रेल का सफर होगा और सुरक्षित, चलती ट्रेन में भी कनेक्ट रहेंगे ड्राइवर

| January 1, 2018

रेलवे अपनी ट्रेनों के ऑपरेशन को और सेफ बनाने के लिए अब मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम यानी (MTRC) लाने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है लेकिन अब रेलवे की कोशिश है कि इससे भीड़भाड़ वाले लगभग 20 हजार किलोमीटर के रेल नेटवर्क पर लगाया जाए। इस पर रेलवे को लगभग 9 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।







सूत्रों का कहना है कि मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम यानी एमटीआरसी लगाने के बाद ट्रेन चला रहा लोको पायलट न सिर्फ अपनी ट्रेन के गार्ड से बल्कि कंट्रोल रूम और स्टेशन मास्टर से भी चलती ट्रेन में बात कर सकेगा। फिलहाल लोको पायलट के पास वॉकी-टॉकी होता है और वह उससे सिर्फ अपनी ट्रेन के गार्ड से ही बात कर पाता है। अगर उसे कुछ सूचना कंट्रोल रूम या स्टेशन मास्टर को देनी होती है तो वह तभी संभव होता है, जबकि ट्रेन स्टेशन में एंट्री कर रही होती है। रेलवे का कहना है कि एमटीआरसी लगने के बाद ट्रेन के लोको पायलट यानी ड्राइवर को अगर कहीं रेल नेटवर्क में गड़बड़ी दिखती है तो वह इस बारे में कंट्रोल रूम या स्टेशन मास्टर को जानकारी दे सकेगा। इससे ट्रेन दुर्घटनाओं को टालने में कामयाबी मिल सकती है। इस तरह का सिस्टम सेमी हाईस्पीड ट्रेनों के लिए भी कारगर होगा।



रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम के तहत अगर किसी ट्रेन के ड्राइवर को कहीं पटरी में क्रैक नजर आता है तो भी उसके लिए स्टेशन मास्टर या कंट्रोल रूम को फौरन जानकारी देना संभव नहीं होता। ऐसे में हादसा रोकने के लिए जो कीमती वक्त होता है, वह बर्बाद हो जाता है। लेकिन नए सिस्टम से फौरन कम्युनिकेशन हो सकेगा। रेलवे का कहना है कि इससे ट्रेनों को वक्त पर चलाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि अगर किसी रूट पर कुछ खराबी है तो इसकी जानकारी फौरन कंट्रोल रूम को मिलेगी, जिससे ट्रेनों को दूसरे रूट पर डायवर्ट भी किया जा सकेगा।



रेलवे सूत्रों के मुताबिक अभी एमटीआरसी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिर्फ ढाई हजार किमी में ही लगाया गया है लेकिन अब इसे 20 हजार किमी के ऐसे रूट पर लगाया जाएगा, जहां ट्रेनों की भीड़ रहती है। रेलवे का कहना है कि इस तरह का सिस्टम यूरोप में भी चलता है। इसके लगाने से ट्रेनों की स्पीड को भी बढ़ाया जा सकेगा और इससे ट्रेन के लोको पायलट और मेंटेनेंस स्टाफ में भी कंट्रोल रूम के जरिए जानकारियों का आदान प्रदान हो सकेगा।

Category: Indian Railways, News

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