रेलवे ट्रैक के मेंटीनेंस स्टाफ की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता घटाई

| December 29, 2017

रेलवे ट्रैक के मेंटीनेंस स्टाफ की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता घटाई

रेलवे ट्रैक की देखभाल करने वाले स्टाफ की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को रेल मंत्रलय ने पहले की तरह से कर दिया है। इसे लेकर जो प्रयोग किया गया था, उसके नकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। रेल मंत्रलय ने योजना बनाई थी कि रेलवे लाइनों की देखभाल के लिए योग्य स्टाफ की भर्ती की जाए, लेकिन यह पैतरा महकमे को भारी पड़ रहा है। मेंटीनेंस स्टाफ में ऐसे युवक आ रहे हैं, जिनकी योग्यता एमबीए व बीई तक है। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि ये लोग रेलवे ट्रैक का मुआयना करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और इसी वजह से रेलों के संचालन में परेशानियां खड़ी हो रही हैं।








लिहाजा रेलवे ने मेंटीनेंस स्टाफ के लिए पहले वाली योग्यता के आधार पर भर्ती करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि मेंटीनेंस स्टाफ की योग्यता पहले 8वीं थी, लेकिन फिर इसे बदलकर 10वीं और फिर आइटीआइ कर दिया गया।1नई दिल्ली, प्रेट्र : रेलवे ट्रैक की देखभाल करने वाले स्टाफ की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को रेल मंत्रलय ने पहले की तरह से कर दिया है। इसे लेकर जो प्रयोग किया गया था, उसके नकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।




रेल मंत्रलय ने योजना बनाई थी कि रेलवे लाइनों की देखभाल के लिए योग्य स्टाफ की भर्ती की जाए, लेकिन यह पैतरा महकमे को भारी पड़ रहा है। मेंटीनेंस स्टाफ में ऐसे युवक आ रहे हैं, जिनकी योग्यता एमबीए व बीई तक है। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि ये लोग रेलवे ट्रैक का मुआयना करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और इसी वजह से रेलों के संचालन में परेशानियां खड़ी हो रही हैं। लिहाजा रेलवे ने मेंटीनेंस स्टाफ के लिए पहले वाली योग्यता के आधार पर भर्ती करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि मेंटीनेंस स्टाफ की योग्यता पहले 8वीं थी, लेकिन फिर इसे बदलकर 10वीं और फिर आइटीआइ कर दिया गया।




तत्काल टिकटों की हेराफेरी करने वाले प्रोग्रामर का देशभर में नेटवर्क

रेलवे के तत्काल टिकटों की बुकिंग में सेंध के लिए गैरकानूनी सॉफ्टवेयर बनाने वाले सीबीआइ के असिस्टेंट प्रोग्रामर अजय गर्ग और उसके सहयोगी अनिल गुप्ता का पूरे देश में नेटवर्क था। दोनों को सीबीआइ ने बुधवार को गिरफ्तार किया था।1सूत्रों ने बताया कि दोनों से पूछताछ के जरिये अब तक ऐसे 10 ट्रैवल एजेंटों की पहचान हुई है जो इस नेटवर्क का हिस्सा थे। पूछताछ में अभी और ट्रैवल एजेंटों के नाम भी सामने आ रहे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस सॉफ्टवेयर का वर्तमान संस्करण करीब एक साल पहले बनाया गया था।

सीबीआइ की अब तक की जांच के मुताबिक, अजय गर्ग (35) चयन प्रक्रिया के जरिये 2012 में सीबीआइ में भर्ती हुआ था। इससे पहले वह 2007 से 2011 तक इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आइआरसीटीसी) में काम कर चुका था। इसी दौरान उसे आइआरसीटीसी के टिकटिंग सिस्टम में खामियों का पता चला, जिसका उसने अपने सॉफ्टवेयर के जरिये पूरा फायदा उठाया। सीबीआइ अधिकारियों ने बताया कि आइआरसीटीसी के टिकटिंग सिस्टम में ये खामियां अभी तक मौजूद हैं। इसी वजह से उसके सॉफ्टवेयर के जरिये एक बार में सैकड़ों टिकट बुक हो जाते थे। यह टिकट असली होते थे और उनका भुगतान रेलवे को ही जाता था।

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.