रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने अफसरों को जिम्मेदारी लेने की नसीहत दी

| December 13, 2017

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने सभी महाप्रबंधकों तथा मंडलीय प्रबंधकों से संरक्षा संबंधी मामलों में व्यक्तिगत तौर पर रुचि लेने तथा खामियों को निर्धारित समय के भीतर दूर करने को कहा है। उन्होंने उत्साही अधिकारियों को नए प्रयोगों की छूट देने में आनाकानी करने के खिलाफ भी जीएम व डीआरएम को आगाह किया है।1जीएम तथा डीआरएम को लिखी चिट्ठी में लोहानी ने कहा है कि रेलवे में संरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कई स्तरों पर निगरानी व जांच की व्यवस्था की है। इसके अलावा संरक्षा विभाग अलग से इनके कार्यो की अपने स्तर पर सुपर जांच करता है।








इसके तहत समय-समय पर औचक निरीक्षण, संरक्षा ऑडिट तथा संयुक्त निरीक्षण की कार्रवाइयां की जाती हैं। इसके अलावा संरक्षा विभाग रेलवे बोर्ड की ओर से जारी विभिन्न नियमों तथा दिशा-ों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी करता है। जहां कहीं कमियां होती हैं, उनकी ओर इशारा करते हुए उन्हें दूर करने की ताकीद करता रहता है। इसके लिए इस साल मार्च से एक वेब आधारित सेफ्टी इंफारमेशन मैनेजमेंट सिस्टम (सिम्स) का इस्तेमाल शुरू किया गया था। इसमें ट्रेन संचालन से जुड़े विभिन्न विभागों में पाई जाने वाली संरक्षा संबंधी खामियों का ब्योरा दर्ज किया जाता है।




सिम्स ने इस साल मार्च से 14 नवंबर तक की अवधि में संपूर्ण भारतीय रेलवे में कुल मिलाकर 5070 खामियां उजागर कीं। लेकिन इनमें से केवल 70 फीसद खामियों को दूर करने के लिए कदम उठाए गए। कई जोनों ने इससे भी कम खामियां दूर कीं। यही नहीं, लगभग पांच फीसद खामियां ऐसी थीं, जिन्हें तीन महीने बाद भी दूर नहीं किया गया था। यह स्थिति तब है जब रेलवे बोर्ड ने इससे पहले 28 जनवरी 2015 को ही विभागों को पत्र के जरिए ताकीद की थी कि संरक्षा से जुड़े सभी मामलों में मुख्य संरक्षा अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर खामियों को समय रहते दूर किया जाना आवश्यक है।




बोर्ड ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर तुरंत कदम उठाने को कहा था। 1जीएम व डीआरएम को लिखे एक दूसरे पत्र में लोहानी ने उनसे घिसा-पिटा रवैया छोड़ मातहत अफसरों को नए प्रयोगों की छूट देने के लिए प्रेरित किया है। लोहानी ने लिखा है, ‘मैने पाया है कि हमारे अधिकारी नियम-कानूनों के डर से नए विचारों अथवा प्रयोगों को आगे बढ़ाने से कतराते हैं। यह रवैया सही नहीं है। फील्ड अफसरों को नए विचार को अपनाने तथा उन्हें मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि प्रयोग रेलवे के व्यवसाय को बढ़ाने वाला है तो नियमों के बावजूद उसे बढ़ावा देने का साहस जुटाना होगा।’’>>नए विचारों व प्रयोगों के लिए साहसिक निर्णय लेने को कहा1’>>अश्वनी लोहानी ने जीएम और डीआरएम को लिखी चिट्ठी

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Category: Indian Railways, News

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