उम्मीद है कि मंत्रालय इसकी सही ढंग से जांच करेगा और लग्जरी ट्रेनों में सिर्फ 30% तक सीटें भर पाने की वजहों का पता लगाएगा।”

‘हैरान करने वाला है डाटा’

– कमेटी के मुताबिक, इन ट्रेनों में सीटों के भरने का आंकड़ा “हैरान करने वाला” है।

– रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012 से 2017 के बीच महाराजा एक्सप्रेस में 62.7%, गोल्डन चैरियट में 57.76%, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स में 45.46% और डेक्कन ओडिसी में 45.81% सीटें खाली रही हैं।

महाराजा एक्सप्रेस में सिर्फ 30%से 40%सीटें भरीं

– यह कमेटी टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की अगुआई वाली है। रिपोर्ट कहा है कि महाराजा एक्सप्रेस राज्य सरकार की साझेदारी के बगैर पूरी तरह से रेलवे के खर्च पर चलती है। यह बहुत परेशान करने वाला है कि इस ट्रेन में 2012-2013 में सिर्फ 29.86%, 2013-2014 में 32.33%, 2014-2016 में 41.8% और 2016-2017 में 36.03% सीटें भर पाई हैं।

रेलवे पेश कर सकता है बेडरूम-किचन वाले लग्जरी कोच

– रेलवे जल्द ही बेडरूम, किचन, लाउंज और टॉयलेट वाले अपने लग्जरी सलून में आम लोगों को सफर करने का मौका दे सकता है।

– रेलवे के इस प्लान पर दिल्ली में गुरुवार को बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी की ट्रैवल और ट्रेड एसोसिएशन्स के साथ मीटिंग की थी।

– अफसरों से ऐसे दो कोच को टूरिज्म के मकसद से मुहैया कराने का प्लान बनाने को कहा है। इसका मकसद इस तरह के लग्जरी कोच में सफर को प्रमोट करना है।

क्या होते हैं सलून कोच?

– रेलवे के सलून कोच उसके सीनियर अफसरों के लिए होते हैं। वे एक्सीडेंट वाली जगह या दूर-दराज के इलाकों में इंस्पेक्शन पर जाने के लिए इन कोच का इस्तेमाल करते हैं।

– देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं। इनमें से 62 एयरकंडीशंड हैं।

Category: Indian Railways, News

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