From bad economic condition to safety, Piyush Goyal to face many challenges in Railways

| September 5, 2017

पीयूष प्रभु की गाड़ी बढ़ाएंगे या खींचेंगे नई लाइन, रेलवे के विकास के लिए निवेश जुटाना और रेल दुर्घटनाएं रोकना होंगी बड़ी चुनौतियां

मंत्रिमंडल फेरबदल में प्रमोशन के साथ रेलवे की नई जिम्मेदारी पाने वाले पीयूष गोयल सुरेश प्रभु की गाड़ी को आगे बढ़ाएंगे या कोई नई लाइन खींचेंगे, जिस पर रेल के विकास का पहिया तेजी से घूम सके। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रेलवे के विकास के लिए निवेश जुटाने और रेल दुर्घटनाओं को रोकने की है। इन दोनों ही चुनौतियों के मुकाबले लिए हर हाल में धन जुटाना होगा ताकि रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संरक्षा संबंधी कार्य कराए जा सकें।

मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान रेल मंत्रालय को पीयूष गोयल तीसरे रेलमंत्री मिले हैं। सबसे पहले सदानंद गौड़ा को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन कुछ महीनों बाद हुए फेरबदल में सुरेश प्रभु को इसकी जिम्मेदारी मिली। करीब ढाई वर्ष के दौरान रेलमंत्री के रूप में सुरेश प्रभु ने रेलवे के विकास का लंबा-चौड़ा खाका खींचा। उन्होंने पूरे पांच वर्ष यानी 2019 तक के लिए उन्होंने रेलवे में आठ लाख 56 हजार करोड़ रुपये तक की योजना बना दी है। इनमें रेललाइन दोहरीकरण, विद्युतीकरण, पुल का काम व पटरियों के गेज परिवर्तन के प्रमुख काम हैं।




इसके अलावा काकोदर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप एक लाख करोड़ रपए का खर्च संरक्षा की दृष्टि से रेललाइनों और सिग्नल आदि के कार्यो पर किया जाना है ताकि रेल दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सके। सुरेश प्रभु ने अपने कार्यकाल में रेलवे के कामकाज को सुधारने और आय बढ़ाने के लिए ढेर सारी समितियां बनाकर उनकी सिफारिशों को लागू करने की कोशिश की। रेलवे का प्रशासनिक ढांचा बेहतर करने और आय बढ़ाने के लिए नई ट्रेन सेवा तेजस, हमसफर आदि की शुरुआत की। इसके अलावा स्टेशनों के पुनर्विकास, वाईफाई को बढ़ावा देने व ढुलाई के लिए नए प्रयास करने पर जोर दिया। यहां तक कि उनके समय में ही रेल बजट केंद्रीय बजट का हिस्सा बना। प्रभु ने सभी नजरिए से वर्ष 2019 तक के लिए रेलवे के विकास का खाका खींच रखा है।




अब नए रेलमंत्री पीयूष गोयल इस खाके के हिसाब से रेलवे को आगे बढ़ाएंगे अथवा कोई नई लाइन पर आगे बढ़ेंगे, क्योंकि 2019 में होने वाले चुनाव का लक्ष्य भी है और ढेर सारी चुनौतियां भी हैं। 13 लाख कर्मचारियों वाले रेलवे की आर्थिक सेहत सुधारना बड़ी चुनौती है। आमदनी और खर्च का संतुलन बनाना और फिर रेलवे का विकास करना कम बड़ी बात नहीं है। रेलवे का परिचालन औसत 95 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। लिहाजा रेलवे को विकास के लिए निवेश की ही तलाश रहती है।








जाहिर है कि बीते वर्ष रेलवे को एलआईसी से लोन के लिए करार करना पड़ा था। यात्री किराया बढ़ाने के लिए कोशिश नहीं हुई है, लेकिन फ्लैक्सी फेयर से और नॉन फेयर रेवेन्यू के जरिये कुछ अतिरिक्त राजस्व जुटाने के जरूर प्रयास किए गए हैं। नए रेलमंत्री के सामने निवेश जुटाने और चालू रेल परियोजनाओं को पूरा करने के साथ-साथ रेल दुर्घटनाएं रोकने की बड़ी चुनौती है। हालांकि कुछ दिनों पहले रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन के तौर पर अश्वनी लोहानी की नियुक्ति हुई है। इस प्रशासनिक बदलाव के साथ पीयूष गोयल पर नई ऊंचाइयां हासिल करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

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Category: Indian Railways, News

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