Reservation in Promotion – Several Litigations pending in Supreme and Other courts left Ministries crippled

| October 4, 2017

पदोन्नति में आरक्षण पर मचा है घमासान, एक साल से नहीं हो रहे प्रमोशन, खाली होते जा रहे पद, कई मंत्रालयों ने चिट्ठी भेजकर पद भरने का आग्रह कियाराजनीति को प्रभावित करने वाले इस मसले को उच्चस्तर पर किया जा रहा नजरअंदाज

सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण पर विभिन्न हाई कोटरे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लगी पाबंदी के चलते पिछले एक साल से कोई प्रमोशन नहीं हुआ है। इसकी वजह से सरकार मशीनरी में काम करने वाले मध्यस्तरीय प्रबंधन यानी सेक्शन ऑफिसर से लेकर उपसचिव के स्तर तक बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। कुछ मंत्रालयों में तो हाहाकर की स्थिति पैदा हो गई है। कार्मिक मंत्रालय से खाली पदों को भरने की मांग की जा रही है, लेकिन बाबुओं की चाल में फाइलें फंसी पड़ी हैं।








सामान्य वर्ग के कर्मचारी सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहे हैं। सामान्य वर्ग का तर्क है कि आरक्षण सरकारी नौकरी में आने तक मिलना चाहिए। उसके बाद प्रमोशन में नहीं मिलना चाहिए। इससे सामान्य वर्ग के लोगों को सामान अवसर मिलने के अधिकार का हनन होता है। समता आंदोलन ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने एम नागराज जजमेंट को लागू नहीं किया है, इसलिए सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।




एम नागराज जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को अधिकार दिया था कि वे चाहें तो प्रमोशन में रिजर्वेशन दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा था कि वे एससी, एसटी के पिछड़ेपन, सरकारी नौकरियों में उचित प्रतिनिधित्व और दक्षता की जांच कर प्रमोशन दे सकते हैं। हालांकि, इसी आधार पर कुछ राज्यों की अदालतों ने प्रमोशन में आरक्षण देने की व्यवस्था खत्म कर दी। कुछ राज्यों ने भी प्रमोशन में आरक्षण खत्म दिया है। लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया था। इसलिए समता आंदोलन के लोग सुप्रीम कोर्ट गए।कार्मिक मंत्रालय के स्तर पर हुई लापरवाही के कारण पिछले साल से केंद्र सरकार में अंडर सेक्रेटरी के स्तर तक प्रमोशन नहीं हुए हैं।




यदि किसी विभाग में हुए भी हैं तो अस्थाई प्रमोशन हुए हैं। इसके कारण कनिष्ठ और मध्यस्तर के प्रबंधन में पद खाली पड़े हैं। केवल केंद्रीय सचिवालय सेवा की बात करें तो एसओ लेवल पर कुछ 3137 पदों में से 1100 खाली पड़े हैं। अंडर सेक्रेटरी स्तर पर 1700 पद हैं, जिनमें से 200 पद और डिप्टी सचिव स्तर पर करीब ढाई सौ पद खाली पड़े हैं। य

ही तीन स्तर होते हैं जो सरकार की मशीनरी हैं। इससे ऊपर के अधिकारी नीतिगत निर्णय लेते हैं और काम इन्हीं कैडर से कराते हैं। केंद्रीय सचिवालय सेवा के अलावा अन्य दूसरी सेवाएं भी हैं, जो प्रमोशन की दिक्कतेें झेल रही हैं। वहां भी अनेक पद खाली पड़े हैं। आरक्षण का मामला राजनीतिक है, इसलिए केंद्र सरकार इसमें सीधे हाथ नहीं डाल रही है। सबको कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है। क्योंकि पदोन्नति में आरक्षण खत्म हुआ तो एससी, एसटी नाराज होगा और आरक्षण मिला तो सामान्य वर्ग के लोग नाराज होंगे।

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