केंद्र के सचिवों से भी कम वेतन पाते हैं राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

| November 21, 2017

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से बढ़ा अधिकारियों का वेतन, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति का वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार के पास लंबित, साल भर पहले भेजा गया था मसौदा









राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को देश के प्रमुख नौकरशाहों और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के मुकाबले कम वेतन मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि करीब दो साल पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद विषमताओं को दूर करने के लिए कानून में अब तक संशोधन नहीं हुआ है। गृह मंत्रलय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रलय ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों का वेतन बढ़ाने का एक प्रस्ताव करीब सालभर पहले मंजूरी के लिए कैबिनेट सचिवालय को भेजा था। नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।








सरकार के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि गृह मंत्रलय के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने में देरी की वजह क्या है, तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अधिकारी ने कहा कि मंत्रलय के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद इस आशय का विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2008 में आखिरी बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों के वेतन में इजाफा किया गया था। इससे पहले तक राष्ट्रपति का वेतन 50,000 रुपये, उपराष्ट्रपति का 40,000 रुपये और राज्यपालों का वेतन 36,000 रुपये प्रतिमाह था।

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Category: News, Seventh Pay Commission

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