Supreme Court to take up case on Reservation in Promotion this week

| November 1, 2017

प्रोन्नति में आरक्षण रद करने को चुनौती

नई दिल्ली:- केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान रद करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। केंद्रीय सचिवालय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मामले की मेरिट पर सुनवाई होने तक हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।








मालूम हो कि दिल्ली हाई कोर्ट ने गत 23 अगस्त को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं पेंशन विभाग (डीओपीटी) का 13 अगस्त, 1997 का आदेश (ऑफिस मेमोरेंडम) रद कर दिया था। इस मेमोरेंडम के जरिये एससी/एसटी वर्ग के केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण का प्रावधान था। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद से केंद्रीय नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण खत्म हो गया है। हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश रद करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों के एम. नागराज के फैसले को आधार बनाया है। इसमें कहा गया है कि प्रोन्नति में आरक्षण देने से पहले पिछड़ेपन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आंकड़े जुटाने होंगे।




संघ ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का आदेश रद करने की मांग की है। इंद्रा साहनी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण की मनाही की थी। हालांकि, कहा था कि यह 16 नवंबर, 1992 से पांच साल के लिए जारी रखा जा सकता है। यानी प्रोन्नति में आरक्षण सिर्फ 15 नवंबर, 1997 तक जारी रह सकता था। 1इंद्रा साहनी के फैसले के बाद सरकार ने 1995 में संविधान में 77वां संशोधन कर अनुच्छेद 16 में प्रावधान (4ए) जोड़ा और एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण की आगे की राह खोली। इसी आधार पर डीओपीटी ने 13 अगस्त, 1997 का आदेश जारी किया था। एम नागराज के फैसले में 2006 में पिछड़ेपन के आंकड़े एकत्र होने के आधार पर ही प्रोन्नति में आरक्षण की इजाजत दी गई है।




एससी/एसटी एंप्लाइज एसोसिएशन ने वकील केएस चौहान के जरिये दाखिल याचिका में कहा है कि हाई कोर्ट ने विभिन्न पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया है। एम. नागराज के फैसले के बाद सरकार ने अटार्नी जनरल की राय ली थी। अटार्नी जनरल ने अपनी राय में कहा था कि एम. नागराज का फैसला राय मात्र माना जाएगा।

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