भारतीय रेलवे के अच्छे दिन आने वाले हैं, 2 बड़ी परियोजनाएं

| December 16, 2017

भारतीय रेलवे पर इन दिनों दो बड़ी परियोजनाएं चल रहीं हैं। इस परियोजनाओं से रेलवे का चेहरा तो बदलेगा ही, साथ ही विकास को भी एक चेहरा मिलेगा। इनमें से एक है हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) और दूसरी परियोजना है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी)। पहली परियोजना के तमाम हानि-लाभ गिनाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी परियोजना यानी डीएफसी के केवल लाभ ही लाभ हैं। पेश है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर दामोदर व्यास की विशेष रिपोर्ट…









एक जमाना था, जब जेएनपीटी पोर्ट से 30 प्रतिशत माल रेलवे द्वारा ढोया जाता था। वक्त के साथ भारतीय रेलवे में माल से होने वाली कमाई में गिरावट आई। आज जेएनपीटी की क्षमता दोगुनी होने के बावजूद रेलवे द्वारा केवल 14 फीसदी माल ही उठाया जा रहा है। बाकी 86 फीसदी माल रोड ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंचाया जाता है, लेकिन कुछ सालों में तस्वीर पूरी तरह से बदलने वाली है। भारतीय रेलवे का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश में माल वहन का चेहरा बदल देगा। इस कॉरिडोर पर जब 100 किमी प्रतिघंटा की गति से 1.5 किमी डबल डेकर मालगाड़ी सन्नाटे से दौड़ेगी, तब लगेगा विकास हो रहा है।

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डीएफसी का इतिहास
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के कार्यकाल में भारतीय रेलवे पर माल वहन के लिए अलग से कॉरिडोर बनाने की संकल्पना हुई थी। वर्ष 30 अक्टूबर, 2006 को कंपनीज ऐक्ट के तहत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआई) का गठन हुआ। वर्ष 2007-12 की पंचवर्षीय योजना में इस परियोजना को शामिल किया गया। इसके तहत वेस्टर्न डीएफसी और ईस्टर्न डीएफसी कुल 3,360 किमी लंबा फ्रेट कॉरिडोर (माल गाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक) प्रस्तावित हुआ। ईस्टर्न डीएफसी लुधियाना (पंजाब) से दानकुनी (प.बंगाल) तक 1,760 किमी लंबा और वेस्टर्न डीएफसी महाराष्ट्र के जेएनपीटी से दादरी (उत्तर प्रदेश) तक 1,504 किमी लंबा कॉरिडोर होगा।




तीन गुना तेज होगी रफ्तार
भारतीय रेलवे में अभी भी माल गाड़ियों के लिए समय सारिणी तो बनती है, लेकिन 90 प्रतिशत ट्रेनें तयशुदा वक्त पर नहीं चल पाती हैं। इन माल गाड़ियों को मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के बीच-बीच में चलाकर किसी तरह चलाया जाता है। मौजूदा स्थिति यह है कि मालगाड़ी 30-35 किमी प्रतिघंटे की औसत गति से चलती है। डीएफसी बनने के बाद 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बिना रोक टोक मालगाड़ी गंतव्य स्थान तक पहुंच सकेगी। आज की परिस्थिति में जेएनपीटी से दादरी पहुंचने के लिए मालगाड़ी को 3 दिन लगते हैं, डीएफसी के बाद अधिकतम 24 घंटे में ट्रेनें पहुंच जाएंगी। डीएफसी बनने के साथ ही मुंबई से दिल्ली तक कुल 88 लेवल क्रॉसिंग बंद हो जाएंगी, जिसका लाभ मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को भी मिलेगा। लेवल क्रॉसिंग बंद होने से मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की टाइमिंग भी बढ़ेगी।

हाईस्पीड ट्रेन चलाने की संभावना

हालांकि, डीएफसी पूरी तरह से माल गाड़ियों के लिए ही बनाया जा रहा है, लेकिन ‘राजनीतिक’ प्रभाव से यहां पर हाईस्पीड ट्रेन भी चलाई जा सकती है। डीएफसी पर बिछाई जाने वाली रेल (पटरी) 32.5 टन एक्सेल लोड ले सकता है, जबकि मौजूदा ट्रैक की क्षमता 25 टन है। जितनी एक्सेल लोड लेने की क्षमता, उतना ही मजबूत ट्रैक। सूत्रों के मुताबिक यह विश्व का आधुनिकतम रेलवे ट्रैक होगा, जिस पर 320 प्रतिघंटा से हाईस्पीड ट्रेन आराम से चलाई जा सकती है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हाईस्पीड ट्रेन चलाना कोई बड़ी बात नहीं है। ट्रैक में जितने कम मोड़ और उतार-चढ़ाव होंगे, उतना ही तेज गति के लिए उपयुक्त होगा। इन दोनों मानकों पर वेस्टर्न डीएफसी खरा उतरता है।





बुलेट से पहले डीएफसी
मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के लिए भी काम शुरू हो चुका है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है और महाराष्ट्र के अधिकतम हिस्से में बात अटक रही है। बुलेट ट्रेन प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है, और महाराष्ट्र में क्षेत्रीय दल भूमि अधिग्रहण के दौरान परेशानियां पैदा कर सकते हैं। जबकि, डीएफसी के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र में कुल 250 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना था, इसमें से 241 हेक्टेयर निजी क्षेत्र की जमीन है। इस परियोजना में ही 3,215 परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। 2011-12 में किए गए जॉइंट मेजरमेंट सर्वे के आधार पर परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के लोगों का पुनर्स्थापन होना है। जबकि, बुलेट ट्रेन में (महाराष्ट्र क्षेत्र) में कई परेशानियां सामने आ रही हैं। एक अधिकारी के मुताबिक 2019 तक डीएफसी का प्रथम चरण (941 किमी) अटेली-मेहसाणा तक शुरू कर दिया जाएगा।

बदल जाएगी माल गाड़ी

मौजूदा माल गाड़ी में प्रत्येक कंटेनर की लंबाई 4.265 मीटर है, जबकि डीएफसी में प्रत्येक कंटेनर की लंबाई 5.1 मीटर होगी। एक के ऊपर एक कंटेनर होंगे, यानी डबल स्टेक और एक्सेल की चौड़ाई 3,200 मीटर से बढ़कर 3,660 मीटर हो जाएगी। अभी माल गाड़ी की अधिकतम लंबाई 700 मीटर होती है, जो बढ़कर 1500 मीटर यानी डेढ़ किमी हो जाएगी। प्रत्येक माल गाड़ी से माल ढुलाई की क्षमता 4,000 टन की बजाय 13,000 टन हो जाएगी।

वेस्टर्न डीएफसी
430 किमी: जेएनपीटी से वडोदरा

947 किमी: वडोदरा से रेवाड़ी

127 किमी: दादरी से रेवाड़ी

Category: Indian Railways, News

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