Government and Unions on war path over Minimum Wages

| September 11, 2017

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए वेतन विधेयक (नए वेज कोड बिल) को मंजूरी दे दी है, जिसमें मजदूरों से जुड़े चार कानूनों को मिलाया गया है, इससे सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित होगी. प्रस्तावित कानून से देश भर में 4 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है. सूत्रों ने अनुसार वेतन लेबर कोड बिल में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, वेतन भुगतान कानून 1936, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 को एक साथ जोड़ा गया है. ड्राफ्ट बिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है.








इस विधेयक में केंद्र सरकार को सभी क्षेत्रों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित करने का अधिकार देने की बात कही गई है और राज्यों को उसे बनाए रखने के लिए कहा गया है. हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा तय की गई मजदूरी को राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से बढ़ा भी सकती हैं. इस बिल को मॉनसून सेशन के दौरान संसद में पेश किया जाएगा. संसद का मॉनसून सत्र 11 अगस्त को समाप्त होगा.

सभी कर्मचारियों के लिए होंगे नए न्यूनतम मजदूरी मानदंड




नए न्यूनतम मजदूरी मानदंड सभी कर्मचारियों के लिए लागू होगा, चाहे उनका वेतन कुछ भी क्यों नहीं हो. फिलहाल केंद्र और राज्य का निर्धारित न्यूनतम वेतन उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जिन्हें मासिक 18,000 रुपये तक वेतन मिलता है. वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सभी उद्योगों के श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम वेतन तय हो सकेगा. इसमें वो भी शामिल हो जाएंगे, जिन्हें 18,000 रुपये से अधिक सैलरी मिलती है.




मौजूदा मजदूर कानूनों को चार या पांच लेबर कोड्स में बांटा जाना चाहिए
इससे पहले, श्रम मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने एक लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि श्रमिकों पर द्वितीय राष्ट्रीय आयोग ने सिफारिश की है कि मौजूदा मजदूर कानूनों को व्यापक रूप से कामकाज के आधार पर चार या पांच लेबर कोड्स में बांटा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मंत्रालय मजदूरी पर चार लेबर कोड्स को ड्राफ्ट करने वाला है जिसमें औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और सुरक्षा, और कामकाजी परिस्थितियां, शामिल हैं.

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