रेल हादसे : कर्मचारियों के ही नहीं, अफसरों के पद भी हैं महीनों से खाली

| September 10, 2017

नई दिल्ली : देश में लगातार हो रहे रेल हादसों के बीच अक्सर रेलवे सेफ्टी को लेकर चर्चाएं होती हैं, लेकिन अफसरों की भारी-भरकम फौज के बावजूद रेलवे के आला अफसरों के पद खाली पड़े हैं। इनमें महाप्रबंधक स्तर के पद भी शामिल हैं। महत्वपूर्ण है कि रेलवे बोर्ड के दो सदस्यों के पद भी अब तक भरे नहीं जा सके हैं। इनमें से महाप्रबंधकों के कुछ पद तो महीनों से खाली पड़े हैं। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, पदों को भरने के लिए पैनल बनाकर रेलवे को ही भेजने होते हैं, लेकिन इस बार पैनल बनाने में भी देरी हुई। बाद में कुछ पदों के लिए पैनल बनाकर इस साल जुलाई में ही भेजे गए, लेकिन अब तक 4 जोनल रेलवे के जनरल मैनेजर (जीएम) की पोस्ट खाली पड़ी है। इनके अलावा दो प्रोडक्शन यूनिटस के मुखिया के पदों पर भी किसी की नियुक्ति नहीं की गई है।







कामकाज पर असर : रेलवे बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि जब एक के बाद एक रेल हादसे हो रहे हैं, उस स्थिति में जोनल रेलवे के जीएम जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति न होने का असर रेलवे के कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण है कि रेलवे बोर्ड के दो सदस्यों की भी अभी नियुक्ति होनी है। इनमें से बोर्ड के मेंबर पर्सनल और मेंबर इंजिनियरिंग के पद शामिल हैं। इनमें से मेंबर इंजिनियरिंग को तो हाल ही में खतौली रेल हादसे के बाद हटा दिया गया था और बाद में वे 31 अगस्त को रिटायर भी हो गए, जबकि मेंबर पर्सनल पहले ही रिटायर हो चुके हैं।



एक व्यक्ति के हिस्से कई जिम्मेदारी : रेलवे बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक, देशभर में रेलवे के 16 जोन में से 4 जोन में जीएम के पद खाली हैं। यह जिम्मेदारी किसी दूसरे जोन या किसी दूसरी प्रोडक्शन फैक्ट्री के महाप्रबंधक के जिम्मे है। ये जोन हैं : उत्तर रेलवे, पश्चिमी रेलवे, नॉर्थ-ईस्ट रेलवे और नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे। इनमें से नॉर्थ जोन का जिम्मा एम. सी. चौहान को दिया गया है, जिनके पास पहले से ही नॉर्थ-सेंट्रल रेलवे जोन की जिम्मेदारी है। इसी तरह से नॉर्थ-ईस्ट रेलवे का जिम्मा एक और जीएम कोर सत्यप्रकाश के पास है। वेस्ट रेलवे की जिम्मेदारी नॉर्थ-वेस्ट रेलवे के जीएम डी. के. शर्मा ही निभाते चले आ रहे हैं। नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम (कंस्ट्रक्शन) के रिटायर होने के बाद अब यह पद और नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम, दोनों का ही काम चहाते राम ही संभाल रहे हैं।

नए लोगों के नाम तय नहीं : सूत्रों के मुताबिक, इन महत्वपूर्ण पदों को रेवड़ियों की तरह बांटने की कोशिश की वजह से ही देरी हुई है। नॉर्थ रेलवे को छोड़कर बाकी कुछ जीएम के पदों के लिए पैनल तो तैयार कर लिया गया था, लेकिन उसे भेजा ही नहीं गया। बाद में जुलाई में इसे उच्च स्तरीय कमिटी को भेजा गया। लेकिन अब तक नए लोगों के नाम तय नहीं किए गए।




अधिकारियों की कमी से रेलवे के कामकाज और सेफ्टी पर असर पड़ना स्वाभाविक है। गौरतलब है कि लगातार हो रहे हादसे को देखते हुए रेलवे ने ट्रैक की जांच में इस्तेमाल होने वाली हस्तचालित ट्रॉली में जीपीएस लगाने का फैसला किया है।

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Category: Indian Railways, News

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