वेतन-भत्ते में वृद्धि नहीं होने से सांसद नाराज

| December 23, 2017

नई दिल्ली : माननीयों ने अपने वेतन-भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव पर अभी तक कोई फैसला नहीं होने पर नाराजगी जताई है। साथ ही राज्यसभा में सरकार पर मीडिया के डर से सांसदों के वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को लागू नहीं करने का आरोप लगाया।1न्यायाधीशों का वेतन बढ़ाने के लिए संसद में लाए गए विधेयक के बहाने माननीयों ने एक बार फिर लंबे अर्से से लंबित अपने वेतन-भत्ते का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि बीते सात-आठ साल में सांसदों के वेतन-भत्ते में कोई इजाफा नहीं हुआ है। सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद भी सांसदों के वेतन वृद्धि पर फैसला नहीं लिया जा रहा।








वेतन-भत्ते में इजाफे की सपा सांसद की मांग का विपक्ष ही नहीं सत्तापक्ष के भी तमाम सांसदों ने पूरा समर्थन किया। न्यायाधीशों के वेतन में इजाफे के लिए लाए गए विधेयक का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि न्यायिक पारदर्शिता के लिए न्यायाधीशों की तनख्वाह में वृद्धि की जानी चाहिए। मगर सांसदों के वेतन वृद्धि की भी अनदेखी नहीं की जाना चाहिए। सभापति वेंकैया नायडू से इस मामले में दखल की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस बात से डर कर सांसदों का वेतन नहीं बढ़ा रही है कि मीडिया इस पर सवाल उठाएगा।




संप्रग के समय में आखिरी बार सांसदों का वेतन और भत्ता बढ़ाया गया था। 16वीं लोकसभा के गठन के एक साल बाद से ही माननीयों ने वेतन वृद्धि की मांग शुरू की। सरकार की हामी के बाद तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सांसदों की समिति बनाई गई। इस समिति ने वेतन भत्ते में वृद्धि की सिफारिश करते हुए कैबिनेट सचिव के वेतन से एक रुपया ज्यादा रखने का सुझाव दिया। सरकार भी सैद्धांतिक रूप से माननीयों के वेतन वृद्धि की सिफारिशों के खिलाफ नहीं है, मगर पिछले बजट सत्र से ही निर्णय टलता आ रहा है।




सांसदों का वेतन बढ़ाने के लिए सरकार को संसद में विधेयक लाना होगा। मगर, शीतकालीन सत्र में इसकी कोई गुंजाइश नहीं दिख रही, इसीलिए नरेश अग्रवाल की मांग का सभी दलों के सांसदों ने समर्थन किया। सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि यह अहम मसला है, इसीलिए सदस्यों की इस भावना से सदन के नेता वित्त मंत्री अरुण जेटली को वह अवगत कराएंगे।

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