भारतीय रेल में नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ पर लगी रोक को अगले आदेश तक वापस ले लिया गया है

| October 22, 2017

भारतीयरेल में नौकरी छोड़ो नौकरी पाओ पर लगी रोक को अगले आदेश तक वापस ले लिया गया है। अब कर्मचारी लार्जस स्कीम का लाभ उठा सकते हैं। चार अक्टूबर को भारतीय रेल के सभी महाप्रबंधक के साथ रेल मंत्री पीयूष चावला ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में सीरियल नंबर 42 के तहत लिबरल एक्टिव रिटायरमेंट स्कीम फॉर गारंटेड एंप्लॉयमेंट (लार्जस) को तुरंत प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया था। इसे लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे (एनएफआईआर) के महासचिव एम राघवैया ने रेलवे बोर्ड के सचिव से इस लोकप्रिय स्कीम को बंद नहीं करने की मांग की थी। डॉ. रघुवैया ने बताया कि सुरक्षा श्रेणी में काम कर रहे रेलकर्मियों को लंबे समय तक अपना योगदान देने के बाद आश्रितों को इस स्कीम के तहत रेलवे में बहाल करने का अवसर मिलता था। डॉ. रघुवैया रेलमंत्री से मिलकर अपना पक्ष रखने वाले थे कि बोर्ड ने आदेश वापस ले लिया। फेडरेशन की इकाई रेलवे मेंस कांग्रेस के जोनल महासचिव एसआर मिश्रा ने इसे रेल कर्मियों के लिए बड़ी जीत बताया।








रेलवे बोर्ड ने पुलों की मरम्मत में लापरवाही पर किया आगाह

रेलवे बोर्ड ने 275 पुराने पुलों की मरम्मत के साथ 252 पुलों पर गति सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। इसी के साथ बोर्ड पुलों की निगरानी, निरीक्षण और मरम्मत में लापरवाही बरते जाने के खिलाफ सभी जोनों व डिवीजनों का आगाह किया है।

रेलवे बोर्ड ने पिछले दिनों देश भर में रेलवे पुलों की स्थिति का सर्वेक्षण कराया था। इनमें 275 पुलों को मरम्मत योग्य पाया गया। सर्वेक्षण में यह तथ्य उभर कर सामने आया है कि मरम्मत योग्य पुलों में केवल 23 पुलों पर ट्रेनों के लिए गति सीमा लागू है। जबकि बाकी पुलों पर गाड़ियां सामान्य गति से गुजरती हैं।




बोर्ड ने इसे संरक्षा के लिहाज से अत्यंत खतरनाक माना है और संबंधित अधिकारियों को पुलों की मरम्मत के साथ-साथ उन पर गति सीमा लागू करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में जारी आदेश में बोर्ड ने लिखा है, ‘मुख्य पुल अभियंताओं (सीबीई) को अपने-अपने जोन में ओआरएन-1 तथा ओआरएन-2 की रेटिंग के अंतर्गत चिह्नित सभी पुलों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए और उनके पुनरुद्धार की योजना तैयार करनी चाहिए।’

जाने रेलवे पुलों के रेटिंग का गणित-

रेलवे पुलों की स्थिति के अनुसार ओवरआल रेटिंग (ओआरएन) की जाती है। सबसे खराब स्थिति वाले पुल को ओआरएन-1 रेटिंग दी जाती है, जिसका मतलब है कि उस पुल को तुरंत मरम्मत की आवश्यकता है। ओआरएन-2 रेटिंग का मतलब है कि उक्त पुल को निर्धारित समय पर रिपेयर किया जाएगा। जबकि विशेष मरम्मत योग्य पुल कोओआरएन-3 रेटिंग प्रदान की जाती है।

रिपोर्ट में लिखा है यह-




आदेश में कहा गया है, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि जोनों ने इन पुलों के पुनरुद्धार की समयबद्ध प्लानिंग नहीं की है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि इनकी रेटिंग इनकी वास्तविक स्थिति के अनुरूप हुई भी है या नहीं। यह भी महसूस होता है कि डिवीजन और मुख्यालय स्तर पर भी असिस्टेंट डिवीजनल इंजीनियर द्वारा प्रदत्त रेटिंग को लेकर कोई गंभीरता नहीं दर्शाई जाती।’

यह भी पाया गया है कि ज्यादातर मामलों में मरम्मत योग्य पुलों पर न तो किसी तरह की गति सीमा लागू की गई है और न ही चीफ ब्रिज इंजीनियरों की तरफ से निरीक्षण का कोई कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। यही नहीं, कई पुलों पर लागू गति सीमा उनकी रेटिंग के अनुरूप नहीं है।

इन रेलवे जोन में हैं पुलों की मरम्मत की जरुरत-

बोर्ड द्वारा कराए गए सर्वे में पूर्व मध्य रेलवे में सबसे ज्यादा 63 पुल मरम्मत के योग्य पाए गए हैं। इसके बाद 61 पुल मध्य रेलवे में, 42 पुल पश्चिम रेलवे में तथा 41 पुल दक्षिण मध्य रेलवे में पाए गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2015 की रिपोर्ट में भी रेलवे पुलों के निरीक्षण और रखरखाव में लापरवाही की बात उजागर की जा चुकी है।

Category: Indian Railways, News, Uncategorized

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