रेलवे सिग्नल सिस्टम बनेगा आधुनिक पूर्णत:कंप्यूटरीकृत व्यवस्था एयर ट्रैफिक सिस्टम सरीखी होगी

| January 3, 2018

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रेल डिब्बों की संख्या के संदर्भ में ट्रेनों के मानकीकरण की योजना बना रहा है ताकि सभी ट्रेन सभी रूट पर चल सकें। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी ट्रेनों में 22 डिब्बे होंगे और ये ट्रेनें किसी भी मार्ग पर चल सकेंगी। गोयल ने संवाददाताओं से कहा, सभी ट्रेनों में 22 डिब्बे होंगे, प्लेटफार्म का आकार बढ़ाया जाएगा और दूसरे संबंधित बदलाव भी किए जाएंगे। इंजीनियरिंग विभाग इस पर गौर कर रहा है। फिलहाल ट्रेन के डिब्बे दो तरह- आईसीएफ और एलएचबी होते हैं तथा ट्रेनों में डिब्बों की संख्या जरूरत के हिसाब से 12,16,18, 22 अथवा 26 होती हैं।








भारतीय रेल के एक अधिकारी ने कहा, अगर हर ट्रेन में डिब्बों की संख्या समान होगी तो हम किसी एक ट्रेन का इंतजार करने की बजाय मौके पर उपलब्ध कोई भी ट्रेन रवाना कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पहले चरण में ट्रेनों के 300 से अधिक समूहों और उनके रूट की पहचान की गई है। एक रूट पर ट्रेनों की संख्या में बदलाव और उनका समय नयी समय-सारिणी में उपलब्ध होंगे। नयी समय-सारिणी का प्रकाशन जुलाई में किया जाना है।

नए सिस्टम में लाल, हरे, पीले बल्ब नहीं होंगे, कंप्यूटरों के जरिए ही ट्रेनों पर रखी जाएगी नजर
रेलमंत्री ने कहा, संरक्षा, सुविधा, खानपान और अत्याधुनिक सुविधाएं उनकी प्राथमिकताएंसघन बस्तियों वाले क्षेत्रों में रेलवे लाइनों को चारदीवारी से घेरा जाएगा, रेल मंत्रालय समय पर और सुरक्षित रेल चलाने के लिए अपनी सिग्नल व्यवस्था को आधुनिक बनाने जा रहा है। इस अत्याधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था का संचालन पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत होगा। इस दिशा में रेल मंत्रालय ने काम करना प्रारंभ भी कर दिया है। यह व्यवस्था हवाई यातायात को संचालित करने वाली व्यवस्था एटीएस यानी एयर ट्रैफिक सिस्टम जैसी होगी, जिसमें कई केंद्रीकृत नियंतण्रकक्षों से पूरी हवाई यातायात व्यवस्था की न केवल देख-रेख की जाती है, बल्कि उसे संचालित भी किया जाता है।



रेलमंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यहां पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा कि रेलवे खुशहाल यात्रा के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा हुआ है। संरक्षा, सुविधा, खानपान और अत्याधुनिक सुविधाएं उनकी प्राथमिकताएं हैं और इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर काम चल रहा है। 2022 तक नए इंडिया के साथ नया रेल भी दिखाई देगा। रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को पूरा करने में लगा है। इसके पूरा होते ही मालवाहक गाड़ियां सवारी यातायात वाले ट्रैक से हटा दी जाएंगी। इसके बाद रेलवे को ज्यादा संख्या में सवारी ट्रेनों को ट्रैक पर चलाने का मौका मिलेगा।
उन्होंने बताया कि भारतीय रेल को दुनिया की स्तरीय रेल व्यवस्था जैसी बनाने के लिए मंत्रालय पुराने हो चुके सिग्नल सिस्टम को भी नया करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इस नए सिस्टम में लाल, हरे, पीले बल्बों वाली पुरानी हो चुके सिग्नलिंग सिस्टम की जगह नई पूर्णतया कंप्यूटरीकृत व्यवस्था को लाया जाएगा। इसमें हवाई यातायात व्यवस्था की तरह कंप्यूटरों के जरिए सभी रेल गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी। इससे ट्रैक पर एक के पीछे एक ट्रेनों को संचालित करने के साथ ही लोको पायलट को कंप्यूटरीकृत नियंतण्रकक्ष के साथ जोड़ दिया जाएगा। इससे रेल दुर्घटनाओं को रेाकने में मदद तो मिलेगी ही साथ ही गाड़ियों के परिचालन को भी समय से पूरा किया जा सकेगा।




इसके साथ ही ट्रैक का दोहन भी बढ़िया तरीके से हो सकेगा। गाड़ियों की संख्या को बढ़ाया जा सकेगा, जिससे टिकटों की काला बजारी पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि सघन बस्तियों वाले क्षेत्रों में रेलवे लाइनों को चारदीवारी से घेरने और अन्य स्थानों पर भी लोगों की पहुंच को सीमित करने के उपाय किए जाएंगे। इन उपायों से कोहरे जैसी समस्या से गाड़ियों के परिचालन में बाधाएं भी काफी हद तक दूर हो सकेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तरी भारत में इंजनों में लोकोपायलट को ‘‘फॉग सेफ’ उपकरण दिया गया है, जिससे उन्हें यह पता चल जाता है कि अगला सिग्नल कितनी दूर है।

इसके अलावा लोकोपायलट को गाड़ी की गति को अपने विवेक से तय करने का अधिकार दिया गया है। एक सवाल के जवाब में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने बताया कि ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वॉर्निंग सिस्टम का टेंडर हो गया है और जल्द ही इसकी आपूत्तर्ि शुरू होगी और इसे इंजनों में लगाया जाएगा। पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार करीब 10 से 11 हजार किलोमीटर के छह ट्रंक मागरे पर हाइस्पीड रेलवे शुरू करना चाहती है। इसी के साथ 2030 तक मालवहन क्षमता वर्तमान के 1.1 अरब टन सालाना से बढ़ाकर तीन अरब टन तक लाने का लक्ष्य तय किया गया है, जो द्रुतगामी होगा।

Category: Indian Railways, News

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