पहली बार अफसरों के घरों पर काम करने वाले 50,000 गैंगमैन रेलवे ट्रैक पर लौटे

| September 26, 2017

रेलवे में हाकिमों के घर ड्यूटी बजाने वाले करीब 50,000 ग्रुप डी कर्मियों को वापस काम पर लौटाया गया है

रेलवे में हाकिमों के घर ड्यूटी बजाने वाले करीब 50,000 ग्रुप डी कर्मियों को वापस काम पर लौटाया गया है। रेलवे बोर्ड के नए चेयमैन अश्विनी लोहानी के आदेश पर रेलकर्मियों की ड्यूटी पर वापसी हुई है। पूर्व मध्य रेल में ऐसे ही करीब 1000 कर्मियों को उन स्थानों पर वापस भेजा गया है जहां आधिकारिक तौर पर उनकी पोस्टिंग थी। रेल के इतिहास में यह पहला मौका है जब अफसरों के घर ड्यूटी बजा रहे कर्मियों को ड्यूटी पर वापसी के लिए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को आदेश देना पड़ा है।

पूरे मामले का रोचक पक्ष यह है कि कागजों में रेलकर्मी अपने मूल स्थान पर ही तैनात दिखाए गए हैं, लेकिन वे काम बड़े अफसरों के यहां कर रहे थे। लिहाजा किस डिवीजन में कितने कर्मी अपने मूल स्थान से गायब थे और जोनवाइज इनके लौटने की वास्तविक संख्या कितनी है बताना कठिन है।
पिछले महीने उत्तर प्रदेश में दो ट्रेन दुर्घटनाओं के बाद शुरू हुई कार्रवाई
लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के बाद रेल ट्रैकों के मेंटेनेंस और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। पिछले महीने यूपी में लगातार दो रेल हादसों के बाद बोर्ड के अध्यक्ष ए.के.मित्तल को इस्तीफा देना पड़ा था। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी इस्तीफे की पेशकेश की थी, जिसके बाद पीयूष गोयल को रेलमंत्री की जिम्मेवारी सौंपी गई। 24 अगस्त को पदभार संभालने के 3-4 दिन बाद ही सभी रेलवे जोन और डिवीजन को चेयरमैन रेलवे बोर्ड का यह संदेशा मिल गया था कि जिन अफसरों के घर पर ग्रुप डी कर्मी तैनात हैं उन्हें फौरन स्टेशनों पर वापस बुलाया जाए। इस आदेश पर आनन-फानन में रेलकर्मियों को वापस बुलाया गया। बड़े अफसरों के घर तैनाती की बात सब जानते थे लेकिन कोई उन्हें वापस बुलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
हर डिवीजन में दो हजार से अधिक कर्मी थे अफसरों के घर तैनात
रेलवे में कुल सोलह जोन हैं। हर जोन में कई डिवीजन हैं। सिर्फ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में ही 5 डिवीजन हैं। हर डिवीजन में एक हजार से ढाई हजार ग्रुप डी रेलकर्मी अफसरों के आवास पर तैनात थे।
ट्रैक निगरानी के लिए गैंगमैन, ट्रैक मैन के पद पर हुई थी भर्ती पर अब भूल चुके हैं कामगैंगमैन और ट्रैक मैन पर ट्रैक की पेट्रोलिंग से लेकर मेंटेनेंस तक का काम होता है। हर ट्रेन के गुजरने के पहले पटरियों की जांच करते हैं। इनकी तैनाती अफसरों के यहां होने से पटरियों की देखरेख का बोझ कुछ कर्मियों पर ही होता है जिससे चूक की गुंजाइश रहती है। दानापुर डिवीजन में वापस ड्यूटी पर लौटे एक कर्मी ने कहा कि पटरी के नट-बोल्ट कैसे कसे जाते हैं नहीं पता। क्योंकि शुरू से ही वह हाकिमों की सेवा में लगा रहा।
गैंगमैन-ट्रैक मैन और पोर्टर का काम नहीं करना चाहते रेलकर्मी
रेलवे में ग्रुप डी की बहालियों में अब ज्यादातर पढ़े लिखे युवा आ रहे हैं। इसमें ग्रेजुएट भी हैं। नतीजा यह है कि वे रेलवे ट्रैक पर काम नहीं करना चाहते और जुगाड़ लगातर अपनी ड्यूटी अफसरों के घर लगवा लेते हैं। इसके कारण भी फील्ड में रेलकर्मियों की कमी है।
नहीं हुई है सबकी वापसी
ईसीआर कर्मचारी यूनियन के महामंत्री शशिकांत पांडेय ने बताया कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने सभी 16 रेल जोन को आदेश दिया है कि अफसरों के घर तैनात ग्रुप डी कर्मियों को मूल ड्यूटी पर वापस किया जाए। लेकिन बड़ी संख्या में रेलकर्मी अफसरों के घर आज भी काम कर रहे हैं। 12-13 सितंबर को दिल्ली में फेडरेशन की बैठक में मैंने चेयरैन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है।
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Category: Indian Railways, News

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