DRMs given more powers by Railways

| November 8, 2017

मुरादाबाद : ट्रेन संचालन व रेलवे में बिगड़ी व्यवस्था में सुधार करने के लिए रेलवे बोर्ड ने मंडल रेल प्रबंधक को महाप्रबंधक वाला अधिकार दे दिया है। डीआरएम अब एडीआरएम का कार्य क्षेत्र बदल सकते हैं और ब्रांच अफसर का तबादला भी कर सकते हैं। 1नये रेल मंत्री व रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने कार्य संभालने के बाद रेलवे में परिवर्तन का काम शुरू कर दिया है। नीचे के अधिकारियों को असीम अधिकार देने जा रहा है। यात्रियों व कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रमुख स्टेशनों पर स्टेशन निदेशक तैनात कर दिये हैं, जिन्हें हर तरह का अधिकार दिया गया है। मंडल स्तर पर व्यवस्था में सुधार करने के लिए प्रथम चरण में देश के 16 मंडलों में दो-दो एडीआरएम तैनात किये हैं।








एक एडीआरएम प्रशासनिक व यात्री सुविधा देखेंगे। जबकि दूसरे एडीआरएम सुरक्षित ट्रेन संचालन व तकनीकी कार्य देखेंगे। बोर्ड ने डीआरएम को आर्थिक अधिकार भी दिया है, जिसमें डीआरएम चार करोड़ रुपये तक का काम बिना किसी की स्वीकृति के करा सकते हैं। डीआरएम के पास अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होने से अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। रेलवे बोर्ड से डिप्टी डायरेक्टर (ईएंडआर) सुनील प्रभात द्वारा तीन नवंबर को जारी पत्र डीआरएम आफिस में मंगलवार को मिल गया। जिसमें डीआरएम के अधिकार में वृद्धि की गई है। डीआरएम एडीआरएम के कार्य क्षेत्र का परिवर्तन कर सकता है।




अभी तक यह अधिकार रेलवे बोर्ड को था। इसी के साथ मंडल में तैनात अलग-अलग विभागों का विभागाध्यक्ष (ब्रांच अधिकारी) का जोन के अंदर तबादला करने का अधिकारी महाप्रबंधक को होता था। यह अधिकार भी अब डीआरएम के पास है। डीआरएम किसी भी ब्रांच अधिकारी का तबादला कर सकता है। उदाहरण के लिए सीनियर डीसीएम को सीनियर डीएमओ के पद पर तैनात कर सकता है। इसके लिए डीआरएम को मुख्यालय से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकार बढ़ने के साथ जिम्मेदारी भी डीआरएम की बढ़ गई है। माना जा रहा है उक्त व्यवस्था के बाद रेलवे में सुधार होगा। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने रेलवे बोर्ड से उक्त आदेश जारी होने की पुष्टि की है।

एक के बाद एक ट्रेन हादसे होने के बावजूद सतर्कता नहीं बरती जा रही है। इसी का नतीजा है कि एक बार फिर से हापुड़ के पास खुले रेल फाटक से गुजर रही एसी एक्सप्रेस ट्रैक्टर ट्राली को छूती हुई निकल गई। इस मामले में स्टेशन मास्टर समेत दो को निलंबित करने के साथ ही जांच के लिए तीन अधिकारियों की टीम गठित की गई है। हापुड़-पिलखुआ के बीच मानव सहित रेल फाटक संख्या-74 है। मंगलवार की सुबह 7.45 बजे लखनऊ से नई दिल्ली जा रही एसी एक्सप्रेस और हापुड़ की ओर जा रही पैसेंजर ट्रेन के लिए गेट बंद किया गया था। हालांकि यह गेट इंटर लाकिंग सिस्टम आधारित है।




हापुड़ की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन के गुजरने के बाद गेटमैन ने गेट खोल दिया। इसके बाद एक ट्रैक्टर-ट्राली रेलवे फाटक से गुजरने लगी। इसी दौरान एसी एक्सप्रेस भी आ पहुंची। चालक ने ट्रैक्टर की गति बढ़ा दी लेकिन इसके बावजूद एसी एक्सप्रेस ट्राली को छूते हुए निकली। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। कंट्रोल रूम ने गाजियाबाद-हापुड़ के बीच रेल यातायात बंद करा दिया। ट्रेन को पिलखुआ स्टेशन पर रोक लिया गया। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारियों के निरीक्षण के बाद ट्रेन संचालन शुरू किया गया।

इसकी वजह से काठगोदाम जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस, दिल्ली जाने वाली फास्ट पैसेंजर, श्रमजीवी एक्सप्रेस व पूजा स्पेशल बीच रास्ते में रुकी रहीं। स्टेशन मास्टर हापुड़ का कहना था कि बिना अनुमति के ही गेटमैन से फाटक को खोल दिया, जबकि गेटमैन का कहना था कि स्टेशन मास्टर ने उसे फाटक खोलने के आदेश दिए थे। यह फाटक इंटरलॉक था, गेट खुले रहने की स्थिति में सिग्नल लाल हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डीआरएम ने बताया कि स्टेशन मास्टर हापुड़ सुनील दत्त व गेटमैन प्रेम चंद्र को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच को तीन अधिकारियों की टीम गठित की है।

DRM powers

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.