Railway to use sensors for track maintenance

| October 22, 2017

‘दास’ देगा रेल पटरी के टूटने की सूचना, रेलवे ट्रैक के बगल में बिछाई जाएगी ओएफसी, पटरी चटकते या टूटते ही हो जाएगी जानकारी

इलाहाबाद : पटरी टूटने के कारण होने वाले रेल हादसों पर रोकथाम के लिए भारतीय रेलवे डिस्ट्रीब्यूटेड अक्युसटिक सेंसिंग (डीएएस यानी दास) नामक नवीन तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। ट्रैक के बगल में ऑप्टिकल फायबर केबल (ओएफसी) बिछाई जाएगी। इसकी मदद से तत्काल पता चल जाएगा कि कहां पर पटरी चटकी है या टूट गई है। अभी तक रेल पटरी फ्रैक्चर होने का पता अल्ट्रा साउंड तकनीक या नियमित रूप से ट्रैक निरीक्षण से चल पाता है, लेकिन इस व्यवस्था के बावजूद कई बार ट्रेनें टूटी पटरी से गुजरने की घटनाओं से सवाल खड़े होने लगे।








ऐसे में इस समस्या से उबरने के लिए रेलवे अब डीएएस के रूप में नई तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि ट्रैक पर कोई डिवाइस नहीं लगाई जाएगी। ट्रैक के बगल में ओएफसी बिछाई जाएगी। जब ट्रेन ट्रैक से गुजरेगी तो उसकी ध्वनि से पता चल जाएगा कि पटरी किस स्थिति में है और उसमें कोई फ्रैक्चर तो नहीं है। ऑप्टिकल फायबर केबल में लेजर लाइट का प्रवाह होगा। जहां पर पटरी चटकेगी या टूटेगी वहां उसके ऊपर से गुजरने वाली ट्रेन के पहियों की अलग आवाज को ये डीएएस सिस्टम तुरंत पहचान लेगा। उसकी लोकेशन का पता तुरंत कंट्रोल रूम को हो जाएगा।




इसके बाद समय रहते इसे दुरुस्त किया जा सकेगा। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी गौरव कृष्ण बंसल का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटेड अक्युसटिक सेंसिंग तकनीक अल्ट्रा साउंड से बेहतर है। इससे तत्काल पता चल जाएगा कि कहां पर पटरी टूट गई है। 24 घंटे ट्रैक की निगरानी करना आसान होगा। रेल हादसों की रोकथाम में यह तकनीकी सबसे ज्यादा कारगर होगी।1इलाहाबाद-मुगलसराय सेक्शन से शुरुआत1डिस्ट्रीब्यूटेड अक्युसटिक सेंसिंग का प्रयोग यूरोप, ब्राजील और जापान जैसे विकसित देशों में हो रहा है।




अब इसकी शुरुआत भारतीय रेलवे में इलाहाबाद-मुगलसराय सेक्शन से होगी। ट्रायल के रूप 40 किलोमीटर तक ओएफसी बिछाई जाएगी। इसके लिए टेंडर 25 अक्टूबर को खुलेगा। इलाहाबाद-मुगलसराय सेक्शन पर सफल परिणाम आने के पश्चात इसका विस्तार किया जाएगा।

das

Category: Indian Railways, News

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