पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव

| November 2, 2017

मंत्री बोले, मुकदमेबाजी के चलते नहीं हो पा रहा जल्दी निपटारा, सरकार की सफाई, मामला विचाराधीन है

सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण का मसला मुकदमेबाजी में फंसने से पिछले साल से पदोन्नति रोके जाने से कर्मचारियों में जबरदस्त गुस्सा है। कर्मचारियों की तरफ से सरकार को बड़ी संख्या में ज्ञापन मिले हैं, जिनमें कहा गया कि वे सरकार की अनिर्णय की स्थिति का खामियाजा भुगत रहे हैं। कर्मचारियों का गुस्सा देखते हुए सरकार की तरफ से कहा गया है कि मामला विचाराधीन है।








कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्री डा. जितेंद्र सिंह का कहना है कि मुकदमेबाजी के चलते देर हो रही है लेकिन सरकार रास्ता तलाशने में जुटी है। जल्दी ही कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा। अनेक हाईकोर्टों ने पदोन्नति में आरक्षण को रद्द कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने तो 1997 से ही पदोन्नति में आरक्षण को गैरकानूनी करार दे दिया और तभी से पदोन्नति वापस लेने का आदेश दिया है। इस पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी और कोर्ट में अगली तारीख 6 नवम्बर है।




लेकिन पिछले साल सितम्बर में कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी को पत्र भेजकर कहा कि जब तक आरक्षण का मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक पदोन्नति रोक दी जाए। 1997 के बाद जिन सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं हुई उन्होंने चिट्ठियां भेजकर वर्तमान में अपने जूनियर आरक्षित वर्ग के कर्मचारी के बराबर पदोन्नति की मांग की है। इससे सरकार में भी अफरातफरी का माहौल है।




लेकिन सरकार स्पष्ट रुख तय नहीं कर रही है। 1997 के अब तक पदोन्नति पाये एससी/एसटी वर्ग के कर्मचारियों की पदावनति करना आसान नहीं है। इसका राजनीति दुष्प्रभाव भी पड़ेगा। मंत्रालय ने एक सकरुलर जारी कर कहा कि मामला उसके विचाराधीन है और इस तरफ काम किया जा रहा है।

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