Railway reduced one hour sleeping time in trains

| September 18, 2017

यात्रीगण कृपया ध्यान दें। ट्रेन में अगर आपके पास स्लीपर क्लास का रिजर्वेशन है तो भी आप रात 10 बजे से पहले और सुबह 6 बजे के बाद सो नहीं सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। अब तक नियम था कि पैसेंजर रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक सीट खोलकर सो सकते थे लेकिन अब उसमें एक घंटे की कटौती कर दी गई है।








ट्रेन की अरक्षित बोगी में सफर करने के दौरान अक्सर यात्रियों के बीच सोने को लेकर झगड़े की नौबत आ जाती है। इस झगड़े को कम करने के लिए रेलवे ने सोने के तय समय में एक घंटे की कटौती कर दी है। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी सकरुलर के मुताबिक आरक्षित कोचों के यात्री अब रात 10 बजे से लेकर सुबह छह बजे तक ही सो सकते हैं ताकि अन्य लोगों को लोअर सीट पर बाकी बचे घंटों में बैठने का मौका मिल सके। इससे पहले सोने का आधिकारिक समय रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक था।1 मिडिल बर्थ पर सफर करने वाले यात्रियों को अब रात 10 से सुबह छह बजे तक ही सोने की अनुमति मिलेगी। शेष समय बैठकर गुजारना होगा।




इस संबंध में रेल मंत्रलय ने सभी जोन को आदेश जारी कर दिया है। मिडिल बर्थ पर आराम करने वाले यात्री के कारण लोअर और अपर के यात्रियों को दिक्कत होती है। उन्हें नीचे बैठने का मौका नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि अब सुबह ही मिडिल बर्थ वाले को अपनी सीट छोड़कर नीचे बैठना होगा। इसके साथ ही साइड लोअर बर्थ पर सफर करने वाले यात्री को साइड अपर के यात्री को दिन में नीचे बैठने की जगह देनी होगी। ऐसा तब भी होगा जब लोअर बर्थ में आरएसी वाले दो यात्री पहले से सफर कर रहे हैं। अपर बर्थ का यात्री रात 10 से सुबह छह बजे तक लोअर बर्थ का दावा नहीं कर सकेगा।

गर्भवती महिला, बीमार और दिव्यांग यात्रियों के लिए उनके आग्रह पर इन नियमों में रियायत दी जा सकेगी। हालांकि यह अनिवार्य नहीं होगा। मिडिल बर्थ पर सोने को लेकर रेलवे द्वारा समय निर्धारण यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखकर किया गया है। पर इससे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। देर रात यात्र शुरू करने वाले यात्री की सीट अगर मिडिल बर्थ है तो उसे सुबह छह बजे उठाना विवाद का कारण बन सकता है। दूसरी ओर मिडिल बर्थ खोलने के लिए लोअर में आराम करने वाले यात्री को भी जगाना होगा




रेलवे के डायरेक्टर (पैसेंजर मार्केटिंग) विक्रम सिंह की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि आरक्षित कोच में सोने की सुविधा रात में 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही है। बाकी समय में दूसरे आरक्षित यात्री सीट पर बैठ सकेंगे। रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि अक्सर शिकायत आती थी कि कुछ यात्री रात 9 बजते ही नीचे की बर्थ पर सो जाते थे, इससे ऊपर की बर्थ वाले यात्रियों को बैठने की जगह नहीं मिलती थी। इसी को देखते हुए यह बदलाव किया गया है।

रेलवे ने यह व्यवस्था की है कि अगर कोई यात्री बीमार, बुजुर्ग या दिव्यांग है तो उनके लिए इस नियम में कुछ ढील रहेगी। गर्भवती महिला यात्रियों के मामले में भी बाकी यात्रियों से सहयोग का आग्रह किया गया है। ऐसे में अगर वे चाहें तो ज्यादा समय तक सो सकेंगे।
कई हवाई अड्डों पर हैंड बैगेज पर टैग लगाने की अनिवार्यता खत्म करने के बाद CISF अब बोर्डिंग पास की जगह एक्सप्रेस चेक-इन सिस्टम शुरू करने की योजना बना रही है। इसे बायोमीट्रिक्स की मदद से लागू किया जाएगा। CISF महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने बताया कि हैदराबाद एयरपोर्ट पर एक्सप्रेस चेक इन सिस्टम शुरू किया गया है। प्रयोग कामयाब होने पर बाकी हवाई अड्डों पर भी बोर्डिंग कार्ड की जरूरत खत्म करने पर विचार होगा।

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Category: Indian Railways, News

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