15 अगस्त 2022 को चलेगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, रेलकर्मियों को प्रशिक्ष्ण वडोदरा में

| September 12, 2017

सरकार का कहना है कि देश जब स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, उस वक्त देश की पहली बुलेट ट्रेन अपनी सीटी बजा देगी। इंडियन रेलवे की कोशिश बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट को तय वक्त से एक साल पहले ही पूरा करने की है ताकि 15 अगस्त 2022 को बुलेट ट्रेन अहमदाबाद और मुंबई के बीच अपना सफर शुरू कर सके।

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अहमदाबाद और मुंबई के बीच 508 किमी लंबे रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए 14 सितंबर को प्रॉजेक्ट का शिलान्यास किया जाएगा। यह सिर्फ रस्म अदायगी नहीं होगी बल्कि वाकई में उसी दिन से अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उसी दिन बड़ोदा में इस प्रॉजेक्ट के लिए ट्रेनिंग सेंटर का भी निर्माण शुरू किया जाएगा। रेल मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अन्य रूटों पर बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट के लिए इस कॉरिडोर के तैयार होने का इंतजार नहीं किया जाएगा बल्कि उन पर पहले ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।








गोयल ने बताया कि 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे संयुक्त रूप से बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट की नींव रखेंगे। एक लाख 8 हजार करोड़ रुपये वाले इस प्रॉजेक्ट में से लगभग 88 हजार करोड़ रुपये जापान 0.1 फीसदी ब्याज दर पर दे रहा है। इस लोन की अदायगी 50 साल में होगी। इस तरह से यह विश्व का सबसे सस्ता फाइनैंस होगा।
एक्सपोर्ट भी करेंगे बुलेट: रेलमंत्री का दावा है कि बुलेट ट्रेन ही नहीं, उसकी तकनीक भी भारत को मिलेगी इसलिए आने वाले वक्त में भारत ज्यादा बुलेट ट्रेनों का निर्माण करेगा और सस्ती दर पर बनी इन ट्रेनों को दूसरे देशों को निर्यात कर सकेगा। आने वाले वक्त में बुलेट ट्रेन की वजह से हवाई किरायों पर भी असर पड़ेगा।




अन्य रूटों पर भी काम: रेल मंत्री ने कहा कि अन्य रूटों पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए अहमदाबाद-मुंबई रूट पर काम पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा बल्कि पहले ही काम शुरू कर दिया जाएगा। अन्य रूटों में दिल्ली कोलकाता, दिल्ली मुंबई, दिल्ली चंडीगढ़, मुंबई चेन्नै, मुंबई नागपुर और दिल्ली नागपुर हैं।

‘मेक-इन-इंडिया’ को बढ़ावा देगी बुलेट ट्रेन परियोजना

एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत और जापान दोनों देशों की कंपनियों के बीच अनेक संयुक्त उद्यम स्थापित होंगे, जो बुलेट ट्रेन के लिए इंजन, बोगियों तथा कलपुर्जो आदि का निर्माण करेंगे। इससे भारत में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आने के साथ-साथ हजारों-लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। 120 हजार निर्माण मजदूरों को काम : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से भारत के निर्माण क्षेत्र को नई ताकत मिलेगी। इसमें नया निवेश आएगा। इस परियोजना निर्माण के दौरान ही लगभग 20 हजार निर्माण मजदूरों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके लिए इन मजदूरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बुलेट ट्रेन का पूरा ट्रैक गिट्टी रहित होगा। लिहाजा मजदूरों को गिट्टी रहित ट्रैक के निर्माण का अनुभव हासिल होगा। यह आगे चलकर अन्य रेल परियोजनाओं में काम आएगा।




वडोदरा में ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट : परियोजना के तहत वडोदरा में एक हाईस्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना भी होनी है। यहां रेल कर्मियों को सिमुलेटर के जरिये बुलेट ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जापान में सिमुलेटर पर ही यह ट्रेनिंग दी जाती है। यह इंस्टीट्यूट 2020 तक काम करने लगेगा। अगले तीन वर्षो में यहां तकरीबन 4000 रेलकर्मी बुलेट ट्रेन संचालन का प्रशिक्षण हासिल करेंगे। आगे चल कर देश में जितनी भी बुलेट ट्रेन परियोजनाएं स्थापित होंगी, सभी के लिए यहीं पर आपरेशन स्टाफ तैयार होगा। जापान में प्रशिक्षण : अभी भारतीय रेलवे के 300 युवा अधिकारी जापान में बुलेट ट्रेन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। दीर्घकालिक योजना को ध्यान में रखते हुए जापान सरकार ने हर साल 20 भारतीय अधिकारियों को जापानी विश्वविद्यालयों में परास्नातक कोर्स प्रदान करने का प्रस्ताव किया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का पूरा खर्च जापान सरकार उठा रही है।1जापानी तकनीक समय की भी पाबंद : जापानी शिंकांशेन तकनीक को उसकी विश्वसनीयता व सुरक्षा के लिए जाना जाता है। जापान में पचास वर्षो में एक भी ट्रेन दुर्घटना न होना इसका प्रमाण है।

यही नहीं, समय पालन में भी इसका कोई जवाब नहीं है। जापानी ट्रेनें कभी एक मिनट से ज्यादा लेट नहीं होतीं। इसका मतलब कि भारत में बुलेट ट्रेन भी पूर्णतया सुरक्षित और समय की पाबंद होगी। आपदा पूर्वानुमान तकनीक के साथ काम करने के कारण किसी प्राकृतिक आपदा के इस वक्त भी ये ट्रेन दुर्घटना का शिकार नहीं होगी। अन्य बुलेट ट्रेनों पर भी काम : शिंकांशेन तकनीक के भारत में आने से भविष्य में कई बुलेट ट्रेन परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है। इन सभी में 7-8 घंटे का ट्रेन का सफर दो घंटे में पूरा होने की संभावना है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के साथ सरकार ने दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-नागपुर, मुंबई-चेन्नई और मुंबई-नागपुर रूटों पर भी बुलेट ट्रेन चलाने की रूपरेखा तैयार की है। मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन करने वाला नेशनल हाईस्पीड रेल कारपोरेशन इन सभी पर काम कर रहा है।

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Category: Indian Railways, News

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