Railways closes LARSGESS scheme, wards of Railway Employees won’t get benefit

| December 31, 2017

रेलवे : लार्जेस स्कीम बंद, अब पिता की जगह बेटे को नहीं मिलेगी नौकरी

इंडियनरेलवेज में लिबरलाइज्ड एक्टिव रिटायरमेंट स्कीम फॉर गारंटेड एम्प्लॉयमेंट फॉर सेफ्टी स्टाफ (लार्जेस) को रेल मंत्रालय ने बंद कर दिया है। इससे इंडियन रेलवे के 17 जोन से जुड़े मंडलों में पिता के स्थान पर बेटे को नौकरी नहीं मिल सकेगी। रेलवे बोर्ड ने 29 नवंबर को आदेश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक, उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर मंडल में भी ये योजना बंद हो चुकी हैं।








इंडियन रेलवे में वर्ष 2004 में सेफ्टी से जुड़ी दो कैटेगरी ट्रेन ड्राइवर (लोको पायलट) और ट्रैकमैन पद पर जिनकी नौकरी 20 वर्ष की हो चुकी हो। उनके बेटों को नौकरी देने की घोषणा की थी। इस योजना के तहत पहले रेलकर्मी के 8वीं पास बेटे बाद में 10वीं पास बेटे को नौकरी दी जाने लगी, लेकिन अब ये योजना धीरे-धीरे सभी जोन में बंद कर दी गई है। रेल मंत्रालय के इस फैसले से रेलकर्मियों में रोष व्याप्त है।

इस बारे में एनडब्ल्यूआरईयू के महामंत्री मुकेश माथुर का कहना है कि ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने 28 दिसंबर को दिल्ली में रेलमंत्री पीयूष गोयल से लार्जेस स्कीम को पुन: शुरू करने के बारे में बातचीत की है। रेलमंत्री ने कहा कि जिन जोन में कोर्ट केस नहीं है वहां दुबारा इस योजना को लागू किया जाने का प्रयास किया जाएगा।  राजस्थान में 3000 युवाओं को मिल चुकी है लार्जेस स्कीम में नौकरी, रेलवे फेडरेशन ने दोबारा योजना शुरू करने की मांग की है




आठवीं और 10वीं पास आश्रित को नौकरी
रेल कर्मचारी संगठनों की मांग पर सेफ्टी से जुड़े अन्य 26 कैटेगरी के कर्मचारियों के आश्रितों को भी पिता के स्थान पर नौकरी देने के लिए लार्जेस स्कीम की घोषणा साल 2010 में कर दी गई। इस योजना के तहत पहले रेलकर्मी के 8वीं पास बाद में 10वीं पास आश्रित को नौकरी दी जाने लगी। धीरे-धीरे यह योजना सभी जोन में बंद कर दी गई है। रेल मंत्रालय के इस फैसले से रेलकर्मियों में रोष है। लॉर्जेस स्कीम में यह शर्त थी कि कर्मचारी की उम्र 50 से 57 वर्ष हो और नौकरी के 20 वर्ष पूरे हो चुके हों।
ये था योजना का उद्देश्य
रेलवे में पूर्व में ग्रुप डी कोटे में कर्मचारी बिना पढ़े-लिखे, कम पढ़े-लिखे भी नौकरी पर लग जाते थे, लेकिन गैंगमैन, ट्रैकमैन व खलासी के पद पर बिना आधुनिक उपकरणों के कठिन परिश्रम करना पड़ता था। इससे कर्मचारी उम्र कम होने के बावजूद थका-थका सा महसूस करता था। उनकी कार्यक्षमता घट जाती थी।




विपरीत हुआ असर
रिक्त पदों पर कम कैपेबल कर्मचारियों के काम करने के चलते रेलवे में दुर्घटनाएं होने लगी थीं। ऐसे में रेलवे ने पिता के स्थान पर बेट को नौकरी देने का फैसला किया। इसके लिए योजना बनाकर शर्तें-नियम बनाए गए, जिससे रेलवे में युवा आए।
रेल मंत्री ने दिया आश्वासन
ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने 28 दिसंबर को दिल्ली में रेलमंत्री पीयूष गोयल से लार्जेस स्कीम को पुन: शुरू करने के बारे में बातचीत की है। रेलमंत्री ने कहा कि जिन जोन में कोर्ट केस नहीं चल रहे हैं, किसी तरह का कोर्ट स्टे नहीं हैं, वहां दुबारा इस योजना को लागू किए जाने का प्रयास किया जाएगा ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। मुकेश माथुर, महामंत्री, एनडब्ल्यूआरईयू
योजना का फायदा :
अब तक इंडियन रेलवे में इस तरह लगे हुए कर्मचारियों की संख्या लगभग 35 हजार।
रेलवे के जयपुर, जोधपुर, अजमेर, और बीकानेर मंडल में भी लगभग 3000 को मिल चुकी है नौकरी।
जयपुर मंडल में लगभग 500 युवा लग चुके हैं नौकरी पर।

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.