रेलवे ने टीटीई को माना फ्रंटलाइन स्टॉफ अपने मोबाइल कनेक्शन सीयूजी नेटवर्क से जोड़ा

| December 2, 2017

टीटीई ट्रेन में टिकट चेकिंग के साथ-साथ देंगे दुर्घटना, आगजनी और चोरी की सूचना

रेलवे ने ट्रेनों में हो रही गतिविधियों पर नजर रखने और उससे संबंधित सूचना हासिल करने के लिए चल टिकट परीक्षक (टीटीई) को प्रहरी की भी भूमिका दे दी है। रेलवे ने टीटीई को अपना फ्रंटलाइन स्टॉफ मानते हुए उन्हें मोबाइल कनेक्शन देकर अपने सीयूजी नेटवर्क पर ले लिया है। सीयूजी नेटवर्क पर आने के बाद अब टीटीई टिकट चेकिंग के साथ-साथ आपात स्थिति में रेल नेटवर्क पर सूचनाएं भी देंगे, जिससे रेलवे और रेलयात्रियों की मदद हो सकेगी।








खासकर ट्रेन दुर्घटना, आगजनी और चोरी होने की स्थिति में वे प्रहरी रूप में मदद करेंगे। रेलवे अपने नेटवर्क पर रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनों का परिचालन करता है। इनमें से लोकल ट्रेनों को छोड़ दें तो सभी राजधानी, शताब्दी, दूरंतो, मेल एक्सप्रेस और अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में करीब 40 लाख यात्री रोजाना सफर करते हैं। साथ ही 13 लाख ऐसे रेलयात्री हैं, जो कि आरक्षित बर्थों और सीटों पर सफर करते हैं। इन ट्रेनों में रोजाना करीबन आठ हजार टीटीई टिकट चेकिंग के लिए चलते हैं।




अभी तक इनकी मुख्य भूमिका टिकट चेक करने के साथ-साथ अनधिकृत रूप से सफर करने वाले यात्रियों से किराया और पेनाल्टी वसूलना होता है। इनके अलावा कभी-कभी अपरिहार्य स्थिति में यात्रियों के साथ र्दुव्‍यवहार होने अथवा उनका सामान चोरी होने की स्थिति में सुरक्षा सहायता दिला देते हैं। हालांकि ढेर सारे ट्रेनों में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दस्ते (स्क्वायड) भी चलते हैं, लेकिन उनकी संख्या पर्याप्त नहीं होती है।




रेलवे बोर्ड के नये आदेश के अनुसार ट्रेन दुर्घटना, आग, चोरी के अलावा बीमार यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा दिलाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा ट्रेनों में बच्चों की तस्करी और सुरक्षा संबंधित पहलुओं पर ध्यान रखेंगे।

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Category: Indian Railways, News

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