Railway Federation to press for their demands in New Year

| November 17, 2017

गोरखपुर। सम्मेलन में रेलकर्मियो की समस्याओं और रेल की संरक्षा से जुड़े तीस प्रस्ताव पास किए गए। न्यूतम वेतन जो कि वर्तमान में रु 1800/ है उसमें 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी 2016 से वेतन पुर्ननिर्धारण के फॉमूले में सुधार करते हुए बढ़ोत्तरी । रेल कर्मियों को मिलने वालो भत्तों की दर, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की तिथि पूर्व के अनुरूप हो। एमसीपी के द्वारा आर्थिक पदोन्नति के लिए वेरी के स्थान पर गुड बैन्चमार्क बहाल किया जाए। एम.ए.सी.पी के तहत वास्तविक पदोन्नति का लाभ दिया जाये। एलडीसीआई और जीडीसीई के माध्यम से होने वाले पदोन्नतियों के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी की जाए। एन.पी.एस को समाप्त किया जाये तथा पेंशन तथा पारिवारिक पेंशन की भुगतान सभी को पुरानी पेंशन योजन के अनुसार दिया जाय। भले ही नियुक्ति 1 जनवरी 2004 के बाद हुई हो।








विभिन्न कोटियों के लिए सातवें वेतन ओयोग द्वारा सिफारिश किये गये उच्च वेतन को 1 जनवरी 2006 से शीघ्र लागू किया जाए। सभी सुपरवाईजर पदों को, जो कि वर्तमान में स्तर 7 से 9 तक है, उनकों ग्रुप बी में अपग्रेड किया जाए। रनिंग कर्मचारियों के अलाउंस तथा अन्य भत्तों में शीघ्र सुधार किया जाए । पदों का अंधाधुध सरेन्डर बंद किया जाए। नई रेलवे लाईनों, स्टेशनों, बढ़े हुए कार्य तथा नई गाड़ियों के चलने के लिए आवश्यक अतिरिक्त पदों का सृजन बिना मैचिंग सेविंग के सुनिश्चित किया जाए। विभागीय कार्य को कान्ट्रेक्ट लेबर रेगुलेशन एंड अबालिशन एक्ट 1970 की अवहेलना करते हुए बाहरी एजेन्सियों और ठेकदारों को देना बंद किया जाए। लार्सजेस के महत रेल कर्मचारियों के बच्चे को नौकरी देने का लाभ रेलकर्मियों को पुन: बहाल की जाए ।




अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति माह 3 की अवधि में सुनिश्चित की जाए। रेल की सभी ईकाइयों में प्रशिक्षण प्राप्त एक्ट अप्रन्टिेसेजं को भारतीय रेल में नियुक्त देना सुनिश्चित किया जाए। रेलवे कालोनियों तथा रेल क्वाटरों की दशा में अपेक्षित सुधार करते हुए सभी आवासों में बिजली की व्यवस्था, पीने का पानी का समुचित इंतजाम एवं आधुनिक सुविधा मुहैया करायी जाए। रेलवे अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराओ और गैंगहटो, रोड साईड स्टेशनों तथा सुदूरवर्ती जगहों पर आवश्यक स्थानों पर चिकित्सा मुहैया करायी जाए। सभी रेलकर्मी के बच्चों के लिए समुचित शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रेल मंत्रालय द्वारा25/10/2017 के जारी रेल कर्मचारी चार्टर का अक्षरश: अनुपालन करते हुए रेलकर्मियों की समस्याओं का शीघ्र निदान सुनिश्चित करो। अर्ध-प्रशासकीय कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की रेलवे में नियुक्ति करते हुए उन्हे जारी किया जाए। जरूरतमंत रेल कर्मचारियों के बच्चों को रेलवे में नियुक्ति दी जाए ।




द्विपक्षीय वार्ता एवं उसमें लिये गये निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए उन्हें जारी किया जाए । रेल मंत्रालय के 30 जनवरी 2017 को जारीउन आदेशों को जिनमें सरंक्षा कोटियों में कार्यरत तकनीकी पर्यवेक्षकों को यूनियन का पदाधिकारी बनाने पर रोग लगाई थी, उन्हे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। रेलवे उत्पादन ईकाईयों को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए रेलवे के आतमनिर्भरता में बृद्वि की जाए। बिबेक देब राय कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने से पहले कर्मचारी पक्ष के साथ विस्तृत वार्ता सुनिश्चित किया जाए जैसा कि राकेश मोहन कमेटी की रिपोर्ट के समय दिया गया था। सभी बची हुई कमेटियों की कैडर रीस्ट्रक्चरिंग सुनिश्चित की जाए। पूर्व रेल मंत्री द्वारा घोषित प्रत्येक रेल कर्मचारियों के लिए घर की योजना को तुरन्त लागू किया जाए।

ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने आज ऐलान किया कि केंद्र सरकार ने रेल के निजीकरण की कोशिश की तो हम ईट से ईट बजा देंगे। रेल दुर्घटनाओं पर झूठा रोना रोकर यह सरकार सिर्फ लोगों की सहानुभूति बटोरती है। दुर्घटना न हो इसके लिए सही दिशा में काम करना यह सरकार नहीं चाहती। 2.66 लाख पद रिक्त पड़े हैं जिस में 1.66 लाख पद सुरक्षा से जुड़े हैं। इन्हे भरे बिना दुर्घटना रोकना असंभव है। इस दिशा में वर्तमान केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही। रेल दुर्घटनाओं का मुख्य कारण यही है। संगठन के 93वें वार्षिक अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि यदि सरकार ने रेल कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी तो फेडरेशन की युवा शक्ति मुंहतोड़ जवाब देगी। संगठन के युवा हमारी ताकत हैं।

रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिये हम अपने साथियों कों जागरूक करेंगे। आज यदि हम एकजुट नहीं होते तो यह लड़ाई इतनी आसान नहीं होती। रेलवे वर्कशाप खतरे में है, निजीकरण करने की योजना बनाई जा रही है लेकिन निजीकरण की आंधी को रोकने का काम हमारे युवा साथी करेंगे। उन्होंने कहा मजदूर विरोधी सरकार ने ट्रेड यूनियनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। पूरी प्रक्रिया पहले से जटिल कर दी गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा यह है कि जब तक रेल यूनियन रजिस्र्टड ही नहीं होगी आंदोलन नहीं होंगे। यह सोचना उसका ्रभम है। कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। हमारे लिये 2019 महत्वपूर्ण वर्ष होगा, तैयारी अभी से शुरु होनी चांिहये। आईटीएफ के प्रतिनिधि स्टेफन ने कहा कि आप सभी मजदूर संगठनों की समस्याओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर बराबर उठाया जाता है। आगे भी उठाया जाएगा। आईटीएफ की अध्यक्ष प्रीति सिंह ने कहा सरकार ने काफी कुछ किया है लेकिन सुरक्षा के लिये काफी कुछ किया जाना चाहिये।

अधिवेशन में राष्ट्रीय परिदृश्य और भारतीय रेलों की वर्तमान दशा पर गंभीर चिन्तन हुआ। आफ लोडिंग तथा निजीकरण की बयार बहुत तेजी से भारतीय रेलों में बह रही है । वर्तमान सरकार इसमें और तेजी लाने के लिए प्रयासरत है। इसी दिशा में भरतीय रेलों में सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। निजीकरण की दिशा में उठाया गया गंभीर कदम है। हाल में दो विदेशी कंपनियों के साथ करार करके दो नई उत्पादन इकाइयां, मधेपुर और महरौरा (विहार) में स्थापित की जा रही हैं । इसके स्थापना से भारतीय रेल की वर्तमान उत्पादन इकाइयों व उसमें कार्यरत रेल कर्मियों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। एक-एक करके विभागीय संस्थानों को बंद करने के आदेश जारी किए जा रहे हैं।ं जिससे इनमें कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य पूर्णत: अंधकारमय हो जायेगा।आल इण्डिया रेलवे मेन्स फेडरेशन भारत सरकार की इस नीति से इसलिए भी चिंचित है। निजीकरण से केवल रेल कर्मचारी ही नहीं रेल यात्री और उपभोक्ता भी परेशान होगे। रेल देश की आम जनता का सुलभ और सस्ता यातायात का साधन है। इसीलिए इसे देश की जीवन रेखा की संज्ञा दी गयी।

देश की आम जनता को इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। एआईआरएफ का यह अधिवेशन रेलों के सुरक्षित संचालन के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त करता है। सरंक्षा कोटियों में कर्मचारियों की भारी कमी तथा गुणवत्ता पूर्वक सामग्री की आपूत्तर्ि का अभाव रेलों के सुरक्षित संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा है।

यह अधिवेशन रेल कर्मचारियों की विभिन्न जायज मांगों जैसे एनपीएस में गारेन्टेड पेंशन एवं फेमिली पेंशन की व्यवस्था, न्यूनतम वेतन एवं फिटमेन्ट फामरूले में सुधार, लार्सजेस स्कीम का विस्तारीकरण, एक्ट अप्रेन्टिसेज का रेल सेवा में नियमितिकरण, पेंशन के फिक्स मेडिकल एलाउन्स में बढ़ोत्तरी, कार्यस्थलों में सुधार, कर्मचारियों को आधुनिक औजार की आपूर्ति, वरिष्ठ टेक्निकल सुपरवाइजर्स को गजटेड स्टेटस दिये जाने, रेलवे कालोनियों की दशा में सुधार, ट्रैकमैन एवं रनिंग स्टाफ की समस्याओं का निवारण, बढ़ती ठेकादारी प्रथा पर अंकुश आदि पर भारत सरकार व रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करते हुए इन मांगो को शीघ्र पूरा करना जरूरी है। यदि शीघ्र इन्हे माना नहीं गया तो भारतीय रेलों पर दशकों से चली आ रही औद्योगिक शांति पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। इस अवसर पर एआईआरएफ के सहायक महामंत्री साथी केएल गुप्ता के 100 वर्ष आयु पूर्ण होने पर सभी पदाधिकारियों ने जोरदार स्वागत किया। आज के डेलीगेट सेशन में एनई रेलवे मजदूर यूनियन के अध्यक्ष साथी बसंत चतुव्रेदी ने महामंत्री एआईआरएफ के साथ मीडियाकर्मियों को सम्मानित किया। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के संयुक्त महामंत्री नवीन कुमार ने भी सम्बेधित किया।

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Category: Indian Railways, News

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