Changes in Gratuity Calculations will bring more fortunes

| September 18, 2017

सरकार श्रम सुधारों के जरिये कर्मचारियों के हितों पर लगातार काम कर रही है। हाल ही में कैबिनेट ने कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दी है। इससे नौकरीपेशा वर्ग के करोड़ों कर्मचारियों को फायदा होगा। यह सीमा बढ़ने के बाद अब आपको कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी इसकी गणना स्वयं कर सकते हैं

किसी कंपनी या सरकारी विभाग में काम करने वाले कर्मचारी के वेतन में से एक हिस्सा ग्रेच्युटी के रूप में काटा जाता है। कर्मचारी जब नौकरी छोड़ता है या रिटायर होता है तो उसे उनकी ग्रेच्युटी की रकम उनके नियोक्ता द्वारा दे दी जाती है। किसी कंपनी या सरकारी विभाग में न्यूनतम पांच वर्ष तक अपनी सेवाएं देने वाला कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार हो जाता है। हाल ही में सरकार ने ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रपए कर दी है। सरकार के इस कदम से करोड़ों कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा।कौन होता है ग्रेच्युटी का पात्र ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 के तहत 10 या इससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी को अपने उन सभी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करना होता है जिन्होंने कम से कम पांच साल की सेवाएं पूरी कर ली हों। अगर कोई कर्मचारी रिटायर होता है, नौकरी छोड़ता है, नौकरी से बर्खास्त किया जाता है या स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है तो उसके नियोक्ता द्वारा उसे ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान तुरंत करना होता है।कैसे होती है गणना ग्रेच्युटी की गणना का तरीका एकदम आसान है। आप भी इसकी गणना कर सकते हैं। इसके लिए एक फामरूला होता है। फामरूले के तहत कर्मचारी की अंतिम बेसिक सेलरी और डीए को जोड़ लें और इसे 15 से गुणा कर दें।

15 से गुणा इसलिए किया जाता है क्योंकि ग्रेच्युटी की गणना में अंतिम माह के वेतन के हिसाब से 15 दिन का वेतन ही जोड़ा जाता है। इसके बाद जो रकम आए उसे नौकरी के वर्षो से गुणा कर दीजिये। गुणा करने के बाद जो रकम बने उसे 26 से भाग दे दीजिये आपकी ग्रेच्युटी रकम निकल आएगी। यहां पर 26 से भाग देने का तात्पर्य यह है कि ग्रेच्युटी की गणना में 26 दिन का महीना माना जाता है। इसलिए इसे 26 से भाग देते हैं। आप इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि मान लीजिये राजेश तनेजा ने किसी कंपनी में 20 साल काम किया। रिटायरमेंट के समय उनका मूल वेतन 20000 रपए और महंगाई भत्ता 10000 रपए था। इस मामले में तनेजा की ग्रेच्युटी की गणना इस प्रकार की जाएगी। (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) x 15 दिन x 20 वर्ष / 26 दिन = (20000 + 10000) x 15 दिन x 20 वर्ष /26 = 450000

नामिनी बनाने की छूट

कोई भी कर्मचारी नौकरी के दौरान ग्रेच्युटी की रकम के लिए अपनी पत्नी, मां, पिता या भाई को नामिनी बना सकता है। कर्मचारी को अपनी नियुक्ति के समय अपने किसी परिजन का नाम नामिनी के रूप में दर्ज कराना होगा। यह नाम ‘‘एफ’ फार्म भरकर दर्ज कराया जा सकता है और बाद में इसमें बदलाव करने की भी सुविधा है। मान लीजिये किसी कर्मचारी ने शादी से पहले अपने अभिभावकों का नाम ग्रेच्युटी के हकदार के रूप में दर्ज करा रखा था तो शादी के बाद अपनी पत्नी का नाम दर्ज करा सकता है।देना होता है इनकम टैक्स निजी कंपनियों के कर्मचारियों की टैक्स के दायरे में आती है। ग्रेच्युटी को कर्मचारी की वेतन आय के रूप में देखा जाता है इसलिए इसपर इनकम टैक्स लगत है। सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की रकम पेंशन के रूप में मिलती है इसलिए यह टैक्स के दायरे से बाहर है। हालांकि दस लाख तक की ग्रेच्युटी को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है इससे ज्यादा की ग्रेच्युटी पर इनकम टैक्स देना होगा।

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