अगले साल बंपर जॉब्स, सैलरी में उछाल: सर्वे

| December 12, 2017

साल 2018 जॉब्स और सैलरी बढ़ोतरी के मोर्चे पर काफी खुशगवार हो सकता है। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जहां साल 2018 में कंपनियों में छंटनी नहीं होगी और भर्तियों के ज्यादा मौके होंगे, वहीं कर्मचारियों की सैलरी में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। अगले साल स्किल्ड लेबर यानी मार्केट में पेशेवरों की डिमांड में इजाफा हो सकता है। कंपनियों की विस्तार योजना के कारण पेशेवरों की भर्तियों में इजाफा हो सकता है, इस कारण इनकी डिमांड में तेजी आने की उम्मीद है। डिमांड बढ़ने पर सैलरी पैकेज में भी इजाफा हो सकता है। सर्वे के अनुसार मोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्ट-अप्स में ज्यादा अवसर की उम्मीद है। इसके अलावा फार्मा और रिटेल सेक्टर में जॉब्स के ज्यादा अवसर मार्केट में आ सकते हैं।







यूथ फॉर वर्क की रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में शामिल कंपनियों ने इस बात को माना है कि वे अगले साल अपने कारोबार का विस्तार करेंगी। ऐसे में ज्यादा मैनपावर की जरूरत होगी। कंपनियों का कहना है कि आर्थिक गिरावट को दौर खत्म हो चुका है।

दिल्ली, महाराष्ट्र को तरजीह : सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि स्किल्ड मैनपावर की डिमांड बढ़ने से दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक के युवाओं को सबसे अधिक फायदा होगा, क्योंकि यहां के युवाओं ने अपने स्किल को बढ़ाया है।




नोटबंदी, जीएसटी का असर खत्म: इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम के डायरेक्टर जनरल डीएस रावत का कहना है कि 2018 में काफी कुछ नया देखने को मिलेगा। नोटबंदी और जीएसटी का नेगेटिव असर खत्म हो चुका होगा। इकोनामी भी स्पीड पकड़ चुकी होगी।

देश में लगभग सैकड़ों इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लगने की शंका के बीच स्विट्जरलैंड की स्किल शेयरिंग संस्थाओं ने इन्हें उबारने का प्लान बनाया है। ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के रडार पर डेढ़ सौ से ज्यादा इंजिनियरिंग कॉलेज बंदी के कगार पर हैं। हर साल लगभग 125 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो जाते हैं। असल में उनमें पढ़ने वाले इंडस्ट्री के लिए नाकाबिल समझे जाते हैं। स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत स्विट्जरलैंड ने भारत में स्किल शेयरिंग में दिलचस्पी दिखाई थी।




बता दें कि स्विट्जरलैंड दुनिया की सबसे प्रतियोगी इकॉनमी में शुमार की जाती है और इसके लिए वहां की कौशल क्षमता और उद्यमिता को श्रेय दिया जाता है। स्विस संस्थाओं के सहयोग से भारत में स्किल शेयर करने में जुटी कंपनी स्किलसोनिक्स के स्विस चेयरमैन फ्रांज़ प्रॉबस्त कहते हैं कि हमारे यहां स्किल हाई क्वॉलिटी होने के कारण महंगी है, लेकिन स्विस संस्थाओं ने स्किल गैप को देखते हुए कोर्स पैकेज को भारत के हिसाब से तैयार किया है। स्किलसोनिक्स ने भारत में अगले 5 साल में ढाई लाख लोगों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फोकस इंजीनियरिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स पर रहेगा।

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