रेलवे के दावे हुए फेल, देरी से दौड़ रहीं गाड़ियां

| December 6, 2017

कोहरे ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार गिरावट आने के साथ ही आने वाले दिनों में कोहरा और भी घना होगा। इस साल कोहरे में ट्रेनों में सफर करना किसी सजा से कम नहीं होगा। ट्रेनें लगातार लेट हो रहीं हैं। कोहरे से लड़ने के लिए रेलवे की ओर से खूब दावे किए गए थे, लेकिन सब धरे के धरे रह गए। हर साल की तरह ट्रेनें कैंसिल कर कोहरे में ट्रैफिक का बोझ कम किया गया है। हालांकि पिछले दो दिनों में टेनों के संचालन में कुछ सुधार हुआ है।








इसके साथ ही मंडल में कई स्थानों पर घना कोहरा रिकार्ड किया गया है। 1मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कोहरा घना होने की भविष्यवाणी की जा रही है। कोहरा न होने पर ही ट्रेनें एक-एक दिन की देरी से चल रहीं थीं। मुरादाबाद मंडल से प्रतिदिन 200 से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं। इन ट्रेनों में मंडल से लाखों यात्री सफर करते हैं। ठंड के दिनों में अधिकांश ट्रेनें लेट होती हैं। सितंबर से ही रेलवे प्रशासन कोहरे से लड़ने की तैयारी शुरू कर देता है। मंडल भर में फॉग हट सक्रिय कर दिए जाते हैं। इसके साथ ही रात में कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी जाती है। डेटोनेटर का कोटा भी फुल कर लिया जाता है।




इसके बावजूद ट्रेनों का संचालन समय से नहीं हो पाता। 1तकनीकी हुई फेल, पुराने र्ढे पर चल रहीं गाड़ियां : कोहरे से निपटने के लिए रेलवे ने इस बार फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाने का दावा किया था। इस बार के डिवाइस को जीपीआरएस सिस्टम से जोड़ने की बात कही गई। बताया गया कि डिवाइस में मंडल का पूरा मैप फीड कर दिया गया है और वह सिग्नल आने से पहले ही सूचना दे देगा। ऐसे में कोहरा होने पर भी ड्राइवर डिवाइस की मदद से गाड़ियों का सही रफ्तार से चलाकर समय से पहुंच सकेंगे। लेकिन कोहरा में सारे इंतजाम फेल हो गए। तकनीकी किसी काम की नहीं रही। अब ट्रेनों को डेटोनेटर के सहारे पुराने र्ढे पर चलाया जा रहा है। 1अधिकारी भी चल रहे साथ, पर ड्राइवर नहीं दिखा पा रहे हिम्मत : लोको पायलट को फॉग डिवाइस के जरिए ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन अधिकांश ड्राइवर हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे में उनको हिम्मत देने के लिए अधिकारियों को उनके साथ फुट प्लेट करने के आदेश हुए थे।




अधिकारी कोहरे की रात में उनके साथ चलें, लेकिन लोको पायलट डिवाइस के भरोसे ट्रेनों को दौड़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। 1घटाई गया डेटोनेटर का भंडारण : कोहरे में ड्राइवर सिग्नल देख नहीं पाते। ऐसे में वे बेहद कम रफ्तार से ट्रेन चलाते हैं। इनको सिग्नल की जानकारी देने के लिए डेटोनेटर का प्रयोग किया जाता है। इस साल फॉग डिवाइस की भरोसे पिछले सालों की तुलना में डेटोनेटर का भंडारण कम किया गया है, लेकिन डिवाइस पर भरोसा कायम नहीं हुआ और डेटोनेटर के भरोसे ही ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

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Category: Indian Railways, News

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