आरडीएसओ के पूर्व डीजी समेत 13 के खिलाफ एफआईआर

| December 2, 2017

लखनऊ : रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण में इस्तेमाल होने वाले कॉपर वायर की सप्लाई में घोटाले के आरोप में सीबीआई ने आरडीएसओ के तत्कालीन डीजी, राइट्स और कोर के आठ अफसरों और चार निजी फर्मों के खिलाफ केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीमों ने इनके लखनऊ, नोएडा, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, सोनीपत, फरीदाबाद, कपूरथला और वाराणसी स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इनके यहां से बड़े पैमाने पर बैंक खातों और संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। उनकी पड़ताल हो रही है।







सीबीआई ने इस गड़बड़झाले की आरंभिक जांच की थी। जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद गुरुवार को सीबीआई की एसीबी ने केस दर्ज किया। वर्ष 2005 से 2016 के बीच हुए इस घोटाले में रेलवे को करीब पौने आठ करोड़ रुपये की चपत फर्जी बिलों के जरिए लगाई गई। रेलवे को जो एचडीजीसी (हार्ड ड्रॉन ग्रूव्ड कॉपर कॉन्टेक्ट वायर) सप्लाई हुआ, वह घटिया स्तर का था। आईआईटी कानपुर की जांच में यह बात सामने आई कि वायर आरडीएसओ द्वारा तय मानकों पर खरा नहीं था। इसके बावजूद सप्लाई करने वाली फर्मों ने आरडीएसओ, राइट्स इंडिया लिमिटेड और कोर (सेंट्रल रेलवे ऑर्गनाइजेशन फॉर रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन) के अफसरों की मिलीभगत से इन वॉयर की सप्लाई की। फर्जी बिलों के जरिए करीब पौने आठ करोड़ का भुगतान भी ज्यादा करवाया।




सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक एचडीजीसी वायर रेलवे ट्रैक में ओवरहेड इलेक्ट्रिक सप्लाई में इस्तेमाल होता है। राइट्स इंडिया लिमिटेड, कोर इलाहाबाद और आरडीएसओ लखनऊ ने चार फर्मों चंद्रा मेटल्स इलाहाबाद, श्रीराम केबल्स, जेके केबल्स और ओम साईं उद्योग लिमिटेड को इसकी आपूर्ति का काम सौंपा था। आरडीएसओ की अप्रूव फर्मों को ही सप्लाई का ठेका मिलता है। आरडीएसओ के मानकों के मुताबिक ही सीसीसी वायर रॉड्स से एचडीजीसी कॉन्टेक्ट वायर तैयार किया जाता है। लेकिन, निजी फर्मों ने सीसीसी कॉन्टेक्ट वायर उन

इन पर दर्ज किया गया केस

तत्कालीन डीजी आरडीएसओ प्रमोद कृष्ण श्रीवास्तव (रिटायर्ड), अजय कुमार लाल श्रीवास्तव (सीनियर असिस्टेंट फायनेंस एडवाइजर, कोर इलाहाबाद), एनएच अंसारी (सेक्शन अफसर, एकाउंट्स सेक्शन कोर इलाहाबाद), सुनील कुमार पांडा (इंस्पेक्टिंग इंजिनियर, राइट्स), रनवीर सिंह (सीनियर सेक्शन इंजिनियर राइट्स लिमिटेड), संजीव कुमार श्रीवास्तव (इंस्पेक्टिंग इंजिनियर इलेक्ट्रिक क्वालिटी एश्योरेंस, राइट्स),




अभिषेक डीजीएम (राइट्स लिमिटेड), संतोष कुमार चकरवाल (असिस्टेंट मैनेजर, क्वालिटी एश्योरेंस, राइट्स), राजेश कुमार चौरसिया (इंस्पेक्शन मैनेजर, राइट्स), ओम साईं उद्योग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अर्चित शर्मा और अंकित शर्मा, चंद्रा मेटल लिमिटेड के डायरेक्टर अनहिलेश गुप्ता, रंजीत गुप्ता, जेके केसरवानी, जेके केबल्स के डायरेक्टर जेके चुग, कुनाल चुग, कपिल चुग, श्रीराम केबल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अनिल गर्ग, सुनील गर्ग और भाई सतीश गर्ग।•एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ : रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण में इस्तेमाल होने वाले कॉपर वायर की सप्लाई में घोटाले के आरोप में सीबीआई ने आरडीएसओ के तत्कालीन डीजी, राइट्स और कोर के आठ अफसरों और चार निजी फर्मों के खिलाफ केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीमों ने इनके लखनऊ, नोएडा, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, सोनीपत, फरीदाबाद, कपूरथला और वाराणसी स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इनके यहां से बड़े पैमाने पर बैंक खातों और संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। उनकी पड़ताल हो रही है।

Category: Indian Railways, News

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