जून तक सभी रेल आवासों में लगेगी एलईडी

| December 14, 2017

रेलवे अपने कर्मचारियों के बाद सर्वाधिक खर्च बिजली के क्षेत्र में करती है। यात्री टेन और मालगाड़ियों के परिचालन से जुड़े टैक्शन को छोड़कर नॉन टैक्शन ऊर्जा में सालाना तकरीबन 50 करोड़ रुपये का बोझ रेलवे पर पड़ता है। इस रकम में रेलवे के दफ्तरों के साथ-साथ अधिकारी के बंगले और कर्मचारी आवास भी शामिल हैं। भविष्य में इस खर्च को कम करने के लिए रेलवे ने एनर्जी इफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के साथ एमओयू किया है।








इसके तहत पहले चरण में ए श्रेणी के सभी रेलवे स्टेशनों पर लगी लाइट को एलईडी में बदला जाएगा। जून 2018 तक रेल मंडल के 16511 रेल आवासों में भी यह व्यवस्था बहाल होगी। 1वरीय मंडल विद्युत अभियंता सामान्य दिनेश साह के अनुसार, ईईएसएल ऊर्जा मंत्रलय का सेट अप है जिसका काम अधिक खपत वाले विद्युत उपकरणों को कम खपत वाले उपकरणों में बदलना है।




इस प्रक्रिया में रेलवे को किसी तरह का व्यय नहीं करना होगा बल्कि बिजली की खपत से होनेवाली बचत की रकम किस्तों में कंपनी के खाते में जाएगी।1ईईएसएल के राजेश झा के साथ एमओयू करते सीनियर डीईईजी दिनेश साहकम हल्की होगी जेब, रेलकर्मियों को चुकाना होगा कम बिजली बिल1एलईडी लगने से जहां रेलवे का खर्च कम होगा वहीं कर्मचारियों की जेब भी कम हल्की होगी। प्रति माह का बिजली बिल कम चुकाना होगा। रेलवे का मानना है कि इससे 25 फीसद कम बिल चुकाना होगा।




डीआरएम कार्यालय की छत पर लगेंगे सोलर पैनल1धनबाद में स्थित डीआरएम कार्यालय की छत पर सोलर पैनल लगाने की भी योजना है। इसमें लगभग एक करोड़ खर्च होगा। कंट्रोल को छोड़कर सोलर पैनल से ही पूरे बिल्डिंग को बिजली मिलेगी। संबंधित प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। मुहर लगते ही प्रक्रिया शुरू होगी।1चालक-गार्ड को सोलर पैनल से मिल रहा गर्म पानी1धनबाद स्थित रनिंग रूम की छत पर चार सोलर पैनल लगाए गए हैं। इसका उपयोग फिलहाल रनिंग रूम में ठहरने वाले रेलवे के चालक और गार्ड को गर्म पानी उपलब्ध कराने में किया जा रहा है। पहले इसके लिए विद्युत खपत होती थी। अब दिन में चार्ज होने सोलर पैनल से यह सुविधा मिल रही है।

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Category: Indian Railways, News

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